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बुधवार, 24 जून 2009

वे हिंदी में ब्लॉग्गिंग करते हैं..और हिंदी ब्लॉग्गिंग को गरियाते हैं





















कुछ लोग यहाँ पर आजकल,
गजब की हिम्मत (हिमाकत )दिखा रहे हैं,

हिंदी में कर रहे हैं ब्लॉग्गिंग,
और हिंदी ब्लॉग्गिंग को ही गरिया रहे हैं,

पोस्ट , दो-चार लाइन की ठेल कर,
किसी को भड़का, किसी को उकसा रहे हैं,

लोग पढें ,पसंद करें, और टिपियाएँ भी,
सबसे यही अपेक्षा लगा रहे हैं,

टिप्पियाँ भी हाँ जी वाली तो ठीक, नहीं तो,
मोडरेशन के बहाने ,,उड़ा रहे हैं...

सिर्फ वही करते हैं, गंभीर लेखन,
ऐसा बार -बार जता रहे हैं.....

खुद की चर्चा नहीं हो कहीं, या की कोई करे आलोचना,
बस वहीं,,उबल उबल कर टिपिया रहे हैं...

समझ नहीं आता जब हिंदी ब्लॉग्गिंग इतनी ही गंदी है,
तो क्यूँ अपनी कलम यहाँ चला रहे हैं...

हमें तो उनका अंदाज पसंद न आया, जिस थाली में खाया,
खुद खा खा कर, उसी में छेद बना रहे हैं....

आप सब भी समझ गए होंगे ही,
और वो भी ,जिनके लिए इतना लिखे जा रहे हैं..

आम तौर पर मैं इस तरह की बातें नहीं लिखा करता..मगर पिछले कुछ दिनों से देख पढ़ रहा हूँ की कुछ लोग यहाँ सिर्फ नकारात्मक बातें ही कर रहे हैं..कारण वे ही बेहतर जाने.....यदि आलोचना करनी ही है...तो फिर पूरे तर्क के साथ और स्वस्थ अंदाज में कीजिये....अजी किसी पर उंगली उठाना तो सबसे आसान काम है..हो सकता है हिंदी ब्लॉग्गिंग में अभी बहुत सी कमियां हों मगर इन्हें दूर करने के लिए आसमान से कोई उतरेगा नहीं......ज्यादा नहीं कहना चाहता..मुझे हिंदी ब्लॉग्गिंग पसंद है..और इसके लिए किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं लगती....

बुधवार, 17 जून 2009

अच्छा जी घूम के आते हैं......




भाई पिछले कई दिनों से देख रहा था की कोई न कोई पोस्ट इस गर्मी में ऐसी आ ही रही थी जो आँखों और मन को सुकून पहुंचा रही थी..कोई बर्फ के पहाड़ दिखा रहा था तो कोई हरियाली ...यार कब तक बर्दाश्त करते....मन पिनक गया...और हमने भी बना लिए प्रोग्राम..वैसे भी श्रीमाती जी जब भी ..कोई सुन्दर दृश्य सिनेमा में देखती , और मेरे ये कहने की देर नहीं हुई...बड़ी ही सुन्दर जगह है..बिक्लुल अद्भुत और मनोरम...पत्नी जी बिदक कर तुरत मनोरमा बन जाती ..और शुरू हो जाती ..हमें कहीं घुमाते-फिरते भी हो.(दरअसल , जोश जोश में हमन श्रीमती जी को बता दिया था की अपने कुंवारे समय में हमने देश के सत्तर शहरों में घुमाई फिराई कर राखी है...)बस लगे रहते हो अपने इस कम्यूटर के साथ...किसी दिन सारा गुस्सा इसी पर निकलेगा ..इसे तो वाशिंग मशीन में धो दूंगी...

मैंने सोचा की सचमुच ही ऐसा हो..इससे पहले ही कार्यकम बना लिया..सो अब चलते हैं...डलहौजी..चम्बा .खजियार..पंचदिवसीय दौरा है..वापसी आने पर दो तीन पोस्टों का जुगाड़ भी हो जाएगा..उन्ही फोटुओं में अपनी श्रीमती जी..अपने पुत्तर लाल श्री गोलू जी और बिटिया रानी बुलबुल से आपको मिलवायेंगे...
आप जो मन करे लिखिए टिपियाइये..हम मोबाईल पर पढेंगे...अरे नहीं लैपटॉप नहीं जा रहा हम नहीं चाहते की कल को खबर मिले की एक लैपटॉप की लाश डलहौजी की घाटियों में पायी गयी..

शनिवार, 13 जून 2009

अफज़ल की पेंशन तय...कसाब ने भी मांग की



मुझे तो पहले ही पता था की इस बार जय हो जय हो ..करके सरकार बनी है तो कुछ न जय तो जरूर ही करेगी ..भाई लोगों जो भी अफज़ल और कसाब की सजा और फाँसी को लेकर चिंता में थे .उन्हें अब दुबले होने की जरूरत बिलकुल भी नहीं है..वे अगले पच्चीस सालों तक मज़े में इस मुद्दे पर ब्लॉग पोस्ट ठेल सकते हैं..
चलिए पहले ये बताता हूँ की माजरा क्या है..आज प्रकाशित खबर के अनुसार..नए कानून मंत्री (वीरप्पा ,यार ये नाम कुछ सुना सुना सा लगता है ..अरे नहीं उसमें तो न लगा था ) ने मजबूरी जाहिर करते हुए बताया है की जब तक राष्ट्रपति के पास अफज़ल की दया याचिका लंबित है ....तब तक उसे फांसी पर नहीं चढाया जा सकता. ..और अब लंबित याचिकाओं की भी सुन लीजिये...राष्ट्रपती के पास अभी कुल अट्ठाईस याचिकाएं लंबित हैं....जिनका निस्तारण होने में कम से कम पच्चीस साल लग सकते हैं...कम से कम है ये समय....तो इस हिसाब से अपने अफज़ल miyan तो yaheen buddhe हो जायेंगे ....ऐसे में bhaarteey परम्परा के अनुरूप उनके लिए पेंशन की भी व्यवस्था होनी ही चाहिए..देखिये देखिये ....अब इसका विरोध तो नहीं ही करिए..आखिर उसने आपना पूरा जीवन देश में लगा दिया जी....इतना तो उसका हक़ बनता है...हाँ एमाउंट कितना होगा ये अभी तय नहीं हुआ है....मगर सब कुछ मंदी के ऊपर निर्भर करता है..

इस सारे मुद्दे को देखते और समझते हुए कसाब (क्या समझ रहे हैं आप...अजी कसाब सब कुछ ठीक से समझे इसीलिए तो सरकार ने उसे एक काबिल वकील भी मुहैया कराया है ...और वो अब पहले से ज्यादा समझदार है ) ने भी अविलम्ब ही अपने लिए भी सरकार से कुछ सोचने की मांग की है. उसका कहना है की अफज़ल भैया के लिए तो बुजुर्गी पेंशन तय ही की जा चुकी है..लगभग ..का क्या मतलब है जी..पक्का ही समझें....मगर वो तो अभी बच्चा है ..सो उसके बालिग़ होने तक बच्चों की कोई इंश्योरेंस पालिसी ही करवा दो..और बालिग़ होने पर जीपीईफ़ ..पीपीईफ़ वैगेरह का इंतजाम कर दिया जाए..किसी भी तरह के बोंड से उसने साफ़ मन किया है..मंदी के दौर को देखते हुए उसकी चिंता स्वाभाविक ही लगती है...मौजूदा समय में मुझे तो उसकी मांगें बिलकुल जायज़ लगी...हालांकि मेरा तो विचार था की सरकार को नया वेतन आयोग लागू करते समय ही इन अफज़ल ..कसाब ..और बहुत से ..जो अभी आने वाले हैं ..उनके कल्याण के लिए कोई ठोस नीती बनानी चाहिए थी..

सुना है की इस खबर का अन्तराष्ट्रीय फांसी वेटिंग मुजरिम्स असोसीयेशन ने स्वागत किया है..और मांग की है की उन्हें पूरे विश्व में भारत की न्याय व्यवस्था पर सबसे ज्यादा भरोसा हो गया है ..विशेषकर सबने एक ख़ास आग्रह किया है की उन सबकी अंतिम याचिका भारत के राष्ट्रपति के पास ही भेजी जाए..इसके लिए वे अपने अपने देश से एक एक राष्ट्रपति भी भेज सकते हैं...(यहाँ राष्ट्रपति के पास ज्यादा पेंडिंग न बढ़ जाए इसलिए. )

गुरुवार, 11 जून 2009

महाराष्ट्र में भी भारतीय प्रताडित किये गए.....



ऐसा लग रहा है की विश्व सचमुच एक गाँव का रूप ले चुका है...देखिये न ..घटना कहीं और होती है और प्रतिघटना कहीं और..अभी कुछ समय पहले ही बाहर किसी सिख गुरु पर हमले के विरोध में कैसे पूरा पंजाब सुलग उठा था....वो तो शुक्र है की मामला जल्दी शांत हो गया...आजकल भारतीयों पर हमले की घटनाएं बहुत बढ़ गयी हैं...अरे नहीं नहीं मैं उन नेताओं की बात नहीं कर रहा हूँ जो चुनाव के दुरान जूते के हमले का शिकार हुए थे., सच कहूँ तो तो न तो वो हमला था और न वे नेता लोग भारतीय जैसे थे..खैर,
तो बात हो रही थी की इन दिनों हमारे बच्चे जो बाहर जा कर पढ़ना चाह रहे थे ...कमबख्त गोरों ने पता नहीं कौन सी निकाली है.....सुना एक कारण तो ये भी बताया जा रहा है की जबसे आमिर ने लगान में गोरों की टीम को हरा दिया तब से वे बेचारे
कोई भीमैच नहीं जीत पा रहे हैं..चलिए छोडिये उस मुद्दे पर फिर बात करेंगे...फ़िलहाल तो चिंताजनक खबर ये है की कुछ भारतीयों पर महाराष्ट्र में भी मानसिक हमले किये गए हैं...पूरी खबर ..आज के दैनिक जागरण में पढें...दरअसल वहाँ के पुणे आई आई टी संस्थान में साकछात्कार देने गए बिहारी (क्यों वे भारतीय नहीं हैं क्या, आप क्यूँ चौंके )विद्यार्थियों को मानसिक रूप से प्रताडित किया गया ..उनसे पूछा गया की बिहार देश की अपराध राज्धाने क्यूँ और कैसे बनी....बताइये भला ..अरे ये तो लालू जी पासवान जी ..और भी जितने जी हैं....उनसे ही पोछना चाइये था न...

विद्यार्थियों से कहा गया की यहाँ महाराष्ट्र में जितने अपराध होते हैं ...वे बिहारी करते हैं......बताइए भला...मुझे तभी जाकर पता चला की ..दाउद इब्राहीम...अरुण गावली. हाजी मस्तान..और राज ठाकरे लोग बिहारी हैं.....मैं तो उन्हें महाराष्ट्र का ही समझ रहा था अब तक.......सुना है नीतिश जी ने पूरी गंभीरता से ये मसला उठाया है..अब ये पता नहीं की उन्होंने आस्ट्रेलिया बात की है या.....नहीं नहीं यार ...भारत में कोई भारतीय को क्यूँ.......अच्छा ऐसा हुआ है....लोगों की मानसिकता कितनी आस्ट्रेलियन हो गयी है.....नई.....

सोमवार, 8 जून 2009

ब्लू लाइन बसें सेना में शामिल :सेना के लिए गर्व का दिन



न जाने कितने वर्षों से मैं इस घड़ी की प्रतीक्षा कर रहा था ..और ब्लॉग्गिंग के अपने शुरुआती दिनों में भी ये बात मैंने अपनी एक पोस्ट में जाहिर की थी..और आखिरकार आज वो दिन आ ही गया...आज ही अपने विश्वस्त ( जिन पर मुझे कभी भी विश्वास नहीं रहा ) सूत्रों से पता चला की ..सेना ने दिल्ली की ब्लू लाइन बसों के लगातार बढ़ते सटीक परिणाम और अचूक मारक क्षमता ...को मानते और समझते हुए ...आखिरकार उसे सेना के इन्फैन्ट्री में शामिल करने का निर्णय ले ही लिया...हालांकि अभी ये तय बहिन हुआ है की ये नयी बसें...जिन्हें नए मारक अस्त्र के रूप में सेना में शामिल किया गया है ..वे बोफोर्स तोप का स्थान लेंगी या नहीं ...मगर इतना तो तय है की आने वाले समय में ब्लू लाइन बसें..लोगों को मारने और कुचलने की अद्भुत क्षमता के बदौलत ...अन्य सभी तोप और अन्य मारक वाहनों को कड़ी टक्कर देगी...

दरअसल सेना का नजर तभी से इस अचूक मारक वाहन पर लगी हुई थी जब से वे देख रहे थे .....की सरकार और पुलिस के इतने पहरे..नियमों और कानूनों के बावजूद ये वाहन लगातार अपनी मारक क्षमता को बढ़ा रहा था .....और तो और उन्हें इस वाहन का ये गुण भी विशेष रूप से पसंद आया था की ये अपने लक्ष्य में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं करता....आदमी क्या. स्कूटर कर. कार क्या...सब को एक ही नजर से लक्ष्य बना लेता है....वेतन आयोग के लागु होने के समय जब सेना ने सरकार के सामने अपनी मांगें राखी थी तभी ये भी कहा था की इन बसों को भी सेना में शामिल किया जाए..
मगर जनसँख्या नियंत्रण विभाग ने ये कहते हुए आपत्ति की , की इन बसों ने पिछले दिनों में उनकेअभियान को बड़ी सफलता दिलाई है.......लेकिन आखिरकार उन्हें मना ही लिया गया......

सेना ने इस मौके पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा की पहली बार देश में बने किसी मारक वाहन को अपनी सेना में शामिल करके उन्हें अभूतपूर्व गर्व का एहसास हो रहा है....सेना को हमारी भी शुभकामनायें...

(ऐसी ही एक पोस्ट मैंने अपने शुरआती दिनों में लिखी थी ...मगर आज भी सामयिक लगी सो लिख दी....)

शनिवार, 6 जून 2009

सावधान....यहाँ सौ का नोट दस में बदल जाता है.....

जी हाँ, आप सोच रहे होंगे कि अब तक तो यही सुन और देख रहे थे कि , कोई पैसे ले कर उसे दुगुना और तिगुना कर देता है ......मगर ये कौन सी अनोखी स्कीम आ गयी है जहां सौ का नोट सीधे दस रुपये के नोट में बदल जाता है.....यकीन नहीं हो रहा ...तो खुद ही देख लीजिये.....
जी ...बिलकुल ठीक समझे आप ये अनोखी स्कीम इन दिनों भारतीय रेलवे के टिकेट काउंटर पर खूब मजे में चलाई जा रही है....ख़ास कर उन स्टेशनों पर जहां लोगों की भीड़ बहुत ज्यादा है....ऐसे में राजधानी दिल्ली में तो पूछिए मत......गरीब, मजदूर, अनपढ़, और बहुत से लोग जो अचानक घर जाने (मेरा मतलब अपने मूल प्रदेशों ) का कार्यक्रम बना लेते हैं....स्टेशन पहुँच कर टिकेट की लाइन में लग जाते हैं.....घंटे दों घंटे बाद जब नंबर आता है तो जैसे ही काउंटर के अन्दर पैसे पकडाते हैं.....आवाज आती है......भाई ये क्या दे रहे हो.....वो कुछ समझे इससे पहले ही उसके सौ के नोट के बदले दस का नोट वापस देकर कहा जाता है पैसे कम हैं......लोग अक्सर पैसे गिरने के दर से नोटों को लपेट कर या मोड़ कर काउंटर में डालते हैं....और बस यही से कमाल कर देते हैं स्कीम वाले......अभी कल ही एक महिला काउंटर क्लर्क को विजिलेंस वालों ने रँगे हाथों यही कलाकारी करते पकड़ लिया ....इन महिला के खिलाफ कई दिनों से शिकायत आ रही थी...चूँकि लोगों को ट्रेन पकड़ने की जल्दी होती है इसलिए वे झगडे में पड़ने की जगह दूसरा नोट पकडाना ही बेहतर समझते हैं......फिर लाइन में लगे अन्य लोग भी उसे वहाँ ज्यादा देर तक नहीं रुकने नहीं देते.....
यदि आप भी किसी ऐसी स्थिति में पड़ते हैं तो मेरी तरफ से दों सलाह.....हमेशा नोट को खोल कर पक्दाइये...जिससे काउंटर के अन्दर कलाकारी करने वालों को मौका न मिले....यदि फिर भी ऐसा हो ही जाए तो,,,समय हो तो खुद अन्यथा जो भी आपको छोड़ने आये हों.....उस काउंटर के कलाकार की शिकायत....वो भी लिखित में....(हालाँकि इसके लिए शिकायत पुस्तिका मिलना भी किसी चमत्कार से कम नहीं होगा आपके लिए )जरूर करें....इससे किसी न किसी दिन उस रेलवे के कलाकार का नाम जरूर रोशन होगा....

कमाल है रेलवे की इतनी तन्क्वाह और ओवर टाईम के बावजूद ये स्कीम......सौ रुपये दों....दस का लो.....

शुक्रवार, 5 जून 2009

सुना है...पर्यावरण दिवस पर.....

पर्यावरण दिवस को, छोटे में, कुछ यूँ, मनाया हमने, उन्होंने किये वादे, दोहराए संकल्प, बस सच, दिखाया हमने, सुना है , इक कार, सबको , सस्ते में मिलेगी, धुंआ तो , वो भी छोडेगी, आखिर , सड़क पर चलेगी, सुना है,कोरिया ने, कूलर से सस्ता, ऐसी बनाया है, सी ऍफ़ सी, गैस न निकले, क्या कोई ऐसा, यन्त्र लगाया है...? सुना है, इको संतुलन को, अमरीका भी तैयार है, ढूंढ रहा है सी आई ए, उसे जो , पर्यावरण, असनतुलन का, जिम्मेदार है.....

और जैसे ही वो मिल जाएगा... हम उसे पकड़ कर सभी प्रदूशानो से मुक्त हो जायेंगे...आप भी तलाश जारी रखें.....

रविवार, 31 मई 2009

यूँ ना बुझेगा धुंआ ....










तम्बाकू निषेध दिवस पर हरेक वर्ष की तरह कुछ नया पुराना तो होगा ही. इस बार सरकार ने नए कानून के अनुसार सभी तम्बाकू पदार्थों के ऊपर खतरे के निशाँ युक्त चिन्ह को अनिवार्य कर दिया है. तो क्या इससे सचमुच इससे कुछ फर्क पड़ जायेगा... वैधानिक चेतावनी , कि तम्बाकू का सेवन आपके स्वास्थय के लिए हानिकारक है , तो न जाने कब से छापा दिख रहा है. अभी पिछले वर्षों में सरकार ने सभी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था, तो क्या उससे कोई बड़ा परिवर्तन आया....नहीं कदापि नहीं....

दरअसल सरकार अपनी मजबूरी , जो कि इन दिवसों पर उसे निभानी पड़ती है, के अनुरूप हर साल कुछ औपचारिक रूप से करती ही है और फिर उसे हर दुसरे प्रयासों की तरह भूल जाती है. न ही समस्या के प्रति गंभीर है न ही संजीदा. आगे बढ़ने से पहले कुछ बातें कहना चाहूँगा जो शायद यहाँ समीचीन हों. कुछ वर्षों पहले जापान में ऐसे ही धूम्रपान निषेध को लागू किया गया. आप शायद यकीन न करें, मगर सच यही है कि सिर्फ पचास दिनों के भीतर , धुम्रपान करने वाले कुल लोगों में से लगभग चौसंठ प्रतिशत लोगों पर सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने के लिए जुरमाना लगा दिया गया. आज वहाँ ऐसी व्यवस्था है कि जगह जगह पर एक मोबाईल वें घूमती है, या उपलब्ध रहती है. जिनमें बैठ कर ही लोग धूम्रपान कर सकते हैं...चलिए एक और जगह की बात करते हैं. भूटान विश्व का वो पहला देश था जहां पर राष्ट्रीय स्तर पर धुम्रपान निषेध लागू कर दिया गया. मगर वहाँ अपने देश की तरह रातों रात कुछ नहीं किया गया . पहले दों वर्षों तक धुम्रपान से सम्बंधित सभी पहलुओं पर विचार किया गया , उन उद्योगों में लगे लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यस्था की गए तब जाकर इसे लागू किया गया...इस तरह सफल होते हैं ये निषेध.....

चलते चलते एक बात और, मेरा एक मित्र जो खुद भी धूम्रपान करता था, ने मुझे बताया कि एक निर्दोष नामक सिगरेट आती है.. जो न सिर्फ कम हानिकारक है , बल्कि यदि उसका ही सेवन किया जाए तो धुम्रपान की आदत धीरे धीरे छोट जाती है.............वैसे मेरे ख्याल से तो आज के दिन जम कर उन लोगों पर जुरमाना lagayaa जाए जो धुम्रपान करते हैं ...ताकि उन्हें कुछ तो दंड मिले....

शनिवार, 9 मई 2009

लो जी हमारा भी हो गया छतीस का आंकडा







चलो बता दिया आपको,

आज है अपना भी बर डे.....,

जो भी हो फुर्सत में,

हमें भी विश कर दे.....

ये तो इक इशारा है,

आपके इस कनीस का,

गिनते गिनते अपना भी,

आज आंकडा हुआ छतीस का...

हो गया ख़त्म बचपन अपना,

अब साठ तक जवानी रहेगी॥

इसके बाद का क्या कहें...,

इतिहास रहेगा, कहानी रहेगी.....

और हाँ, बर डे का केकवा ऊपर लटका दिए हैं, थोड़ा थोडा चख लीजियेगा मगर वेज है की नॉन वेज ई तो ससुरा गूगलवा ही बता सकता है , काहे की उसकी ही फैक्ट्री का ना है.......



शनिवार, 2 मई 2009

सूअर फ्लू के बाद होगा डायनासोर बुखार ........



अगली बार फैलेगा डायनासोर फ्लू

मुझे अच्छी तरह याद है की जब हम छोटे थे तो कई तरह की बीमारियों का नाम सुनते थे, मसलन बुखार, पेचिश, हैजा, छोटी माता, बड़ी माता, और भी न जाने कौन कौन से . इसके काफी दिनों बाद एक और बीमारी ने बड़ी दहशत फैलाई थी, वो थी दिमागी बुखार या गर्दन तोड़ बुखार . मगर पिछले कुछ सालों से जिस तरह की बीमारियों का नाम सुन रहा हूँ उसने तो दिल दिमाग दोनों ही चकरा कर रख दिए हैं. यदि मैं ऐड्स को इसमें न भी शामिल करूँ तो भी , आप ख़ुद ही देखिये न, मैड काऊ (जो गाय का मांस खाने के कारण होती थी ) फ़िर आया बर्ड फ्लू या कहें चिकेन गुनिया और अब ये सूअर फ्लू या कहें की सूअर गुनिया. हलाँकि इनके अलावा हेपातायीतिस और कुछ इसी तरह की नयी बीमारियां भी हमारे जमाने में नहीं सूनी जाती थी, किंतु इन बीमारियों में हमारे इन जीवों का कोई हाथ नहीं था.

एक बात मेरी समझ में नहीं आयी, यदि ये भयंकर बीमारियाँ , गाय, मुर्गी और सुआर जैसे जीव जंतुओं, पशुओं को खाने से ही होती हैं तो लानत है, अमा यही चीजें बची हैं खाने के लिए. अबे ये कोई आदम ज़माना है की शिकार कर के जानवरों का मांस भक्षण करना ही पडेगा, इश्वर की बनायी इस दुनिया में खाने की चीजों की कोई कमी है क्या जो लोग ये सूअर, गाय, भैंस, कीडे मकोडे खाने पर तुले हुए हैं.

भैया अब भी उन सबसे मेरी अपील है की इंसान हो इंसान बन कर रहो, यार ये काम तो जानवर भी कुछ ही करते हैं. मुझे तो कभी कभी लगता है की शुक्र है आज के जमाने में डायनासोर नहीं थे नहीं तो किसी दिन सुनने को मिलता की दुनिया में डायनासोर फ्लू भे फ़ैल रहा है………….

गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

अरे कोई लिंक बनाना सिखा दो भाई....

मैंने अक्सर लिखते समय महसूस किया है की यदि उसी विषय पर मैं पहले से कही हुई बात उन चिट्ठाकारों के ब्लॉग एड्रेस के साथ लिंक बना कर लिख सकता तो क्या खूब होता, जैसे आप लोग चिटठा चर्चा में करते हैं मगर अफ़सोस की मुझे लिंक बनाना नहीं आता, क्या आप में से कोई मेरी मदद कर सकता है , थोड़ा आसान रास्ता बताइयेगा, आपका आभार .....

सोमवार, 27 अप्रैल 2009

लादेनवा मर गया पकिस्तान में भोज होगा......

आअज का सबसे बड़ा ख़बर यही था की मंत्री संतरी लोग बोले हैं की ऊ लादेंवा अजी वही पचास बीवी आ पता नहीं कितना बच्चा वाला ससुरा मर लेकिन ई लादेंवा तो आप लोगों का दोस्त न , था गया ,ऊ ससुर मारा कैसे है ई ता ठीक ठीक पता नहीं है लेकिन इतना पका है किसी अमरीका टैंक अथवा बम से नहीं मारा है जी, हमको तो लगता है की ससुर को पका चिकन गुनिया से ही मारा होगा नहीं तो ऐड्स हो जी असली बात तो ये नहीं है की ऊ मारा कैसे, असली ख़बर ता ई है की पाकिस्तान में बडका भोज होने वाला है, भोज माने दावत जी,.एही सिलसिला में हमारा बात भी हुआ ....

काहे सर सुने हैं की आजकल खूब भोज भात का तैयारी कर रहे हैं, मुदा लादेंवा ता आप लोगों का दोस्त था न जी, तो फ़िर ई दावत, और कौन कौन आ रहा है बाहर से दावत खाने ...?

अरे का झा जी, आप तो एक दम से पूछते ही जा रहे हैं, अजी काहे का दोस्त उ ससुर तो एके काम हटा खाली जनसंख्या बाधाओं आ बम मार मार के जनसंख्या कम कर दो, ऊ ससुरा के कारण जानते हैं काटना नुक्सान हो रहा था हम लोग को, अपना अमरीकवा एकदम से पैसा कौडीदेना बंद न कर दिया था, अब देखिये न ई लादेन के मरने पर भोज वही पैसा से न होगा जो अमरीका हम लोग के इनाम में देगा। आ जानते हैं खुशी का बात ई है की बुश साहब भी आ रहे हैं॥

अरी ई का कह रहे हैं जी, ऊ कैसे आ सकते हैं ?

काहे ई में इतना चौकने वाली कौन बात है, देखिये जब ऊ जूता खा सकते हैं ता हम लोग ता खाली उनको दावत खाने के लिए बुला रहे हैं। ऊ जरूर आयेंगे और साप्रिवार आयेंगे, दरअसल सपरिवार इसलिए की का पता कल को ओंकी पत्नी अमरीका की राष्ट्रपति न ता कौनो मंत्री बन जाए ता रीलेशन बना के न रखना चाहिए।
अच्छा ता भारत से भी कौनो को दावत भेजें हैं का,?

अरे आप ता सारा पोल खोलवा लीजियेगा, नहीं नहीं भारत से कौनो नहीं आ रहा है, एगो कह रहे हैं की अब ही हम ऐसा नहीं कर सकते हैं, जब आपके पाकिस्तान आयेंगे न एक बार जिन्ना साहब को प्रणाम करने के बाद ही दावत खाएँगे। दुसरका कह रहसी है की हमको तो छोड़ ही दीजिये हम ता खाली फोटो देख कर ही खुश हो जाते हैं । अरे झाजी असली बतवा ता ई है की सब के सब बाहर नहीं khaanaa चाहते हैं आप लोग घर में पता नहीं आज कल ऊ ईराक वाला घटना के बाद से का का खिला रहे हैं सबको सबका पेट उसी से भर रहा है ।
खाली एक चीज का दुःख रह गया की ई अपना छोटका बच्चा कसाब को आप लोग नाबालिग़ मान कर छोड़ देते ता हम लोग यहाँ पर उसका मुंडन करा कर एगो और भोज देते, बताइए कितना ज्यादती कर रहे हैं आप लोग, अरे आप नहीं सुने हैं इसी तरह अमरीका में भी बचवा सब बन्दूक उठा कर कितना बार मरा मारी किया है, ऐसे ही कसब्वो से हो गया होगा, बांकी तसल्ली है की अफजल जैसे इसको भी अपना bachchaa समझ कर पाल लीजियेगा , आप ता आ रहे हैं न भोज खाने...

अरे का कह रहे हो भाई, जानबे करते हो कितना कमजोर है हमारा पाचन शक्ति, चलो अबकी कौनो और मारा ता आयेंगे....

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

लीजिये पेश है झाऊ पहेली...., बूझो तो जानें..

आज कल पहेलियों का मौसम चल रहा है और ताऊ से प्रेरीत होकर मैंने भी सोचा की एक प्रश्न आपके लिए मैं भी छोड़ता जाऊं,
बताइये अगला जूता किसे पड़ने वाला है?,.........


और हाँ प्रश्न का सही उत्तर मिलने पर हमारी और से नकद धनराशी इनाम देने की भी व्यवस्था है, मगर जवाब बिल्कुल ठीक होना चाहिए तो लगाइए अंदाजा और कीजिये एस ऍम एस कहाँ किस नंबर पर, ये भी बता देंगे जल्दी क्या भाई.....

रविवार, 12 अप्रैल 2009

रोड रोलर से काहे जी, गरीब रथ से काहे नहीं कहे ?

चुनाव प्रचार के बाद शाम को मंत्री जे निवास पर जब रोजाना के कार्यक्रमों की समीक्षा चल रही थे और भविष्य कीयोज्नायें बन रही थी, तब न जाने कहाँ से देहाती बाबु को ये एक्सक्लूसिव बातचीत सुनने को मिल गयी, लीजिये ख़ास आपके लिए हाजिर है उस उन्सेंसेर्द वार्तालाप के मुख्या अंश. ध्यान रहे की ये बात ब्लॉगजगत के बाहर न जाए क्यूंकि आजकल सुना है की मीडिया वाले इसी फिराक में लगे रहते हैं की कौन सी एक्सक्लूसिव ख़बर ब्लॉगजगत से उठा कर अपने यहाँ चला दी जाए, खैर तो पेश है वो बातचीत:-

“ई जी, देख रहे हम काटना बढिया प्रचार कर रहे हैं, हमरा कोंफीदेंस तो अब एकदम बढ़ गया है , का कमाल का स्पीच दे रहे हैं, है की नहीं.” मंत्रानी बोली.

“अरे ई का कह रही हो, हमको नहीं पता है का , ऊ तो हमको ताभीये तुम्हरा पी ई टेलीफोन से बता दिया था की मालिकिन खूबे गरिया दी हैं सबको, हम समाजः गए की जाऊँ पोलोतिक्स हम तुमको इतना दिन से समझाने का कोशिश कर रहे थे ऊ तुमका अब समझ में आया है . हमको लग गया था की तुम भी हमरे वाला रास्ता पकड़ ली हो और देर सवेर तुम्हरो पर ई बात के लिए मुकदमा हो जायेगा.” मंत्री जे ने समझाया “

मंत्रनी अपनी तारीफ सुन कर जोश में आकर बोले, “मुदा ई आपको का हो गया है ई बरुन्मा के लिए कहे ऐसा कह रहे थे की हम यदि ई होते ता ऊ कर देते, हमरा मतलब कौनो बड़ा मंत्री होते ता ससुरा के रोड रोलर के नीचे दबा देते अरे इससे बढ़िया ता ई रहता की कहते की गरीब रथ के नीचे कटवा देते, अरे प्रचार ता होता, और फ़िर कहे बरुन्मा कहे हो, का पता कल ओकरे सरकार आ जाए आ हम लोग के उसके साथ ही मंत्री बनना पड़े, ता ई ठीक न न लगेगा. अरे और कुछों नहीं ता ओकरी मैया यदि मंत्री बन गयी ता ई अपना गाया बहिन्सिया सब पले के कारण जेल में डलवा दे देगी. आपहु साथिया गए हैं “

“अरे धुत बुद्बद्क ,तुमको अभी पोल्तिस पुरा सीखना न पडेगा, ई सब कुछ नहीं होअगा, और ई का कह रही हो की उससे हाथ मिलाना पडेगा, सरकार बने के बाद. धीरे बोलो कौनो सुन लिए ता पहले ता ऊ पार्टी ऍफ़ आई आर दर्ज करा दिहिस है , अ भी करवा देगी. फ़िर ऐसन थोद्बे होता है आरे पार्टी का भी कौनो उसूल होता है, ऐसे कैसे किसी से भी मिल जायेंगे “ मंत्री जी तुन्ना कर समझाया.

“अरे जाइए जाइए, उसूल होता है , हम ता देख लिए की खाली मंत्री बनना ही मकसद होता है, कौन उसूल और कौन सिद्धांत, ई हमरा मत बतैयी” मंत्रानी हैं हैं
करके हंसती हुई चल दी .

ई हमका एक न एक दिन जरूर मरवाएगी. मंत्री जी सोच रहे थे.

सोमवार, 9 फ़रवरी 2009

हाय ई चीयर गर्ल्स की नीलामी कब होगी भैया ?

हमको बड़ी खुशी है की इतना मंदी होते हुए भी हम लोग खेलने कूदने के लिए विदेशी लोगों को खरीद लिए, ऊ भी इतना मरा मारी करके , बोली लगा के । ससुर सबको जीते जी नीलाम कर दिए, आ भगवान् की कृपा रही तो आगे भी बेचते खरीदते रहेंगे। अजी वैसे ही थोड़ी हम लोगों को बाजार सुपर पावर कहा जा रहा है। खरी, भैया उतना बड़ा हम देहाती लोगों का औकार और हैसियत तो है नहीं की इतना पैसा खर्च कर के खेलने के लिए आदमी लोगों को खरीदें, मुदा जब चीयर गर्ल्स की नीलामी शीलामी होगी तो जरूर ही किस्मत आजमाएंगे।

हमको तो गरीबी रेखा वाला सारा लोन के लिए भी दरखास्त दे दिए हैं, ताकि पैसा कम नहीं पड़ने पाये। का कह रहे हैं, देखिये आप तो हमारे नीयत पर ही शक कर रहे हैं। अरे नहीं भाई हमको कौनो नाच कूद थोड़े करवाना है ऊ चीयर गर्ल्स से। अरे नहीं भाई, किसी डांस शो में ऊ लोगन को पार्टनर बना कर नहीं ले जाना है। अरे का कह रहे हो यार, घर ले जाकर हमको का घर में २० २० करवाना है, श्रीमती जी गर्ल्स समेत हमको बाउंडरी के बहार फेंक देंगी।
दरअसल हमको तो सोच रहे थे, की दो चार चीयर गर्ल्स खरीद कर ऊ सब्नको अपना ई ब्लॉग पर चेप देंगे, खूबसूरती से हमको देहाती का ब्लॉग भी ऐसन झटके मारेगा की का कहें। हमरे ब्लॉग को तो अभी से गुदगुदी होने लगी है।


तो भैया जब भी चीयर गर्ल्स की नीलामी हो हमको भी ले चलिएगा।

शनिवार, 1 नवंबर 2008

सुना है अबके वो भी छठ पूजा मनाएंगे

सुना है , अबके,
वो भी,
छठ पूजा मनाएंगे,
मगर शर्त,
ये है की,
पहले मुंबई,
मायानगरी से,
सारे भैया भगायेंगे,
बस में पुलिस से,
और ट्रेन में गुंडों से,
एक एक को पित्वायेंगे,
दो दो लाख के ,
हिसाब से,
जमा कर दिया पहले ही,
सबके घर पर भिजवाएंगे,
छठ से उन्हें,
परहेज नहीं है,
बिहारी से भी,
गुरेज नहीं है,
पर नौटंकी जो दिखलाई तो,
तांडव वे दिखलायेंगे,
कह रहे थे जब,
वक्त हमारा आयेगा,
सबको देख लेंगे, फ़िर,
समुन्दर में अर्घ्य दिखाएँगे,

सुना है अबके,
वो भी,
छठ पूजा मनाएंगे........

क्या कहा, कौन , जी क्षमा करें, ये राज (नाम तो सुना होगा , नहीं सुना तो बहरे हैं आप ), की बात है, वैसे आप यदि अपनी आँखें बंद करके मनसे पूछें तो सारा राज खुल जायेगा। अजी सुना तो ये भी है की एक बड़े ही बड़े नाम वाले बैंक ने दो दो लाख मुआवजा देने के लिए उन्हें स्पांसर भी किया है, सुना है की इससे शायद उस बैंक के डूब जाने वाली अफवाह को थोडा ग़लत समझेंगे लोग, वैसे आप कुछ ग़लत न समझें, और हाँ बार बार ये न पूछा करें की आपने कहाँ सुना , किस्से सुना अजी अपने मनसे , और कहाँ से ?

गुरुवार, 16 अक्टूबर 2008

राम जी ने नल और नील के हाथ काटे

देखा आप सबने तो आखिरकार हमारे सरकार वो सच ढूंढ ही लाई जो अब तक हमें , अजी हमें क्या हमारे बाप दादों, और पुरखों तक को नहीं पता था, यही की ख़ुद राम जी ने ही राम सेतु को तोडा था। मुझे तो लगता है की ख़ुद राम जी को भी इस बात का पता नहीं चला होगा, चलता तो वे किसी को बताते नहीं क्या। खैर, बात सिर्फ़ उतनी नहीं है, सरकार यदि ऐसा कह रही है तो उसके पास कोई सबूत तो होगा ही, मुझे तो लगता है की उन्हें कोई हथोडा , या बुलडोज़र वैगारिरह मिल गया है।

वैसे मेरे शोध के अनुसार तो जिस तरह शाहजहान ने ताजमहल बनवाने के बाद उन कारीगरों के हाथ काट दिए थे जिन्होंने ताजमहल बनाया था , वैसे ही राम जी ने जरूर नल नील के भी हाथ और हाँ पूछ भी, काट दिए थे। ख़बर दार जो मेरे इस शोध पर आपने कोई शक किया तो क्यों सरकार कहेगी वो भी बिना किसी हथोडे और बुलडोज़र को दिखाए तो आप मान जायेंगे और मैं कुछ कहूँ तो नहीं , ये क्या बात हुई भाई। फ़िर मेरे पास एक और सबूत है इस बात का , नल नील ने लंका से लौटने के बाद कभी कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे प्रमाणित होता हो की उनके हाथ और पुँछ सही सलामत थे, और ये तो कतई नहीं मन जा सकता की इतने टैलेंट वाले लोग खाली बैठे रहे होंगे। आप ही बताइए कुछ ग़लत कहा मैंने।

वैसे मैं बता दूँ की मेरा शोध कार्य जारे है, और जैसे जैसे सरकार नया रहस्योद्घाटन करेगी , मैं भी आपको कोई सनसनीखेज जानकारी जरूर दूंगा। और हो सकता है की जब एकता कपूर रामायण बनाएं तो ये सब आपको देखने को मिल भी जाए.

रविवार, 12 अक्टूबर 2008

घर मेरे भी, बिटिया किलकने लगी है.

अब नर्म धूप,
मेरे आँगन भी,
उतरने लगी है।
टिमटिमाते तारों की रौशनी,
और चाँद की ठंडक,
छत पर,
छिटकने लगी है।
पुरबिया पवनें,
खींच लाई हैं,
जो बदली , वो,
घुमड़ने लगी है।
दर्पर्ण मंज रहा है,
ख़ुद को,
आलमारी भी,
सँवरने लगी है ।
फूलों के खिलने में,
समय है,
कल्यिओं पर ही,
तितलियाँ,
थिरकने लगी हैं।
शायद ख़बर,
हो गयी सबको,
घर मेरे भी, बिटिया,
किलकने लगी है.......

हाँ, जी , हाल ही में मुझे पुत्री प्राप्ति का वरदान मिला है। आप सब भी , आशीष दें और हो सके तो एक प्यारा सा नाम भी.

मंगलवार, 8 जुलाई 2008

किसको कहते हैं दहेज़

बउवा पूछा ,
बाबूजी से,
बताइये,
किसको कहते हैं - दहेज़ ?

तेरी जब,
शादी होगी,
जो माल मिलेगा,
उसको , रखेंगे सहेज।

तेरी बहन की,
शादी में,
इस कुप्रथा से,
मुझको,
हो जायेगी परहेज।

शायद दुनिया इसी को कहती है दहेज़.
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