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गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

पूरे अंतरजाल में खुले सांड की तरह विचरते हैं , देखिए फ़िर हम कैसी चर्चा करते हैं , …….पोस्ट, पत्रिका, वीडियो, बज ….सब माल है जी ..

 

सबसे पहले चलते हैं बीबीसी ब्लोग्स की ओर देखिए क्या कह रहे हैं विनोद वर्मा जी

हाइवे पर हम्माम

विनोद वर्मा विनोद वर्मा | मंगलवार, 06 अप्रैल 2010, 15:06 IST

शेरशाह सूरी ने जब ग्रैंड ट्रंक रोड बनवाई तो उन्होंने सड़कों के किनारे पेड़ लगवाए, सरायें बनवाईं और कुँए खुदवाए. लेकिन उन्होंने सड़क के किनारे हम्माम नहीं बनवाए.

शायद इसकी दो वजहें रही होंगीं. एक तो वह योद्धा थे और उन्होंने जो कुछ भी किया वह अपनी सेना को ध्यान में रखकर ही किया. भले ही उससे समाज के दूसरे हिस्सों का भी भला हो गया.

दूसरा वह अफ़ग़ान थे और मध्यपूर्व के दूसरे देशों की हम्माम की संस्कृति का उन पर कोई असर नहीं था.

लेकिन इस समय हाइवे के किनारे अगर आपको हम्माम मिल जाए तो?

हाइवे हिंदुस्तान की टीम को बंगलौर से चित्रदुर्ग जाते हुए एक ढाबे के सामने मिला एक हम्माम - संगीता हाइवे हम्माम.

 

Wednesday, April 7, 2010  image

शोएब के बहाने सानिया का जीना हराम करने की तैयारी

टेनिस सनसनी सानिया मिर्ज़ा से ख़फ़ा 'मज़हब के ठेकेदार' अब शोएब के बहाने उस पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं...

ख़बर है कि भोपाल में ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस्लाम और शरीयत के ख़िलाफ़ काम करने के इल्ज़ाम में सानिया मिर्ज़ा को जाति से बाहर कर दिया है...

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी की मजलिसे-ए-शूरा की बैठक में सानिया मिर्ज़ा के ख़िलाफ़ जमकर भड़ास निकाली गई...सानिया के लिबास पर भी जमकर टीका-टिप्पणी की गई...(लगता है इन लोगों की नज़रें सिर्फ़ सानिया की छोटी स्कर्ट के आसपास ही रहती हैं...सानिया के खेल और उसकी कामयाबी पर इनका ध्यान शायद कभी जाता हो...) कमेटी के अध्यक्ष औसाफ़ शाहमीरी का तो यहां तक कहना है कि सानिया मिर्ज़ा ने एक शादीशुदा शख्स से शादी का फ़ैसला करके एक औरत को तकलीफ़ पहुंचाई है...और सानिया के इस जुर्म पर कोई भी सानिया का निकाह नहीं पढ़ाएगा... अगर कोई निकाह पढ़ाता है तो वो इंसानियत की नज़र में एक बदतर और गिरा हुआ इंसान है...

 

Thursday, 8 April 2010  image

एक निहायत जरूरी पोस्ट, ये कोई मजाक नहीं------>>>दीपक 'मशाल'

नक्सली समस्या पर जो विचार मैं लिखना चाहता था और जो सवाल उठाना चाहता था वो कुछ तो गुस्से की वजह से सोच नहीं पाया और कुछ समयाभाव में... लेकिन आज एक ऐसी पोस्ट पढ़ी जो इस विषय पर एक सम्प्पूर्ण पोस्ट लगी लेकिन बहुत दुखद है कि इससे पहले से भी कई बेहतरीन पोस्ट लिखती आ रहीं लाइफ ब्लॉग की लेखिका श्रीमती रश्मि साहू जी को बहुत कम लोगों ने पढ़ा जबकि उनकी नक्सल समस्या पर लिखी गई कल की पोस्ट नक्सल आखिर चाहते क्या हैं? वास्तव में एक बहुत गंभीर और विचारणीय पोस्ट है इसलिए उनकी अनुमति से यहाँ पुनः आप लोगों के सामने रख रहा हूँ. साथ ही आपसे गुज़ारिश करूंगा कि यारों-दोस्तों की पोस्टों के चक्रव्यूह से निकाल ऐसी पोस्टों पर नज़र डालें.. मुझे पूरे अपने से मिलते विचार लगे तो मैं इस पोस्ट को यहाँ ले आया. आपको लगेंगे या नहीं.. ये भी नहीं जानता.

 

नवभारत टाईम्स ब्लोग्स में देखिए आज कौन क्या कह रहा है ?

किसानों को 'नक्सली' बनने से रोक लोimage

प्रेमचंद्र गुप्ता Thursday April 08, 2010

बिहार के लगभग 10 जिलों के ढेर सारे किसान आजकल मुश्किल भरे दौर से गुजर रहे हैं। उनके हालात काफी नाजुक हैं और उनके सामने अब आत्महत्या तक की नौबत आ चुकी है। समय रहते अगर ध्यान नहीं दिया गया, तो निश्चित तौर पर यहां भी नक्सलवाद पनप सकता है।

दरअसल, खगड़िया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर समेत 10 जिलों के किसानों ने लगभग 200 हजार हेक्टेयर में जीएम मक्के की खेती की थी। फसल तो खूब लहलहाई,  पर मक्के की बाली से दाना नदारद होने से किसानों के होश उड़ गए हैं। पूरे के पूरे खेत अब घास के मैदान के रूप में तब्दील हो चुके हैं। किसानों ने भारी कर्ज लेकर मक्के की खेती की थी, अब उनके सामने कर्ज चुकाने का कोई उपाय नजर नहीं आ रहा है।

 

Thursday, April 8, 2010

आओ, सवाल पूछकर जहर फैलाएंimage

नक्सलवाद पर आपका क्या कहना है...सानिया मिर्जा - शोएब की शादी के बारे में आप क्या सोचते हैं...यह सवाल अचानक सोशल नेटवर्किंग साइट, आपके दफ्तर या आपके आसपास रहने वाले लोग किसी भी वक्त पूछ सकते हैं। जरा सोच समझकर जवाब दीजिएगा, नहीं तो आपको राष्ट्रविरोधी, देशद्रोही और न जाने किन-किन खिताबों से नवाजा जा सकता है। अंध राष्ट्रभक्त अब इस देश में फैशन बन चुका है। जर्मनी में हिटलर के दौर में अंध राष्ट्रभक्त के चलते जो नाजीवाद पैदा हुआ था, कुछ-कुछ उस तरह का खतरा मंडराता नजर आ रहा है।

 

अब देखिए कि जागरण जंक्शन में आएशा को किस बात के लिए सलाम कह रहे हैं भाई वी कुमार जी

आएशा सिद्दीकी को सलाम  image

पोस्टेड ओन: April,8 2010 जनरल डब्बा में

 

बधाई हो सानिया मिर्जा, निकाह की राह निष्कंटक हो गई। अब आप सुकून से १५ को शोएब के साथ निकाहनामा पढ़ सकती हैं। फतवों के देश जाकर दावत-ए-बलिमा दे सकती हैं, दुबई में सुकून से गृहस्थी बसा सकती हैं। सच्चाई कबूलने के लिए शोएब को भी मुबारकबाद, साथ में एक नेक सलाह कि सानिया के साथ वो सुलूक न करना जो आएशा के साथ किया। मियां याद रखना ये भारतीय लड़कियां हैं प्रेम करती हैं तो हद से गुजर जाती हैं, बाकी तो समझदार के लिए इशारा काफी है।
आयशा सिद्दीकी के जज्बे को सलाम। शाबाश आयशा तुमने वो कर दिखाया जिसके लिए बहुत कम लड़कियां हिम्मत जुटा पाती हैं। तुम्हें कौन सा तमगा दिया जाए? हां झांसी की रानी ही ठीक रहेगा, खूब लड़ी मर्दानी। तुमने शोएब मियां को परास्त करके छोड़ा। पाकिस्तान की सारी कूटनीति धरी रह गई। वहां के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से लेकर बड़े-बड़ों की बोलती बंद कर दी। यह उन लोगों की हार है जो तुम्हारे प्यार को ठगी और निकाह को नाजायज बता रहे थे।

 

देखिए कि ई पत्रिका पाखी में प्रतिभा कुशवाहा अपनी इस पोस्ट में क्या कह रही हैं

ब्लॉगनामा

टिपियाइए! मगर ध्यान से : प्रतिभा कुशवाहा

आप के दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं, प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है, लोग अपनी श्र(ानुसार पढे़ंगे और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं। अतः

आवश्यकता है कि आप नाजुक विषयों पर प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है।' यह निवेदननुमा नोट सतीश सक्सेना ने अपने ब्लॉग 'मेरे गीत' टिप्पणी के शौकीन ब्लॉगरों के लिए लगा रखी है जो मात्रा टिप्पणी करने के लिए ब्लॉग दर ब्लॉग भटकते रहते हैं। इनकी यह 'भटकन' कुछ अच्छा पढ़ने की ललक की उपज बस नहीं होती बल्कि सकारात्मक या नकारात्मक रूप से उक्त ब्लॉगर को आकर्षित करना भी है।

 

Thursday, April 8, 2010

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मिला , डॉक्टरों को सम्मान ---      image

 

और इन्ही गुणों को मुद्दे नज़र रखते हुए दिल्ली सरकार ने दिल्ली के डॉक्टरों , नर्सों और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों को सम्मानित किया । आइये हमारे अस्पताल के जिन लोगों को सम्मान मिला , उनसे आपका परिचय कराते हैं।

डॉ श्रीधर द्विवेदी

डॉ द्विवेदी , मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष हैं । साथ ही प्रिवेंटिव कार्डियोलोजी क्लिनिक और ए आर टी क्लिनिक केभी इंचार्ज हैं। इसके अलावा धूम्रपान विरोधी , नशा उन्मूलन और अडोलेसेंत कार्डियोलोजी जैसे विषयों पर भी कामकर रहे हैं। डॉ द्विवेदी जी जन जागरूकता व्याखान ( पब्लिक अवेयरनेस लेक्चर ) का भी आयोजन हर माह करते हैं, जिनमे क्षेत्र के आम लोगों को सरल भाषा में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी प्रदान की जाती है।

 

ई पत्रिका कैफ़े हिंदी से मिली इस अद्भुत पोस्ट को पढिए

भगीरथजी मुनि के रेती पर उर्फ भगीरथ –गंगा नवकथा

22 June, 2008 03:00:00 आलोक पुराणिक 3106 बार पढ़ा गया

 

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गंगा को जमीन पर लाने वाले अजर-अमर महर्षि भगीरथजी स्वर्ग में लंबी साधना के बाद जब चैतन्य हुए, तो उन्होने पाया कि भारतभूमि पर पब्लिक पानी की समस्या से त्रस्त है। समूचा भारत पानी के झंझट से ग्रस्त है। सो महर्षि ने दोबारा गंगा द्वितीय को लाने की सोची। महर्षि भारत भूमि पर पधारे और मुनि की रेती, हरिद्वार पर दोबारा साधनारत हो गये।

 

Thursday, April 8, 2010    image

हमने नचा दिया उनको गा करके...उनको गा करके....उनको गा SSSSSSSSSS करके........

 

 

 

 

बुधवार, ७ अप्रैल २०१०image

खोया सा जीवन

यह मेरा खोया सा जीवन !
क्या फिर से पा जाऊँगी मैं
इस लुटी हुई दुनिया का धन !
यह मेरा खोया सा जीवन !,
मेरी सूनी-सूनी रातें,
प्रिय की मीठी-मीठी बातें,
फिर याद दिला जातीं आकर,
बीते सपने, बीते मृदु क्षण !
यह मेरा खोया सा जीवन !

 

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गुरुवार, अप्रैल 08, 2010   

ये लिजिये विडियो और गिलहरी   

रोज सुबह जागकर जब खिड़की के पास आकर बैठता हूँ तो छम्म से एक गिलहरी आकर खिड़की के पास बैठ जाती है. आंगन में खेलती है और थकती है तो फिर खिड़की के पास आकर सुस्ता लेती है. पहले जैसे ही उसकी तरफ देखता था, भाग जाती थी और खेलने लगती थी. फिर थोड़ी देर में आ जाती थी.

अब देखता हूँ तो डरती नहीं, भागती नहीं. इन्तजार करती है कि कब मैं उठूँ, दरवाजा खोलूँ और उसे मूंगफली खिलाऊँ. महिनों से सिलसिला जारी है. किसी दिन जानबूझ कर खिड़की की तरफ न देखूँ तो पंजों से कांच पर खटखटाने लगती है मानो पूछ रही हो: नाराज हो क्या? मूँगफली नहीं खिलाओगे?

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Wednesday, April 7, 2010      image

निगाहें मिलाने को जी नहीं चाहता   

पिछले दिनों उत्तराखंड के एक सुदूर गांव में बने पर्यटन स्थल पर एक जर्मन छात्रा से मुलाकात हुई। वह हिंदुस्तान के बारे में पढ़ाई कर रही है और इंटर्नशिप के लिए हर साल तीन-चार महीने के लिए यहां आती है। यहां आना उसके पाठ्यक्रम का जरूरी हिस्सा है

 

गुरुवार, ८ अप्रैल २०१० image

वाचिकसमाज में ब्लॉग लेखन कितना सार्थक ?

ब्लॉग की चारित्रिक विशेषता के बारे में चीन के प्रख्यात इंटरनेट विद्वान और बीजिंग विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हु यंग ने लिखा है कि ब्लॉगिंग नए किस्म का संचार है। इसकी चार विशेषताएं हैं,ये हैं, प्रथम ,गति केन्द्रितकता , यह इंटरनेट के नए संचार विकासक्रम का द्योतक है।

 

07 April 2010   image

सानिया की शादी, टीवी वाले बाराती में रवीश कुमार बतला रहे हैं


आज दैनिक हिन्‍दुस्‍तान में ब्‍लॉग वार्ता : सानिया की शादी, टीवी वाले बाराती में रवीश कुमार ने खूब कहा है और जिक्र किया है अनिल पाण्‍डेय की ब्‍लॉग पर गर्माहट का, कृष्‍ण मुरारी प्रसाद की दलील का, उपदेश सक्‍सेना के उपदेश नहीं तर्क का, और सुधा सिंह ने जो लिखा है प्रवक्‍ता डॉट कॉम पर और विकास मेहता के ब्‍लॉग में जन जन को जगाने वाले जागरण का

 

नई दिल्ली की कार पार्किंग में एक दिन के 700 रूपए वसूले गए: भुक्तभोगी हाईकोर्ट पहुँचा

Thursday, April 08, 2010 इस कार्यवाही को पेश करने वाले: लोकेश Lokesh

नई दिल्ली स्टेशन स्थित कार पार्किंग में केवल एक दिन के लिए गाड़ी पार्क करने के बदले 700 रुपये वसूले गए तो याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई और सरकार को नोटिस जारी कर एक महीने के भीतर पार्किंग नीति बताने को कहा।
जस्टिस कैलाश गंभीर ने कहा कि राजधानी में गाड़ियों की संख्या बढ़ती जा रही है और इस कारण आम लोगों को गाड़ी पार्क करने में न सिर्फ दिक्कतें आ रही हैं, बल्कि उन्हें इसके बदले गैरवाजिब भुगतान भी करना पड़ा रहा है। पार्किंग निश्चित तौर पर रोज की समस्या बन चुकी है और देखने में आ रहा है कि सरकार के पास कोई ऎसी प्रणाली नहीं है जिससे वह बता सके कि कौन सी पार्किंग वैध है और कौन सी अवैध

 

पिछली चर्चा में संजीत जी ने पूछा था कि ये तो पोस्ट चर्चा है न तो फ़िर बज क्यों , अब क्या करें , बज का बाजा  आजकल इतना बज रहा है कि उसे दरकिनार करना ठीक नहीं है ..तो लीजीए आज फ़िर देखिए …..और सबसे जादे ई उडन बाबा ही बजाए हुए हैं बाजा ..एक ठो फ़ोटो के साथ कुछ फ़िलासफ़िकल लिख कर निकल लेते हैं इहां हम लो डमरू बजाते रहते हैं …देखिए कैसे

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ये है लाल मिर्च. देखने में जितनी सुन्दर, खाने में उतनी ही तीखी!!
धूँस कर मसाला भर के अचार बना दो, तो ठीक हो जाती है.
कृपया सुधीजन यह न आशांका पालें कि इसमें कोई संदेश छिपा है. न ही मिर्ची को स्त्री लिंगीय बता कर विमर्श को नारीवादी दिशा की तरफ मोड़ें.

chilli_pepper.jpg

7 लोगों ने इसे पसंद किया - अजित वडनेरकर, SANGITA PURI और 5 अन्य, deepak sharma kapruwan, Ash Srivastava, Rajeev Nandan Dwivedi, अली सैयद और प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

Sameer Lal ने इस पोस्ट पर टिप्पणियों को अक्षम किया

Swapna Shail - हा हा हा ..
तुझे मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ...
इसे देखते ही ये गाना याद आगया....आप भी न...!!7 अप्रैल

Sameer Lal - वही गाना बज रहा है कम्प्यूटर पर...और बड़ी बात यह है कि मैं भी गा रहा हूँ साथ में. :)7 अप्रैल

Swapna Shail - हा हा हा ..
हा हा हा ..हा हा हा ..
हा हा हा ..हा हा हा ..
हाँ बड़ी बात तो है....आप गा रहे हैं...
राग मिर्च बागेश्वरी, या मिर्चताल भैरवी...7 अप्रैल

rajesh swarthi - यह तो समझ में आ गया कि मिर्ची किसको लगेगी और किसके लिए है.7 अप्रैल

ajay jha - इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि हिंदी सेवा करने को दृढ हम जैसे भोले भाले हिंदी प्रेमियों के प्रयास से जिसको भी मिर्च लगती है ...वो ये लाल मिर्च ही होती है ..आप हरियरका में मत कन्फ़्यूजियाईयेगासंपादित करें7 अप्रैल

Sameer Lal - अरे राजेश भाई, ऐसी कोई बात नहीं है. आप भी न!
॒ अजय भाई: हरी मिर्च में वो दम कहाँ?7 अप्रैल

Swapna Shail - समीर जी मैं सोच रही हूँ अपनी फोटू की जगह ये मिर्ची लगा लूँ ...कैसा रहेगा ये आइडिया ..:)
मुझे बड़ी अच्छी लगी ये मिर्ची....आपका कोई कॉपी राईट का पिरोब्लेम तो नहीं आ जाएगा ??7 अप्रैल

Sameer Lal - अजी, आराम से लगाईये...जौन को तीत लगे ऊ सुरसुराये...आप तो चैंपाये रहिये!! हा हा!7 अप्रैल

VIVEK SINGH - भावार्थ : लेखक यहाँ कहना चाहता है कि, "स्त्री एक मिर्ची की तरह है । जिस प्रकार मिर्ची तीखी होती है किन्तु धूँसकर मसाला भरते ही ठीक हो जाती है । उसी प्रकार स्त्री को भी उचित ट्रीटमेंट देकर लाइन पर लाया जा सकता है । यह बीमारी भी लाइलाज नहीं ।"
पर लेखक राजनीनीतिक पृष्ठभूमि से होने के कारण अपनी बात कहने में उसी प्रकार हिचक रहा है जिस प्रकार नेता अपने वोटबैंक को खोने के डर से आतंकवाद को परोक्ष समर्थन तो देता रहता है किन्तु खुलकर उसके पक्ष या विपक्ष में नहीं आता । क्योंकि वह दोनों ही तरफ का वोटबैंक अपने पास रखना चाहता है ।7 अप्रैल

Sameer Lal - प्रिय मित्र विवेक: डिस्क्लेमर पर ध्यान दो बालक " कृपया सुधीजन यह न आशांका पालें कि इसमें कोई संदेश छिपा है. न ही मिर्ची को स्त्री लिंगीय बता कर विमर्श को नारीवादी दिशा की तरफ मोड़ें."
हम समाज सेवकों को वोट की क्या तलब भला. :)7 अप्रैल

sanjiv verma - mirchee lagee sameer ko, tabhee huaa kya lal.
gar aisee shuruaat hai, aage kaun hawal?..7 अप्रैल

Rajeev Nandan Dwivedi - हम भी समझ गए कि आप मिर्ची दिखा कर किसको आग लगा रहे हैं, यह बिलकुल ही गलत बात है. (-_-)7 अप्रैल

dhiru singh - आपके कहने का तात्पर्य हम नही सम्झेंगे तो कौन समझेगा .7 अप्रैल

Vivek Rastogi - आईला मिर्ची को भी नहीं छोड़ा ।7 अप्रैल

Mansoorali Hashmi - मिर्ची है लाल, ले के जो आये है; वो भी लाल,
चुप भी अगर रहे तो ,रहेगा उन्हें मलाल,
भाषा विमर्श पर न हो, बदहजमी इसलिए,
मिर्ची - अचार ही करे शायद कोई कमाल.
--
mansoorali hashmi7 अप्रैल

Dr. Mahesh Sinha - हरी मिर्ची ने उठाया है सवाल
कभी आपने लौंगिया का स्वाद नहीं चखा
इसलिये ये बात कह रहे हैं श्री लाल
वैसे शायद यह लाल महिना दिखा रहे हैं
हर चीज इन्हे लाल ही दिख रही है7 अप्रैल

आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति" - हमें समीर जी पर पूरा विश्वास है. इस सन्देश में कहीं कोई छुपा मन्तव्य नहीं है. वैसे भी वे नारीवादी मर्द घोषित हो चुके हैं.7 अप्रैल

अविनाश वाचस्पति - मुझे मालूम है कि इस मिर्च में जो मिर्ची के दाने हैं, वही तो बाद में टिप्‍पणियों में परिवर्तित होकर आती हैं तभी तो खूब सारी टिप्‍पणियां उड़नतश्‍तरी से निकल निकल कर सारे ब्‍लॉगजगत के ब्‍लॉगों पर लहलहाती हैं।7 अप्रैल

Padm singh - मै आपका इशारा समझ रहा हूँ भगवन !
बता दूँगा तो अभी बखेड़ा खड़ा हो जाएगा..... पक्का बता रहा हूँ ..... आराधना/अनुराधा/मुक्ति/धानी/अरु/आना/आधू/गुड्डू जी .... कृपया फिर फिर से लाइनों को पढ़ें .... हो सकता है कोई क्लू मिल जाए अगर न मिले तो मै फिर आऊंगा और इस बज्जी का मंतव्य बताऊंगा ......7 अप्रैल

Dr. Mahesh Sinha - अरे आराधना जी इतना असर की आप मुक्त हो गयी . बधाई हो
जय हो बाबा समीरानंद की जय7 अप्रैल

आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति" - @Padm singh, अरे, ढूढ़ना चाहें तो एक नहीं कई छिपे अर्थ निकल आयेंगे. पर मैंने कहा न कि मुझे समीर जी पर पूरा विश्वास है और जहाँ विश्वास है, वहाँ कोई भी किसी को बहका नहीं सकता.7 अप्रैल

Jitendra Chaudhary - मै अखिल भारतीय मिर्ची संघ की ओर से आपके इस वक्तव्य पर आपत्ति दर्ज करता हूँ। आपने मिर्ची के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। मिर्ची की शिकायत पर संघ ने आपके खिलाफ मिर्ची अदालत मे केस करने का निश्चय किया है। हमारे अध्यक्ष मिर्ची सेठ और उनके वकील शीघ्र ही आपसे सम्पर्क करेंगे।7 अप्रैल

चलते हैं फ़िर देखिए कब टहलते हैं ….?????

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही विस्तृत चर्चा है और कई सारे अच्छे लिंक.भी मिले .....शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  2. गज़ब की रंगीन चर्चा , आपकी मेहनत सफल हो गयी अजय भाई ! बढ़िया प्रस्तुति के साथ अछे लिंक दिए हैं !

    उत्तर देंहटाएं


  3. अभी मिर्चिये धूँस कर आ रहे हैं,
    हाथ में जलन हुई रहा है, टिप्पणी न देंगे ।
    हमारा आह आह उई माँ.. मर गये इत्यादि दर्ज़ किया जाये
    मुला इनके बहकावे में मत आना, घुमा कर छायावादी मारते हैं ।

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  4. चलते रहे विचरते रहे, ब्लॉग के फूल और घास चरते रहे
    लाके उनकी फोटोकॉपी यहाँ, गुलदान-ए-चर्चा में फिक्स करते रहे.
    अब ये भी खुद ही कह लूं कि- वाह वाह, वाह वाह... ;)

    उत्तर देंहटाएं

  5. ई सनियावा त एतना फ़ज़ीहत करा के भी बड़ा फ़्रेश लगती है, हो !
    अब त इसके साथ सौ ऎब है, इसिलीये का ?

    उत्तर देंहटाएं
  6. टहलते रहिये ..काहे कि बड़ी विस्तृत और उम्दा लिंकिय चर्चा लाते हैं न!! बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  7. ई है असली चर्चा का इस्टाईल. बहुते गजब का है जी.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाकई हैडिंग सही है बस वो सांड वाली बात नही जम रही है,वो मेरा फ़ेवरेट है और बचपन से मैं उसका दीवाना हुं,किसी दिन लिखूंगा उस पर्।

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  9. बहुत ही विस्तृत चर्चा है………आभार्।

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस बढ़िया चर्चा की चर्चा हमने भी की है!
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह , माल ही माल भरा पड़ा है ।
    पर टाइटल से क्यों डराते हो भाई।

    उत्तर देंहटाएं
  12. यह मिक्सिंग गजब की है। अच्‍छी तरह से मंथन किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  13. अरे का चर्चा किहिस है...महाकालर फुल ....
    हम तो बस औंधे मुंह जाते हैं...
    हाँ नहीं तो..

    उत्तर देंहटाएं

पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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