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सोमवार, 30 जनवरी 2012

महाशतक से पहिले महाप्रलय आ गया किरकेट टीम पर




भारतीय क्रिकेट टीम आखिरकार कंगारूओं के देश में कूद कूद के चलना तो दूर चारो खाने चित्त हो गई वो भी इत्ती चित्त कि देश की सेंटी जनता सेंटीमेंटल होकर अपनी उस टीम का जलूस निकालने में लग गई जिस टीम के विश्व कप जीतने पर जनता ने खुद जलूस निकाला था ।

भारतीय टीम कंगारूओं के साथ रेस में फ़िसड्डी आई , कोई बात नहीं अब दौडेंगे तो जीतेंगे भी और फ़िसड्डी भी आएंगे , लेकिन जुलम पे महाजुलम ये हुआ कि शतक तो शतक ससुरा एक महाशतक नहीं बन पाया । तेंदुलकर जेतना टेंसन में अपना इंडिया टीवी से बिंदिया टीवी तक हलकान हैं । तमाम विश्लेषक , कमेंटेटर सब आलोचना से लेकर नोचना तक चालू रखे हुए हैं । हो भी काहे नय ,पायदान से लेकर पोजीसन तक सब्बे डाऊन हो गिया । ऊपर से कोहलिया जम के उंगलबाजी भी कर दिए ओन्ने  ।कौनो खिलडिया सबका रिटायरमेंटी का बात कर रहा है तो कह रहा है कि हटाओ बुढबा सबको । माने कुल मिला के जईसे किरकेट हाकी हुई गई ,हाकी का प्रेस्टीज़ नय , हाकी का मारकेट भैल्यू के हिसाब से बोले हैं । 



अरे जगिए जनार्दन , आईपीएल आ रहा है बस समझिए कि झिंगालाला नर्तकियों के करेजा मार परफ़ारमेंस के बीच कलरफ़ुल ट्वेंटी-ट्वेंटी का लुत्फ़ उठाते हुए आप अपने इन्वैस्टमेंट का डायरेक्ट मल्टीप्लीकेशन होता देख सकते हैं अरे माने सट्टा इन्वैस्टमेंट फ़ेस्टीवल सेलिब्रेट करते हैं न ।

एक से एक लंगडा लूलहा ,कनहा कोतडा टाईप का भी तमाम खेलाडी जम के बल्ला भाजेंगे आ चौआ छग्गा पर बडी जोर से लोग नाचेंगे त समझ जाइएगा कि कंगारूआ सब के साथ ए लंगडी टांग का त किरकेट को कुछ समय के लिए बिंटर भकेसन पर भेज देना चाहिए , आ कुछ समय बाद । हा ..हा ....हा....हा...हा.. दुर मरदे कुछ समय बाद तो महाप्रलय आइए जाएगा , ससुरा महासतक बने कि न बने ।



रविवार, 29 जनवरी 2012

सतियानासी मोबाइलवा










उस दिन एक ठो सहकर्मी दोस कहे कि चलिए एक ठो नयका मॉडल का मोबाइल दिलवाइए , हम कहे कि तो ई में हमको काहे ले जा रहे हैं महाराज , हम तो टेक्नीकली एतना स्ट्रॉंग हैं कि कै मर्तबे तो अपना मोबाइल का मॉडल का नाम ही भूल जाते हैं । खैर उनके साथ हम भी लद के दुकान तक चल दिए । उहां मित्र जी मोबाइल दिखाने वाली बालिका से मित्र ने फ़ोन खरीदने से पहिले टोटल जानकारी मांग लिया ,कैमरा , एफ़एम ,इंटरनेट , जीपीएस , जीपीआरएस , और जाने कौन कौन आईएएस आईपीएस तक सब कुछ , बालिका भी हुलस के सब को एकदम डिटेल में समझा बुझा दी । मित्र से हम धीरे से बोले , अमां ई तो पूछो बे कि फ़ोन से फ़ोन तो किया सुना जा सकेगा न बढियां से , दोस हमको ई निगाह से देखे मानो कह रहे हों ...इह्ह्ह्ह! रहिएगा झा जी के झा जी न । अरे ई कौनो पूछने वाला बात है जी । आगे हम चिंतन मोड में चले गए 


हम सोच रहे थे कि अब ई ससुरा मोबाइल खाली दूरभाष नय रहा । बल्कि ई कहें कि दूरभाष के अलावे ही सब कुछ हो गया तो साईत ठीक रहेगा । माथा को थोडा डोलाके जब विसराम पोजीसन में लाकर हिसाब किताब लगाए तो देखे कि अरिस्स सरबा ई मोबाईलवा तो बहुत कुछ को लील गया जी । एक समय हुआ करता था , चिट्ठी पत्री वाला जमाना ऊ में भी हमारे जैसा चिट्ठकडा । एक लंबर के चिट्ठी लिखडुआ बन गए थे । हालत ई कि नौ ठो पत्र मित्र के अलावे रेडियो, समाचारपत्र , पत्रिका आदि में घनघोर रूप से चिट्ठई चलता था । गाम में मां को लिखी चिट्ठी अब भी उनका बक्सा में धरल है ।जानते हैं कि मां एक एक चिट्ठी को पचास पचास बार बढ जाती थी । पहिले फ़ोन फ़िर ई मोबाईल पूरे रामखटोला को बंद कर दिया । फ़ोनवे पर परनामपाती हाल समाचार डायरेक्ट फ़ेस टू फ़ेस ,बस हो गिया बंटाधार लेकिन कभी मोबाइल पर मां से ऊ बात सब नय कह सके जो चिट्ठी में तफ़सील से कहते थे । 

अरे चिट्ठी आ पेजर को मारिए गोली ई मोबाइलवा तो ट्रिन ट्रिन वाला फ़ोनवो को डुबा दिहिस । घनन घनन वाला गोलका डायल वाला मोटका फ़ोन त अब खाली इश्टार गोल्ड का पुरना सिनेमा में ही दिखाई देता है । आ फ़ोनवा के साथ एक टैम में खूबे चला फ़ोन घर अरे पीसीओ महाराज , एक एक रुपैय्या डाल के बतियाने वाला भी आ फ़ोटो स्टेट के साथ एक दू फ़ोन रखके बतियाए वाला निजि पीसीओ । अरे मानिएगा , कै मर्तबा तो लाईन लगाना पडता था । त ई मोबाइल पीसीओ , जेसीओ आऊर जेतना भी ओ था सबको गीर गया , आप लोग के इंग्लिश में बोले तो दे वर डंप्ड । लेकिन आह ,क्या मजा आता था एक रुपये का सिक्का डाल के तीन मिनट का कॉल करने में आ फ़िर आखिर का आधा मिनट में टूं .टूं ..टूं  , माने कि जो ई गपियाना चालू रखना है तो दक्षिणा बढाओ तात । और जब कौनो आसिक अपनी मसूका , रूठी हुई मासूका , सोचिए कि सुपरलेटिव डिग्री का इंतहा है ई पोजीसन मासूका का , उसको फ़ोन अप्र दुनिया के तमाम परपोगेंडा करके मनाने के लिए एक दर्ज़न सिका मुट्ठी में धर के आपसे अगिला नंबर पे टकर जाए तो तीन सिक्का के बाद आप दुनिया के तमाम लैला मजनूं को भरपेट गरियाए बिना नहीं रह सकते थे । आज ई मोबाईलवापे तो परेम संदेस को भी फ़ारवर्ड टू ऑल करके पूरे परेम का फ़ेम बजा डाला है रे बबा । 

गाम में होते थे तो कनपट्टी से रेडियो सटले रहता था हर हमेसा ही । पूरा दिन आ रात एवररेडी मनोरंजन समाचार सबे कुछ । दिल्ली आए तो पता चला कि एन्ने शर्ट वेव कौनो बनमानुस आउर एम एम घरेलू बुझाता है ।खैर बहुत समय तक कीन कीन कर रेडियो सुनते रहे । अब ई मोबाईल पांडे का भीतर एक दर्ज़न से जादे एफ़एम चैनल धर लेता है , आ कमाल ई है कि चौबीसों घंटा बौखता रहता है । कान में कनट्ठुस्सी लगाए गर्दन टेढा किए मोटरगाडी को चलाते बतियाते दिख जाएं तो समझ जाइए कि मोबाइलीटाईटिस से पीडित हैं कौनो । कैमरा का हाल तो पूछिए मत ,ओईसे तो डिजिटल कैमरा आ मूवी कैम जैईसन इनका अपना वसंज सब ही पुरना कैमरा का बेडा गर्क किया है अब त सुने हैं कोडक वाला सब दिवालिया घोषित हो गिया बेचारे सब , लेकिन मोबाइल के हाथ में आने से कुकर्म से सुकर्म टाईम का तमाम चित्रकारी आ भित्तिकला से ससिकला तक का पिरदरसन कर रहा है भाई लोग । मोबाइलवा का कैमरा देख के ही पहली बार जाने बूझे कि मेगा पिक्सल भी कोई चीज़ होता है आऊर ऊ गाडी के एक्सल से अलग होता है । 

चलिए एतना सब तो झेला जाता है फ़िर भी लेकिन ई मोबाइलवा जौन ची सबसे जादे खतम हो गया ऊ है अपना आज़ादी , अपना एकांत , अपना सुकून ..जब देखो तब टूं टूं टूंटूटूटू ..कन्ने हैं का कर रहे हैं , का करने जा रहे हैं , का कर के आ रे हैं , बिल्लैय्या रे बिल्लैय्या ..अबे ई मोबाईल हौ कि जसूस रे । कै बार तो मन किया  कि उठा के फ़ेंक दें टेंटुआ दबा के इसका लेकिन अब तो कंपलसरी सबजेक्ट हो गया ही सतियानासी मोबाइलवा । जादे लिखेंगे न तो सोनी का किराईम पेट्रोल वाला सब आ जाएगा लडने ,काहे से कि उ सबका टोटले केस मोबाईले से सुलझा लेता है । 

रविवार, 15 जनवरी 2012

पिछले दिनों प्रकाशित कुछ आलेख


पिछले दिनों ,डाक से प्राप्त हुए कुछ प्रकाशित आलेख ।आलेखों को पढने के लिए छवि के ऊपर चटका भर लगा दें । आलेख अलग खिडकी में बडे होकर खुल जाएंगे जिन्हें सुविधानुसार पढा जा सकता है ।


वीर प्रताप ,जालंधर

रांची एक्सप्रेस , रांची

सीमा संदेश ,श्रीगंगानगर , राजस्थान

व्यापार गणेश ,भोपाल, मध्यप्रदेश
 

अभी तक क्राइम टाइम्स , साप्ताहिक ,दिल्ली


बुधवार, 4 जनवरी 2012

अबे कितना सोओगे , का पत्थर हो जाओगे





ल्यो , अबे उत्तम पिरदेस में अफ़वाह उठी, कि, सोए तो पत्थर हो जाओगे ,
जियोह्ह क्या उडाए हो , अबे हो ही जाओ , मानुस रहे तो , हथिनी तले पिचाओगे

अबे जागो बे , ई अफ़वाह का माने है कि , अबे और कित्ता सोते रहोगे , पत्थर बन जाओगे क्या , जागो ..और अभी जागो , और इस बार कुछ अईसा जागो कि सियासत हनहनाते रह जाए । ई पिछला बरस साठ साल में पहली मर्तबा आपका कुंभकरनी नींद से डोला हिला तंद्रा तोडने का जो पिरयास चला , उसीका परिणाम है कि आज सब राजनीतिक दल कम से कम एक बात में तो किलियर हो ही गया । एको गो पलटिया आ एक्को गो नेताजी मंत्रीजी लोग बिल्कुल नय चाहता है कि कोई भी भ्रष्टाचार हटाने के लिए कुछ भी सोचने करने का सोचे , ई हक टोटल में टोटल ,गोल घर को ही प्राप्त है । साड्डा हक एत्थे रख ...चिचियाने के लिए ..आ खास करके ..ई कि उ चिचियाना लोग सुने भी तो आपको रिसि कपूर ,का बेटा होना नेसेसरी हो जाता है । त आपको का लगा , गिटार ले के आपहु कन्नो साड्डा हक करेंगे आ ..जनार्दन से जार्डन बन जाएंगे ..अरे , जार्डन ,फ़िलीपींस छोडिए , बनरपट्टी दास बनके रह जाएंगे , सिलेमा के उलट होता है जी रियलटी में ।






एक तो साला इहां , हवाई जहाज उडे न उडे , आ ई कोहरा में का खाक उडेगा , देखा जाए हालते तस्स्वुर कि ,

आठ विमान रद्द , कई लेट , टरनों के भी थमे पहिए ,
अबे हटो , हुर्रर्र , हर साल का इहे रोना है ,कुछ तो, नया कहिए ...

साले हर साल ..वाय दिन कोहरा वेरी , कोहरा बेरी गाते रहते हो भर ठंडा


तो जहाज उडे न उडे , अफ़वाह तो गज्जबे उडता है , अभी कुछ दिन पहिले का काला बंदरवा याद है कि भूल गए हो । अबे दिन दहाडे गोरा बंदर ,भूरा बंदर ,काना बंदर ,सब कुछ लुट्टम लुट्ट मचाए है , आ लोग बताह काला बंदर  के लिए , सोच रहे हैं कि अगर इंडिया टीवी वाला सब तब होता त बेचारा काला बंदर पे कै ठो एक्सकिलुसिव रपट दिखा डालता । लेकिन खैर , काला बंदरवा का बैड लक , आ मानिए तो इंडिया टीवी का भी एतना ब्राइट एपिसोड भी हुश गया  आप की अदालत  में साक्षात्कार होता काला बंदर का । चलिए छोडिए बंदरवा को , काहे और कितना उंगली किया जाए ।


तो कुल मिला के हुआ ये कि , कल परसों की रात बात ये फ़ैली कि , जो सोएगा वो पत्थर का हो जाएगा । अबे सोएगा से मतलब ,आलरेडी सोया ही तो है , न त एक बात बताओ सवा सौ अरब को सवा पांच सौ लोग मुगली घुट्टी पिलाते जा रहा है , दो बूंद जिंदगी के ,बांकी टोटल बूंद देसी के । लेकिन इसका एक लाभकारी ज्ञान ये हुआ कि यदि आप अभी निसाचर कटेगरी का नेटियास्टिक बंदा से पूरा रात उल्लू के जईसे बईठ कर घंटापचीसी बांचते रहते हैं तो ई फ़ैदा है कि ,आप ललटेन बन जाएं ,कुर्सी पर एक्के पोज में बैठल बैठल केकडा दास बन जाएं ,पत्थर तो नहिएं बनेंगे । तो हे , पार्थ , पहिचानो सबका स्वार्थ , आ टोटल समझो भावार्थ कि

अबे जागो हे जनता , आ जनार्दन बनके दिखाओ अब ,
अबे या तो सो ही जाओ ,या पत्थर ही हो जाओ अब ॥


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