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रविवार, 29 नवंबर 2009

पिछले दिनों बहुत सी अच्छी अच्छी बातें पता चली अपनी हिंदी ब्लोग्गिंग के बारे में । रवि रतलामी जी ने बताया कि अब हिंदी ब्लोग्गिंग का इतिहास लिखा जा रहा है ...यानि कोई है ...या कहा जाए कि बहुत से हैं जो हिंदी ब्लोग्गिंग और हिंदी ब्लोग्गर्स को देख परख रहे हैं ...पोस्टों और लेखन के अनुसार ...हिंदी ब्लोग्गिंग की एक छवि गढी जा रही है उसके बारे में अवधारणाएं बनाई जा रही हैं ...तो इसलिए ये हम सबकी जिम्मेदारी बन जाती है कि ....इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही ...अपने पोस्ट / अपने ब्लोग / अपने टिप्पणी / आदि को शिल्पकार की तरह तराश कर प्रस्तुत करें । इसी आशा और विश्वास के साथ आज की चर्चा ...........


धर्म मजहब पर देख के आज के हालात ,
अनिल भाई ने यूं रख दिये आज अपने जज्बात ॥


सफ़ेद घर खुद चल के पहुंचे , लंठ जी के घर ,
जब बात ही होगी ऐसी, तो क्यों न बने खबर ॥


मदहोश होने से पहले थोडा सा संभलें,
यहां पहुंचे , और पढें दो उम्दा गज़लें ॥


कह रहे गगन जी पढिये आपको आनंद आएगा ,
हम तो कहते हैं आनंद के साथ ज्ञान भी पाएगा ॥


कह रहे राज भाई वे अब भी एतबार करते हैं,
अरे रे , चलिये न उनकी पूरी पोस्ट पढते हैं ॥



यहां भी उसी बात की बात है जो बनी हुई है खबर ,
आप खुद ही देखिये इन्होंने किसपे डाली तीखी नज़र ॥



कुछ दिन पहले ही तो आपस में हुआ था सबका मिलन ,
अब उस सफ़र की यादों से सजा पढिये संस्मरण ॥



आलोचना का उत्तर आज खुद दे रहा इक आलोचक ,
शरद भाई की पोस्ट का शीर्षक भी है रोचक ॥



बहुत गहरे हैं उन आखों के समंदर ,
जाकिर जी की पोस्ट ये है बहुत ही सुंदर ॥




जाते थे जापान पहुंच गए चीन समझ गए न,
अरे आप निकले नहीं अभी , हम तो कबके पहुंच गए न ॥



पूछ रहे राज भाई , कहिये जी क्या हाल है ,
इसको तो अभी पढिये, पोस्ट बडी कमाल है ॥



खुशदीप जी की कौन सी बात है जो हमने नहीं है मानी,
आज सुना रहे हैं सनकी राजकुमार की कहानी, ॥



इस ब्लोग पर होगी ब्लोग्जगत की हलचलों की अपडेट,
अभी कर लिजीये बुकमार्क इसे, बाद में हो जाएंगे लेट ॥



यहां कह रही दीपिका किसी को वापस लौट के आओ,
आप पढ के पोस्ट को उन्हें अपनी बात बतलाओ ॥


कह रहा एक शिल्पकार कि कुछ ऐसा करके जाऊंगा ,
युद्ध करूंगा ऐसा , दुश्मन को छठी के दूध की याद दिलाऊंगा ॥



भारतीय न्याय शास्त्र का वकील साहब बता रहे इतिहास,
हिंदी ब्लोग जगत की ये श्रंखला बनेगी खास ॥



आज मिश्र जी ने ले लिया नौकरी से स्वैच्छिक अवकाश ,
भविष्य के लिए शुभकामनाएं , भेजिए उनके पास ॥



इस राजनीतिक विस्फ़ोट को सुनिये संभल संभल,

दुश्मनी को दोस्ती में बदलने की हो रही है पहल ॥



चोट पहुंचाने वाले ये पत्थर आखिर उछाले क्यों हैं,
इनके हाथों में आखिर तलवार, भाले क्यों है ॥



भर दो हामी जरा , हम भी हो जाएं मशहूर,
शायराना मिजाज वाले यहां पहुंचें हुजूर ॥



इस नाजुकी लव की क्या कहिये
,
आप भी बस रौ में बहिये ,....॥


पन्ने दर पन्ने , पोस्ट दर पोस्ट,
ममता को पढना जरूरी है दोस्त ॥



तो आज के लिए इतना ही .....राम राम॥

गुरुवार, 26 नवंबर 2009

आज बुलबुल की चहक देखिये ,कल से चर्चा

पिछली चर्चा में आप सबने बुलबुल को उसके ठीक होने का आशीष दिया ...और आज वो बहुत खुश है ....धीरे धीरे पुरानी रफ़्तार में आ रही है ॥सबने कहा कि जब तक बुलबुल चहकने न लगे ....चर्चा नहीं ॥तो लिजीये आज आपको बता दें कि ॥आपकी बुलबुल बिटिया अब ठीक है ...सो कल से चर्चा शुरू करेंगे ...


बुलबुल बिटिया....अपने भाई गोलू जी (आयुष ) यानि मतलब छोटे झाजी के साथ उधम मचाते हुए ..


रविवार, 22 नवंबर 2009

रविवारी चर्चा , दो लाइन का खर्चा ..

सोचा तो ये था कि आज रविवार होने के कारण पूरा फ़ायदा उठाते हुए ,खूब ब्लोग पढाई और टिपाई हो जाएगी ...बीच बीच में समय बचा तो पोस्ट भी ठेल लेंगे ...मगर सुबह से ही बिटिया बुलबुल बुखार में तप रही थी ॥बस सुबह से ही उसे गोद में लिये बैठे रहे ...डाक्टर साहब से दवाई दिलवाने के बाद भी मासूम ....हमारी गोद में ही निढाल पडी रही ...और सच कहें तो हमने ही उसे गोद में रखे रखा ...। लैपटौप सामने रखा था ॥पढ भी रहे थे और एक हाथ से जितना टीप सकते थे टीप भी रहे थे ....मगर वादे के अनुसार चर्चा को सुबह नहीं पोस्ट नहीं कर सके ॥अब जाकर बिटिया थोडी चहचहाई है तो सोचा कि आपको आज की चर्चा तो पढवा ही दें .....लिजीये ॥


ब्लोग्गिंग के बडे भैय्या, अपना धर्म हैं निभा रहे,
आप खुद ही देखिये, किसे कहां फ़ंसा रहे ॥


राजनेता ढीठ, और राजनीति हुई बेशर्म,
वर्ना कौन नहीं कहेगा, वंदे मातरम ॥


इन्हें जगी है नित नूतनता की प्यास,
क्यों न हो , जब कवि हैं अशोक व्यास ॥


वो दिन भी क्या थे, कितने थे खुशनसीब,
आसमान भी लगता था कितना करीब ॥



लिजीये इस पोस्ट में धीरू जी बता रहे हैं आज,
बाबा रामदेव जी करने जा रहे हैं अब किसका इलाज ॥


इरफ़ान भाई की तूलिका अरे बाप रे बाप,
बिग बी के घर में निकल आया सांप ॥


तुझे क्या पता तेरी हर अदा है ,वो अदा क्या है ,
तेरी गज़लों तेरी आवाज के बिना यहां धरा क्या है ॥


ममता जी की डायरी के मिले आज कुछ पन्ने,
बहुत भावुक हो गये, लगे जो उसको पढने ॥


मानसिक हलचल बढ गयी कैसे ,देखिए आप,
आज पांडे जी बता रहे खुद ब्राउनी साहब का प्रलाप॥


इस चर्चा को पढते पढते चेहरे पर आ जाएगी स्माईल,
अनोखी है भाषा और अद्भुत है मुन्ना भाई का स्टाईल ॥


आभासी होने का इस दुनिया के टूट रही है अवधारणा,
ये मिलन तो शुरूआत है , अभी बहुत प्यार है बांटना ॥


इस पोस्ट पर सेमलानी जी दे रहे सूचना एक जरूरी,
ताऊ जी की पहेली की हो रही है हाफ़ सेंचुरी ॥


इक नन्हें ब्लागर, बने चालक चला रहे खुद कार,
देखिये अपने आदि मियां का कैसे बीता ये शनिवार ॥



यूं तो यहां जारी रहता है शब्दों का सफ़र ,
आज पुस्तक समीक्षा, कर रहे अजित बडनेरकर ॥



शरद भाई को पढ के अक्सर हो जाते हैं मदहोश ,
आज बता रहे हैं वे खुद को खानाबदोश ॥


हिंदी ब्लोग्गिंग पहुंच गई २००९ का है स्टेशन,
रवि जी की चर्चा में चर्चा, वर्ष भर का विश्लेषण ॥



देखिये तनेजा जी ने फ़िर किसे पहना दिया है नकाब,
किसी की कर डेंटिंग पेंटिंग, किसी को लगा दिया खिजाब ॥



राज भाई के ब्लोग पर सबपे गीतों की मस्ती चढी,
बूढे बच्चे सब मजे से खेल रहे अंताक्षरी ॥



चलिये तो फ़िर आज इतना ही ...बकिया कल के लिये ...

शनिवार, 21 नवंबर 2009

जस्ट टू लाइन, चर्चा हुई फाइन (चिट्ठी चर्चा )

चलिये जी जब आपको हमरे दुई लईना में मजा आ ही रहा है तो हम भी वादा करते हैं कि इसको जल्दी से अनियमित नहीं होने देंगे और कोशिश ...करेंगे कि रोजे ठेला जाए...तो आज ठेल रहे हैं ...देखा जाए॥॥



ब्लोग्गिंग के लिये इस पोस्ट पर चल रहा गहन विचार
,
ब्लोग्गिंग के लिये एक राष्ट्रीय कानून बनाए सरकार ॥


आज राज भाई ने एक ठो अईसन पोस्ट दिहिन है ठेल,
देखिये उनकी कैसी छुक छुक चली जा रही है रेल ॥


चंद खूबसूरत पंक्तियां लिख रही हैं प्रतिभा कटियार,
आप भी पढिये, नहीं नहीं चढिये चुप का पहाड ॥




मोबाईल नंबर बदलिये कीमत सौ रुपए से भी कम,
अरे भई इहां पढिये , ई नहीं कह रहे हैं हम ॥


खुद भी पढें, औरों को भी पढाएं,
अच्छी सेहत को कैसे पाएं ॥



बहुत खूब अंदाज में क्या क्या कह डाला हाय,



क्या कहा कानून की जानकारी कर रही स्तब्ध ,



नेता गिरगिट की तरह रंग बदलता है,




अब नहीं दम रहा कलम में हो गई फ़टीचर ,



विचारों वेदनाओं की टोकरी और कुछ एहसास,




आज घूमते घूमते भाई अनिल पुसदकर,




हर मर्ज की दवा है काहे न आजमाएं,




मानवता के दुशमन, ब्लोग्गिंग से रहें दूर ॥


कभी कभी सुंदर ग़ज़लें भी पढा किजीये ॥



आप खुद देखिये ताजा समाचार ॥



मैं क्या बताऊं जी आप खुद देखिये आज ॥


चलिये अभी इतना ही इस वादे के साथ कि चर्चा पार्ट टू सुबह सुबह ठेली जाएगी ......

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

चर्चा दो लाईना ,chitt

पिछले कुछ दिनों से अलग अलग कारणों से इतना व्यस्त रहा कि चर्चा से थोडा दूर सा हो गया था ॥मगर जैसे ही फ़ुर्सत मिली तो सोचा ...अजी सोचा क्या ॥आदत से मजबूर होकर लगा पोस्टें पढने और सहेजने ...बस चर्चा तैयार हो गई ...क्योंकि दो लाईनें तो मन में पोस्टें पढते पढते ही बन जाती हैं ॥तो लिजीये हाजिर है आज की चर्चा ॥


दिल की बात और इक छोटा सा ख्याल,
सिर्फ़ चंद पंक्तियों की पोस्ट ये कमाल


कह रहे उन्मुक्त टाईम पत्रिका नहीं पढा किजीये,
उनकी इस पोस्ट पे मालिश का मजा लिजीये ॥


बिल्लन की पहेली देखिये लोग कैसे हैं बूझ रहे,
जो बूझा करते थे, आज वही पहेली पूछ रहे ॥



ये अलबेला सी चर्चा है देखने में छुटकी,

ले रहे पोस्टों पे अलबेला जी चुटकी ॥


शास्त्री जी चर्चा रहे , करके इंदिरा जी को याद,
आप खुद देखिए, कौन सी पोस्टें हुई आबाद ॥



जब खुशियों के दीप जलें तो क्यों रहें गुमसुम,
आज तो भैय्या मक्खन की मां हो गई गुम ॥



चंद्र जी कह रहे कानूनदां ब्लोगर दें ध्यान,
आप भी पहुंचे ढूंढें, इसका समाधान ॥



आज देखिये किसकी खबर ले रहे इरफ़ान,
तूलिका ने घेर लिया देसी तालिबान ॥



कह रहे मा साब, बिन गुरु ज्ञान कहां से लाऊं,
आप खुदे पढिये न हम का बताऊं ॥



एलियन जी ने बीडी छोड के उठा लिया है जाम,
हाय पोस्ट ठेलने के लिये कैसे कैसे करने पडते हैं काम॥



कह रहे हैं अजदक दुनिया रही है बदल ,
अजदक जी को पढना, भैय्या संभल संभल ॥



जाने किस किस बहाने पीडी ढूंढ रहे गुमे दिन ,
कुल मिला के ई का मतबल , चैन कहां बिलागे बिन ॥


गोदियाल जी की जिंदगी कितनी चल रही मस्त,
आपको देखना पढना हो तो , यहां जाईये मस्ट ॥




पांडे जी के मन में आज हलचल मचाए है गाय और अरहर की दाल,
ई हलचलवा हमेशा की तरह मचा रहा कमाल....॥




महफ़ूज भाई ने कर दी कुछ ऐसी शुरुआत,
अनिल जी को भी आ गई पुराने दिनों की याद॥



एक कवि को जब पुरानी यादें आती हैं ,
पढिये उससे कैसे कविता कहाती हैं ॥



पूजा की लहरों में सुबह खोई खोई,
जब सुबह खो गवा तो दिन का का होई॥




तो आज के लिये इतना ही .....देख रहे हैं न आप चर्चा मंचों का किस तरह से विस्तार हो रहा है ...और मुझे और भी खुशी होगी जब इसमें भी विविधताओं का समावेश होगा , प्रयोग किये जाएंगे.....और यकीन मानिये ये भी होगा ॥॥
रामराम...

शनिवार, 7 नवंबर 2009

चिट्ठी चर्चा (झा जी की दो लाईना ) ..बस और क्या ...?

प्रभाष जी का चले जाना...बहुत ही दुखदायी रहा ..मुझे खुशी है कि बेशक हमारे समाचार जगत ने ..अपेक्षित नहीं दिया ( हालांकि अब तो उनसे अपेक्षा भी नहीं रहती अब ) . मगर हमारे ब्लोग जगत ने कलम के सिपाही को सच्चे मन से याद किया और श्रद्धांजलि दी । ...आज की चर्चा आपके हवाले ..

आज इस चर्चा की होगी इस पोस्ट से पहल,



अशोक जी कर रहे हैं यहां सत्य की खोज,



इंटरनेट पर आप भी खोजिये अपनी मुमताज॥



आप कर क्या लेंगे पूछ रही मनीषा आज सवाल,


लालू जी की भैंस ने कर दिया दूध देना बंद,



अदा ने दिखलाई जाने कितनी ,कैसी अदा ,


रुमाल की गुलाबी गांठ और पप्पू की याद,



फ़्री है जी बिल्कुल वकील साहब नहीं ले रहे फ़ीस॥


पंडित सुरेश कह रहे प्रयोग कर के दिखा दिया,



आज पहेली बूझ के तबियत हो गई टाईट॥



मिश्रा जी ने राव जी का चेहरा पहली बार दिखाया ॥



इस चर्चा में सारी रितुएं , शिशिर और बसंत,



कौन कहता है जी लौटता नहीं गुजरा हुआ जमाना ,



राज भाई ने एक पंक्ति में पूछा एक सवाल ,



अजी ऐसे खडे रहे तो आप हो जाएंगे लेट ॥



जब ज्ञान जी विविधता लाएं तो पोस्ट बने अनुपम,



विपत्ति जब आती है , कायर का दिल दहलाती है,



प्रभाष जी को हिंदी ब्लोग जगत ने दी जो श्रद्धांजलि,



पूछे है मन की पाखी, कौन जगाएगा अलख ,



अपने चिर परिचित अंदाज में फ़िर बोले श्री गोदियाल,



कितना कुछ होना बचा रह जाता है ,एक बेदखल,



आज की चिट्ठा चर्चा में इसी का हुआ जतन ॥


तो आज के लिये इतना ही ....

गुरुवार, 5 नवंबर 2009

पूरा पोस्ट को पढते हैं , दू लाईन में आपके सामने धरते हैं (चिट्ठी चर्चा )


पिछले कुछ दिनों से ब्लोग्गिंग जगत में भूचाल टाईप का आया हुआ है ..हां हां ..आप तो कहियेगा कि ..अरे धत तेरे कि ....ई सब तो ब्लोग जगत का पुराना शगल है जी मुदा हम तो एके बात में यकीन रखते हैं कि अपनी नीयत साफ़ और शुद्ध रखिए ..नेमत अपने आप मिलेगी ..खैर छोडिये ई सब ..आप तो ई देखिये कि कौन कहां का कह का लिख रहे हैं ,,,,अरे महाराज हम जादे नहीं पढवाएंगे जी ..दुईये लाईन में निपटा देंगे ..देखिये तो सही

जब लोग बाग अपने घर बार से छूट जाते हैं ,
जब भी एलियन जी ऐसे फ़रमाते हैं ,
खुदो रोते होंगे , और हम सबको रुलाते हैं ॥

आप कहियेगा कि अभी तो दू लाईन कहे थे ..तो उडन जी कौन अकेला ब्लागर हैं..हमेशा डबल रहते हैं ..साईज से भी और पोस्ट से भी तो हम भी डबल कर दिये...अब आगे ..


अवधिया जी जानते हैं कौन पोस्ट फ़्लाप कौन होगी हिट,


अरे काहे करते हैं समय जादा खर्चा ,



कैसे करेंगे नाश्ता, ब्रेड में भी जहर ॥


खुशदीप भाई ने आज फ़िर उठा दिया एक सवाल,


एक पोस्ट में तीन तीन का मजा उठाएं,



आज फ़र्क बतला रही हैं ,मीनू खरे ॥


कुल तीन हजार में कैसे पालोगे परिवार ॥



अजी कलम उठाओ और लिखा वक्त बेवक्त करो,


तू समझे न मेरे प्यार को तो मेरा क्या कसूर,



जानिये लेखन का कडुवा सच .. क्या है ,




आप भी पहुंचिये, और करवाईये अपनी एंट्री..॥




जिन जिन को खुराक कुछ खास चाहिये,



हंसते देखते सोचते दिमाग हुआ खराब,



ऐसा घसीटा अंग्रेजों को , भर गया है पेट ॥



आप भी तो जाके चुनिये एक को श्रीमान ॥



भक्तन खडे रहे द्वारे, प्रभु दर्शन नहीं दिए ॥



बहस के लिये मुद्दा वही है जो चल रहा है आज ॥



सर्दी में भी बरसाती मेंढक टर्राने लगे हैं ॥



जिन जिन को करना है कोर्ट विवाह ॥


हमारे एजेंडे पर आज है देश का भ्रष्टाचार,


मौज लिजीये या टीपीये, सबको है पूरी आजादी ॥



तो आज के लिये इतना ही ..एक आग्रह ब्लोग डायरेक्ट्री में अपना अपना योगदान दें ॥
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