सोचा तो ये था कि आज रविवार होने के कारण पूरा फ़ायदा उठाते हुए ,खूब ब्लोग पढाई और टिपाई हो जाएगी ...बीच बीच में समय बचा तो पोस्ट भी ठेल लेंगे ...मगर सुबह से ही बिटिया बुलबुल बुखार में तप रही थी ॥बस सुबह से ही उसे गोद में लिये बैठे रहे ...डाक्टर साहब से दवाई दिलवाने के बाद भी मासूम ....हमारी गोद में ही निढाल पडी रही ...और सच कहें तो हमने ही उसे गोद में रखे रखा ...। लैपटौप सामने रखा था ॥पढ भी रहे थे और एक हाथ से जितना टीप सकते थे टीप भी रहे थे ....मगर वादे के अनुसार चर्चा को सुबह नहीं पोस्ट नहीं कर सके ॥अब जाकर बिटिया थोडी चहचहाई है तो सोचा कि आपको आज की चर्चा तो पढवा ही दें .....लिजीये ॥
ब्लोग्गिंग के बडे भैय्या, अपना धर्म हैं निभा रहे,
आप खुद ही देखिये, किसे कहां फ़ंसा रहे ॥राजनेता ढीठ, और राजनीति हुई बेशर्म,
वर्ना कौन नहीं कहेगा, वंदे मातरम ॥इन्हें जगी है नित नूतनता की प्यास,क्यों न हो , जब कवि हैं अशोक व्यास ॥
वो दिन भी क्या थे, कितने थे खुशनसीब,
आसमान भी लगता था कितना करीब ॥लिजीये इस पोस्ट में धीरू जी बता रहे हैं आज,बाबा रामदेव जी करने जा रहे हैं अब किसका इलाज ॥
इरफ़ान भाई की तूलिका अरे बाप रे बाप,बिग बी के घर में निकल आया सांप ॥
तुझे क्या पता तेरी हर अदा है ,वो अदा क्या है ,तेरी गज़लों तेरी आवाज के बिना यहां धरा क्या है ॥
ममता जी की डायरी के मिले आज कुछ पन्ने,बहुत भावुक हो गये, लगे जो उसको पढने ॥
मानसिक हलचल बढ गयी कैसे ,देखिए आप,
आज पांडे जी बता रहे खुद ब्राउनी साहब का प्रलाप॥इस चर्चा को पढते पढते चेहरे पर आ जाएगी स्माईल,अनोखी है भाषा और अद्भुत है मुन्ना भाई का स्टाईल ॥
आभासी होने का इस दुनिया के टूट रही है अवधारणा,
ये मिलन तो शुरूआत है , अभी बहुत प्यार है बांटना ॥इस पोस्ट पर सेमलानी जी दे रहे सूचना एक जरूरी,ताऊ जी की पहेली की हो रही है हाफ़ सेंचुरी ॥
इक नन्हें ब्लागर, बने चालक चला रहे खुद कार,
देखिये अपने आदि मियां का कैसे बीता ये शनिवार ॥यूं तो यहां जारी रहता है शब्दों का सफ़र ,
आज पुस्तक समीक्षा, कर रहे अजित बडनेरकर ॥शरद भाई को पढ के अक्सर हो जाते हैं मदहोश ,
आज बता रहे हैं वे खुद को खानाबदोश ॥हिंदी ब्लोग्गिंग पहुंच गई २००९ का है स्टेशन,
रवि जी की चर्चा में चर्चा, वर्ष भर का विश्लेषण ॥देखिये तनेजा जी ने फ़िर किसे पहना दिया है नकाब,किसी की कर डेंटिंग पेंटिंग, किसी को लगा दिया खिजाब ॥
राज भाई के ब्लोग पर सबपे गीतों की मस्ती चढी,बूढे बच्चे सब मजे से खेल रहे अंताक्षरी ॥
चलिये तो फ़िर आज इतना ही ...बकिया कल के लिये ...