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शनिवार, 7 नवंबर 2009

चिट्ठी चर्चा (झा जी की दो लाईना ) ..बस और क्या ...?

प्रभाष जी का चले जाना...बहुत ही दुखदायी रहा ..मुझे खुशी है कि बेशक हमारे समाचार जगत ने ..अपेक्षित नहीं दिया ( हालांकि अब तो उनसे अपेक्षा भी नहीं रहती अब ) . मगर हमारे ब्लोग जगत ने कलम के सिपाही को सच्चे मन से याद किया और श्रद्धांजलि दी । ...आज की चर्चा आपके हवाले ..

आज इस चर्चा की होगी इस पोस्ट से पहल,



अशोक जी कर रहे हैं यहां सत्य की खोज,



इंटरनेट पर आप भी खोजिये अपनी मुमताज॥



आप कर क्या लेंगे पूछ रही मनीषा आज सवाल,


लालू जी की भैंस ने कर दिया दूध देना बंद,



अदा ने दिखलाई जाने कितनी ,कैसी अदा ,


रुमाल की गुलाबी गांठ और पप्पू की याद,



फ़्री है जी बिल्कुल वकील साहब नहीं ले रहे फ़ीस॥


पंडित सुरेश कह रहे प्रयोग कर के दिखा दिया,



आज पहेली बूझ के तबियत हो गई टाईट॥



मिश्रा जी ने राव जी का चेहरा पहली बार दिखाया ॥



इस चर्चा में सारी रितुएं , शिशिर और बसंत,



कौन कहता है जी लौटता नहीं गुजरा हुआ जमाना ,



राज भाई ने एक पंक्ति में पूछा एक सवाल ,



अजी ऐसे खडे रहे तो आप हो जाएंगे लेट ॥



जब ज्ञान जी विविधता लाएं तो पोस्ट बने अनुपम,



विपत्ति जब आती है , कायर का दिल दहलाती है,



प्रभाष जी को हिंदी ब्लोग जगत ने दी जो श्रद्धांजलि,



पूछे है मन की पाखी, कौन जगाएगा अलख ,



अपने चिर परिचित अंदाज में फ़िर बोले श्री गोदियाल,



कितना कुछ होना बचा रह जाता है ,एक बेदखल,



आज की चिट्ठा चर्चा में इसी का हुआ जतन ॥


तो आज के लिये इतना ही ....

26 टिप्‍पणियां:

  1. "फ़्री है जी बिल्कुल वकील साहब नहीं ले रहे फ़ीस" ..इस चक्कर में न रहियो बबुआ...फ़ीस का बिल तो पीछू आता है :) चर्चा का अच्छा जतन किया॥

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  2. बहुत सुंदर चर्चा की है आपने .. कई अच्‍छे लिंक्स मिले .. धन्‍यवाद !!

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  3. Ashok ji ki post ki taraf dhyan dilane ke liye bahut bahut shukriya Ajai bhai ji....
    sundar charcha...
    Jai Hind...

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  4. अब ब्लाग डायरेक्ट्री बन ही रही है, शायद बिल सही जगह पहुँचने लगें। इधर अदालतें तो खराब एटीएम मशीन हो गई हैं मुकदमा अंदर डालो तो फैसला निकलता ही नहीं। मुकदमा अंदर फँस जाता है।

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  5. बहुत सुंदर चर्चा किये है भाई आ तो, मुजे तो भेंस की फ़िक्र हो रही है जब लालू सारा चारा चर गये तो भुखी भेंस का दुध देवे

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  6. बहुत सुंदर और मस्त चर्चा रही.

    रामराम.

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  7. @ अदालतें तो खराब एटीएम मशीन हो गई हैं मुकदमा अंदर डालो तो फैसला निकलता ही नहीं। मुकदमा अंदर फँस जाता है।

    बहुत खूब! ये मशीनें सबकुछ ठीक रखने के लिए बनीं। यही खराब हो गईं! संकट है।

    इन लाइनों से एक व्यंग्य लिखने का सामान बनता है। दिनेश जी लिखिए न। झा जी से सोर्स लगा कर नम्बर एक पर रखवा देंगे ;)

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  8. दो लायना भी है कमाल ...मिला बहुत से चिट्ठों का हाल...!!

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  9. झा जी का उत्साहवर्धन टॉनिक लीजिए
    काम (अपनी-अपनी पोस्ट) पर चलिए...

    जय हिंद...

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  10. दू लाइन में चर्चा कमाल कर दिया
    बैठे-बिठाये आपने बवाल कर दिया...

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  11. जय होवे तोर झा जी-बने कहिन,सुंदर चर्चा दु-दु लैन के -बधाई-रात के हम नही देख पाए सुत गये थे अभी देखे।

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  12. झा जी चर्चा करने में रहते हैं व्यस्त
    उनकी चर्चा पढ़कर सब हो जाते हैं मस्त

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  13. कृपा तो है राम की पर सिंह न बन सका रामकृपाल सिंह।

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  14. हमने पढ़ने में कर दी है देर
    टिप्पणी देने में हो गई है देर
    कविता रूप में चर्चा बढ़िया है
    इस हेतु धन्यवाद के पात्र है..

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  15. बढिया है कम जगह मे ज़्यादा लोग ..।

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पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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