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अजय कुमार झा
दुनिया की भीड़ के बीच अपना वजूद तलाशता और तराशता एक आम आदमी जिसकी इंसान बनने की कोशिश जारी है..जिन्दगी के बहुत सारे उतार चढावों को देखते हुए कब बचपना छूटा और वयस्कता की देहलीज़ पर कदम रखा पता ही नहीं चला, अंगरेजी साहित्य में प्रतिष्ठा के बाद पत्रकारिता में डिप्लोमा..फिर विधि की शिक्षा...न्यायमंदिर ..तीस हजारी में फिलहाल कार्यरत...सफ़र जारी है...लिखना , पढ़ना शौक था..कब आदत बनी पता नहीं चला..अब हालात जूनून की हद तक पहुँचते जा रहे हैं....मुझे लगता है इतना काफ़ी है न..जान पहचान के लिये..फ़िर भी यदि आपको लगता है कि बात करनी जरूरी है तो फ़ोन नं भी है न...09871205767
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शनिवार, ७ नवम्बर २००९

चिट्ठी चर्चा (झा जी की दो लाईना ) ..बस और क्या ...?

प्रभाष जी का चले जाना...बहुत ही दुखदायी रहा ..मुझे खुशी है कि बेशक हमारे समाचार जगत ने ..अपेक्षित नहीं दिया ( हालांकि अब तो उनसे अपेक्षा भी नहीं रहती अब ) . मगर हमारे ब्लोग जगत ने कलम के सिपाही को सच्चे मन से याद किया और श्रद्धांजलि दी । ...आज की चर्चा आपके हवाले ..

आज इस चर्चा की होगी इस पोस्ट से पहल,



अशोक जी कर रहे हैं यहां सत्य की खोज,



इंटरनेट पर आप भी खोजिये अपनी मुमताज॥



आप कर क्या लेंगे पूछ रही मनीषा आज सवाल,


लालू जी की भैंस ने कर दिया दूध देना बंद,



अदा ने दिखलाई जाने कितनी ,कैसी अदा ,


रुमाल की गुलाबी गांठ और पप्पू की याद,



फ़्री है जी बिल्कुल वकील साहब नहीं ले रहे फ़ीस॥


पंडित सुरेश कह रहे प्रयोग कर के दिखा दिया,



आज पहेली बूझ के तबियत हो गई टाईट॥



मिश्रा जी ने राव जी का चेहरा पहली बार दिखाया ॥



इस चर्चा में सारी रितुएं , शिशिर और बसंत,



कौन कहता है जी लौटता नहीं गुजरा हुआ जमाना ,



राज भाई ने एक पंक्ति में पूछा एक सवाल ,



अजी ऐसे खडे रहे तो आप हो जाएंगे लेट ॥



जब ज्ञान जी विविधता लाएं तो पोस्ट बने अनुपम,



विपत्ति जब आती है , कायर का दिल दहलाती है,



प्रभाष जी को हिंदी ब्लोग जगत ने दी जो श्रद्धांजलि,



पूछे है मन की पाखी, कौन जगाएगा अलख ,



अपने चिर परिचित अंदाज में फ़िर बोले श्री गोदियाल,



कितना कुछ होना बचा रह जाता है ,एक बेदखल,



आज की चिट्ठा चर्चा में इसी का हुआ जतन ॥


तो आज के लिये इतना ही ....

26 टिप्पणियाँ:

cmpershad ने कहा…

"फ़्री है जी बिल्कुल वकील साहब नहीं ले रहे फ़ीस" ..इस चक्कर में न रहियो बबुआ...फ़ीस का बिल तो पीछू आता है :) चर्चा का अच्छा जतन किया॥

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर चर्चा की है आपने .. कई अच्‍छे लिंक्स मिले .. धन्‍यवाद !!

Dipak 'Mashal' ने कहा…

Ashok ji ki post ki taraf dhyan dilane ke liye bahut bahut shukriya Ajai bhai ji....
sundar charcha...
Jai Hind...

Anil Pusadkar ने कहा…

मस्त चर्चा।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

अब ब्लाग डायरेक्ट्री बन ही रही है, शायद बिल सही जगह पहुँचने लगें। इधर अदालतें तो खराब एटीएम मशीन हो गई हैं मुकदमा अंदर डालो तो फैसला निकलता ही नहीं। मुकदमा अंदर फँस जाता है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर चर्चा किये है भाई आ तो, मुजे तो भेंस की फ़िक्र हो रही है जब लालू सारा चारा चर गये तो भुखी भेंस का दुध देवे

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सुंदर और मस्त चर्चा रही.

रामराम.

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बहुत सुंदर चर्चा

Arvind Mishra ने कहा…

सुन्दर संक्षिप्ति !

गिरिजेश राव ने कहा…

@ अदालतें तो खराब एटीएम मशीन हो गई हैं मुकदमा अंदर डालो तो फैसला निकलता ही नहीं। मुकदमा अंदर फँस जाता है।

बहुत खूब! ये मशीनें सबकुछ ठीक रखने के लिए बनीं। यही खराब हो गईं! संकट है।

इन लाइनों से एक व्यंग्य लिखने का सामान बनता है। दिनेश जी लिखिए न। झा जी से सोर्स लगा कर नम्बर एक पर रखवा देंगे ;)

वाणी गीत ने कहा…

दो लायना भी है कमाल ...मिला बहुत से चिट्ठों का हाल...!!

खुशदीप सहगल ने कहा…

झा जी का उत्साहवर्धन टॉनिक लीजिए
काम (अपनी-अपनी पोस्ट) पर चलिए...

जय हिंद...

'अदा' ने कहा…

दू लाइन में चर्चा कमाल कर दिया
बैठे-बिठाये आपने बवाल कर दिया...

ललित शर्मा ने कहा…

जय होवे तोर झा जी-बने कहिन,सुंदर चर्चा दु-दु लैन के -बधाई-रात के हम नही देख पाए सुत गये थे अभी देखे।

जी.के. अवधिया ने कहा…

झा जी चर्चा करने में रहते हैं व्यस्त
उनकी चर्चा पढ़कर सब हो जाते हैं मस्त

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

एक लाइना की चर्चा बहुत बढ़िया रही!

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

कृपा तो है राम की पर सिंह न बन सका रामकृपाल सिंह।

बी एस पाबला ने कहा…

हमेशा की तरह मज़ेदार

बी एस पाबला

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

Bahut sundar charchaa !

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

बहुते बढिया रही चर्चा....

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बढ़िया है जी, लगे रहिये !

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

हमने पढ़ने में कर दी है देर
टिप्पणी देने में हो गई है देर
कविता रूप में चर्चा बढ़िया है
इस हेतु धन्यवाद के पात्र है..

शरद कोकास ने कहा…

बढिया है कम जगह मे ज़्यादा लोग ..।

Suman ने कहा…

nice

श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

मजा आना था , मजा आ गया..

Meenu Khare ने कहा…

सुंदर चर्चा.

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