झा जी कहिन
शनिवार, 31 अक्टूबर 2009

चचा टीपों को रहे समेट, हम पोस्टों को रहे लपेट (चिट्ठी चर्चा, दो लाईना )

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गजबे गजबे कमाल हो रहा है...चचा आज वापस आके धमाकेदार टीप चर्चा लगा दिये....बीच में पता नहीं कौन कहां सपना देख देख के फ़ुसफ़ुसाई दिया कि...चचा...
24 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 24 अक्टूबर 2009

कुछ जाने पहचाने, कुछ अनजाने : चिट्ठों को हम लगे सजाने (चिट्ठी चर्चा )

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जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि कुछ न कुछ नये प्रयोग तो होते ही रहने चाहिये...फ़िलहाल तो इलाहाबाद में हो रहे ब्लोग्गर सम्मेलन की धूम मची हुई...
26 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 21 अक्टूबर 2009

ब्लोगजगत का आईना : चर्चा दो लाईना (चिट्ठी चर्चा )

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शुकल जी ने जब चिट्ठा चर्चा की शुरूआत की होगी ,.तो जरूर ही ये उनके बहुत से धमाकेदार आडिईया में से एक होगा..महेन्द्र भाई ने इसे साप्ताहिकी का ...
28 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2009

कई देखे कई पढ डाले, आज की चर्चा आपके हवाले (चिट्ठी चर्चा )

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आज सीधे सीधे चर्चा का मजा लिजीये........... बकलमखुद की डायरी में अद्भुत फ़साना, आज फ़िर देखिये वकील साहब का आशियाना। मुकेश जी ने लिखी कविता...
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शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2009

मुद्दों की कंगाली का दौर, कहिये क्या बतियायें...क्या पढें क्या छोडें जी, कैसे हम चर्चियायें (चिटठी चर्चा )

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क्या कहा जी ....चाहे अनचाहे सब उसी दलदल में फ़ंसते जा रहे हैं..जिसमें फ़ंसने के लिये दलदल बनाने वाले नयी नयी तरह से कीचड डाल रहे थे....वैसे ...
27 टिप्‍पणियां:
रविवार, 27 सितंबर 2009

इस ब्लोग पर पोस्ट ने मार दिया शतक ..नहीं झेली होगी. इत्ती लंबी चर्चा अबतक

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जब मैंने ये बात सोची थी कि..इस ब्लोग की सौंवी पोस्ट को कुछ इस तरह से मनाया जाये कि ये न सिर्फ़ इस ब्लोग के लिये यादगार बने बल्कि ..ब्लोग्गर्...
30 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

दो लाईनों में समेटा है....देखिये कित्तों को लपेटा है...(चिट्ठी चर्चा.)

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सबसे पहले तो आप सबको नवरात्रि के पर्व की बहुत बहुत शुभकामना....इश्वर करे कि ये त्योहार आपके परिवार में ढेरों खुशियां लाये.....चलिये इसी खु...
30 टिप्‍पणियां:
रविवार, 20 सितंबर 2009

नवरात्रि की आपको बधाई...चिट्ठों की चर्चा फ़िर से है आई..

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मुझे बहुत खुशी है इस बात कि अब चर्चा को भी विस्तार मिल रहा है..नये नये मित्र नये तरीकों से ..पोस्टों को एक मंच पर सजाने का प्रयास कर रहे हैं...
23 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 16 सितंबर 2009

आज साईज़ बडा है...कई चिट्ठों को पढा है, (चिट्ठी चर्चा)

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मुझे लग ही रहा था कि...कल वाली चर्चा को देख कर सब कहेंगे..झाजी ने लगता है ...टीपने के साथ साथ पढना भी कम कर दिया है...मगर यकीन मानिये...दोनो...
16 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 15 सितंबर 2009

सब आपकी खातिर है, लो जी चर्चा हाज़िर है..(चिट्ठी चर्चा )

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ये जानकर , देखकर, और पढकर ....बहुत ही अच्छा लगा कि हिंदी दिवस को इस बार कम से कम हिंदी ब्लोग जगत ने तो खूब जम कर मनाया....हर दूसरी पोस...
18 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 14 सितंबर 2009

नहीं जी ,अभी नहीं हुआ जोश ठंडा, पिछले की रपट, अगले का एजेंडा(सम्मेलन रपट)

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जिस ब्लोग्गर सम्मेलन की घोषणा हुई बारंबार, दिल्ली न सही, फ़रीदाबाद सही, हो गयी आखिरकार, अपनी पहली वर्षगांठ में मशगूल साहित्य शिल्पी परिवार, ...
13 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 9 सितंबर 2009

ना गुट की, ना दोस्त की, चर्चा सिर्फ़, और सिर्फ़ पोस्ट की..

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मुझे पता था कि देर सवेर ये आरोप तो चर्चा करने वाले पर लगना ही था ...कि आप सबको शामिल नहीं करते चर्चा में....सिर्फ़ कुछ खास लोगों को ही शाम...
24 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 8 सितंबर 2009

ब्लोग्गिंग कालजयी..चर्चा मंगलमयी (चिट्ठी चर्चा )

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अब तो आप समझ ही चुके होंगे कि ..चिट्ठी चर्चा के साथ साथ ..चचा टिप्पू ने टिप्पणी चर्चा का आदेश भी सुना दिया है...यानि डबल डबल काम...मगर हमें ...
15 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

दो लाईनों का खेल है, चर्चा है या रेल है.(चिट्ठी चर्चा )

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मुझ से किसी ने पूछा ....कि आपको हमेशा ही ब्लोग्स पढ के सिर्फ़ दो ही लाईनें ही क्यों सूझती हैं....आगे पीछे .. कुछ नहीं....मैनें छूटते...
24 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 2 सितंबर 2009

कुछ पोस्टें हंसी, कुछ खेली, हमने भी फ़ट से चर्चा ठेली....(चिट्ठा चर्चा)

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आज सोचा इस ब्लोग का थोडा सा कलेवर बदल दिया जाये...कुछ खास वजह नहीं...बस यूं ही..अरे लिजीये भई..अब कभी कभी यूं भी तो कुछ कर लेना चाहिये..पत...
17 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 31 अगस्त 2009

मंडे मुस्कान मंद मंद, चिट्ठी चर्चा छंद छंद

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मुझे नहीं पता कि मैं..चर्चा में क्या करता हूं...कोई कहता है..तुकबंदी है..तो कोई कहता है छंदमयी है चर्चा..बस अपना तो एक ही फ़ंडा है...आपको पढ...
13 टिप्‍पणियां:
रविवार, 30 अगस्त 2009

रविवार की छुट्टी, चर्चा मीठी-खटटी..(चिटठी-चर्चा)

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पिछले कुछ दिन में जितना उथल पुथल वाला पोस्ट सब पढे ...कि का कहें....आ सच कहें तो कुछ भी नहीं कहने का मन करता है..बस ब्लोग्गिंग किजीये ...
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