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शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

दो लाईनों में समेटा है....देखिये कित्तों को लपेटा है...(चिट्ठी चर्चा.)


सबसे पहले तो आप सबको नवरात्रि के पर्व की बहुत बहुत शुभकामना....इश्वर करे कि ये त्योहार आपके परिवार में ढेरों खुशियां लाये.....चलिये इसी खुशी के साथ साथ एक खुशखबरी भी सुनते जाईये....अगली पोस्ट इस ब्लोग की सौवीं पोस्ट होगी ...और अपने वादे के मुताबिक ..अगली चर्चा ...शतकीय पोस्ट वाली...यानि सौ पोस्टों को समेटने वाली होगी...उम्मीद है...आपको ये प्रयास भी पसंद आयेगा...चलिये फ़िलहाल तो आज की चर्चा ..पेशे खिदमत है..


बताईये भला ,अमा तो भला फ़िर बोलेगा कौन...

पंद्रह हज़ार तो टीप गये, जाने कितने पढ गये विल्स कार्ड..


ब्लोग्गिंग की खींचतान से दूबे जी हो गये तंग,



आज ढूंढ ली आदि ने लाईट वाली आलमारी,



अजी हमरे बिहार में मिलते हैं, झाजी, मिश्रा जी, और पाठक, क्यों न वहीं से लाया जाये..?



ब्लोगजगत में हो रही कैसी कैसी खुराफ़ात,


ऐसा ही होता है जब कोई नहीं रहता अपने पास....


आप देखिये इन्होंने कितनों को हंसाया..


थोडा और हंसिये, बस और न कहेंगे शेष...


गोदियाल जी ने खींच लिये देखिये किसके कान...


घर का सारा कैरीकेचर, कविता में उतारा........


हमें तो और भी रंग दिखा है......



मैं क्या बताऊं, आप खुद देख के आना.....


देखिये कैसे पकडे हैं शतुर्मुग और चतुर्मुग.....



पोस्टें बहुत पढ ली, अब कार्टून देख के आईये..


राजतंत्र में जानिये, इसके आगे का हाल....


और जब नहीं मरेगा, तो ब्लोग्गिंग ही करेगा..


इसी बहाने से चिट्ठों की चर्चा कर गया कोई...



जरूर जा कर पढ लें, आयेगा आपके भी काम.....



आप खुद ही देखिये, इस अंतरिक्ष यात्री का हाल......


बताईये तो आप ज़रा, क्यूं पढते हैं इतिहास.....


मिलीये कुछ नये चिट्ठों से..

अरे इन्होंने भी शूरू कर दी ब्लोग्गिंग , आपको हुई नहीं खबर ...



इनकी पोस्ट भी पढिये, और स्वागत कीजिये आप....




तो आज के लिये इतना ही......जल्दी ही आपको हम एक महा चर्चा से रूबरू करवायेंगे...उम्मीद है आप सब उसमें अपना अपना लिखा पायेंगे..........

रविवार, 20 सितंबर 2009

नवरात्रि की आपको बधाई...चिट्ठों की चर्चा फ़िर से है आई..


मुझे बहुत खुशी है इस बात कि अब चर्चा को भी विस्तार मिल रहा है..नये नये मित्र नये तरीकों से ..पोस्टों को एक मंच पर सजाने का प्रयास कर रहे हैं...और ये तो शुरूआत है....फ़िर स्वाभाविक भी है कि जब पोस्टों और चिट्ठों की संख्या बढ रही है तो ....फ़िर चर्चा भी उसी के अनुरूप ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिये...उम्मीद है कि भविष्य में और भी बहुत से नये प्रयोग देखने को मिलेंगे.....नवरात्रि के शुभआगमन पर आप सबको बहुत बहुत शुभकामना ...

बस शीर्षक में ही मिले सब, पोस्ट में रहे गुमनाम...


टाटा नहीं रहे महफ़ूज़, हुआ सच का सामना,



ब्लोग्गिंग में हैं तो ब्लोग्स का स्वास्थ्य जांच कराईये,



किया गया है मटुक जूली का वेलकम..


पंकज जी की चर्चा का भी मजा लिजीये...


जाखड जी के बहाने , सबने किया सम्मान..



ब्लोग्गिंग पर त्रिपाठी जी ने रखे कई विचार,



जरूर मजा आयेगा सबको, पढने में टिपियाने में..



एक एक शब्द यूं,जैसे निकली हो दुआ..


संगीता जी ने पूछा है अपने ब्लोग के लिये इक नाम,


केक खाने के लिये मुंह का नाप भेजिये..


टीवी से निकली सनसनी, पेट में, मच गयी,


आप खुद ही देखिये, यहां कितने पहुंचे लोग..


मटुक जी को इक चिट्ठी मिली ,उसमें क्या था आखिर,



सारे नये नये चुट्कुले, मजे से पढ आईये..


जब किसी खबर पर पडती है हमारी नज़र,



शब्द ढलते, पिघलते, बनी अदभुत कहानी..



पुरूषोत्तम यकीन जी के बाद , आज मिलिये शिवराम से,


अब मिलिये इस परिवार में आये नये चिट्ठों से..........



मगर कलम में वो तेज़ी है , ज्यों तलवार हो दुधारी..


आज तो बच्चों की दास्तां है इनकी जुबां पर...


अब कहां, यहां तो ब्लोग्गर्स का मेला है..

चलिये आज इतना ही ....फ़िर मिलते हैं कल....

बुधवार, 16 सितंबर 2009

आज साईज़ बडा है...कई चिट्ठों को पढा है, (चिट्ठी चर्चा)



मुझे लग ही रहा था कि...कल वाली चर्चा को देख कर सब कहेंगे..झाजी ने लगता है ...टीपने के साथ साथ पढना भी कम कर दिया है...मगर यकीन मानिये...दोनों में से ही कोइ बात नहीं है...आप कभी नहीं मानते न मेरा...लिजीये...आज ही बानगी पेश है...और जल्दी ही प्रमाण पत्र भी दिखाऊंगा..चलिये फ़िलहाल तो पाकेट साईज़ से बढ कर थली साईज़ चर्चा का मज़ा लिजीये...


हिंदी के भक्त अनेक , कितनों ने धरे कितने रूप,



जब भूख लगे तो बस गाना गा, हो के मन में रत,



भैया, इत्ता ही समझ आया, है कुछ न कुछ लोचा,



एक मुख्यमंत्री कुछ अलग सा है नाम है उसका रमन,



देखिये कैसे छुट्टी में क्या करते हैं हीरो लोग,



उफ़्फ़ बेवफ़ी होकर भी ख्यालों से जाती नहीं,



आप भी स्नेह स्वरूप, टीप कर आशीष दिजीये...



क्या गिला किया जाये , अपने मासूम यार का,



आप रह नहीं पायेंगे, टीपे बगैर, पोस्ट पढने के बाद..



सीढीयों वाले कमरे से पढिये पिता पुत्र कथा,




फ़ाईव स्टार होटल का इन्हें अनुभव हुआ अनोखा,




आप पढिये या ट्रेन पर चढिये, मगर बोलिये टेण-टेणेण



जिन हस्तियों को इतिहास ने अपने भीतर छुपाया,




अब क्या कहूं कि कैसे नहीं थे...




पोस्ट का शीर्षक , छोटा कमरा, बडी खिडकियां,



हौकी को मार गयी, रोल मौडल की कमी...



इस उपलब्धि पर आपको ढेरों बधाई हो सरकार....




बस इससे आगे की दास्तां, आप खुदही पढ लो यार...


अपनी बातों में , क्या क्या कह जाती...


हंसना हो तो इस पोस्ट का मजा लिजीये..




अरे इतना पढ कर खो गये किन विचारों में,




चलिये आज इतना ही......अब न कहियेगा कि हम पढते नहीं हैं.......

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

सब आपकी खातिर है, लो जी चर्चा हाज़िर है..(चिट्ठी चर्चा )


ये जानकर , देखकर, और पढकर ....बहुत ही अच्छा लगा कि हिंदी दिवस को इस बार कम से कम हिंदी ब्लोग जगत ने तो खूब जम कर मनाया....हर दूसरी पोस्ट ..हिंदी पर ही थी...और मेरा मानना है कि ..हिंदी न तो कभी कमज़ोर थी....न है...और न ही होगी....इसलिये ..पूरे मनोयोग से इसकी सेवा करते रहें ..सब अपने स्तर से ..अपने तरीके से ...मंज़िल मिल ही जायेगी..फ़िलहाल तो आप चर्चा देखिये....


कभी दाल तो कभी मुर्गी है पिछडती......


जिसने छुआ ये आसमान , उसके दिल के निकट रहा..


उसे मिलेंगी, पुस्तकें अनमोल, जो लायेगा, ज्यादा नंबर....


फ़िर चाहे बांकी उम्र, पतियों को पडे रोना..



पढ जाईये, जो तैयार हैं पोस्ट में, डूबने को, बहने को....


जो भी निकला परिणाम, ब्लोगवाणी से किया अनुरोध..


फ़टाफ़ट पहुंचे वे, जो हंसने को तैयार है,


मेरे इस अनोखे ब्लोग पर आप भी नज़र मारिये भाई..



मौज लेने वालों को गाली सुनने को रहना चाहिये तैयार..


ब्लोग्गिंग में हमेशा, ब्लोग टिप्स के साथ चलिये,



इस वीर बहुटी के जादू से कौन है बच पाया...


नहीं समझे तो खुद ही पढिये, आप ये निबंध..



आज बस इस छुटकी मोटकी चर्चा से काम चलाईये.....कल सारी कसर पूरी करेंगे...

सोमवार, 14 सितंबर 2009

नहीं जी ,अभी नहीं हुआ जोश ठंडा, पिछले की रपट, अगले का एजेंडा(सम्मेलन रपट)


जिस ब्लोग्गर सम्मेलन की घोषणा हुई बारंबार,
दिल्ली न सही, फ़रीदाबाद सही, हो गयी आखिरकार,

कुछ कवि तैयार थे, ब्लोग्गर्स भी हो गये तैयार,


जुटे कौन कौन, क्या आपने अब तक नहीं है जांचा,


फ़ोटुयें सारी देख ली न, अब मारिये यहां नज़र,


ब्लोग, ब्लोग्गर, ब्लोग्गिंग , में कैसा सबका है विश्वास,


ब्लोग्गर्स मीट के बारे में, यहां कुछ कह रहे इरशाद,


चलिये इत्ती सारी रिपोर्टें तो आपने पढ डाली झटपट,



मगर खींची थी सबने नैंनो से, जिसकी लिंक नहीं बन पाई...


ये तो थी रपट पिछले की अब अगले का जानिये एजेंडा,
जल्दी ही मिलना है फ़िर, जोश न पडे ये ठंडा..


इस बार के सम्मेलन का बस एक ही होगा फ़ंडा,
हर तरफ़ ब्लोग्गिंग की बातें,, ब्लोग्गिंग का ही झंडा,


अपना परिचय, और कैसे पहुंचे ब्लोग्गिंग में, पहले होगी बात,
फ़िर जानेंगे इस ब्लोग्गिंग से क्या पाते हैं आप....?


ब्लोग्गिंग की दशा और दिशा पर भी करेंगे फ़िर विचार,
अपनी अपनी शिकायत-सुझाव , आप रखें तैयार,


सब कहेंगे , सब सुनेंगे, हो कर समय के पाबंद,
इसके बाद पेट के चूहों की चिंता, न हों फ़िक्रमंद...


फ़ोटो-शोटो, भी ली जायेंगी, करेंगे इक डायरेक्ट्री सी तैयार,
सबका परिचय,पता, और नंबर, छपेगा, जिनको होगा स्वीकार,


मीडिया मित्रों को भेजेंगे न्योता, कहेंगे उनको आने को,
आग्रह होगा ,देखें छापें, इसे जन जन तक पहंचाने को...


अविनाश भाई के आदेश पर ये चर्चा है तैयार हुई...
जब तक आप पढेंगे इसको, तब तक करता हूं,चर्चा तैयार नई.....(नियमित वाली)....





बुधवार, 9 सितंबर 2009

ना गुट की, ना दोस्त की, चर्चा सिर्फ़, और सिर्फ़ पोस्ट की..


मुझे पता था कि देर सवेर ये आरोप तो चर्चा करने वाले पर लगना ही था ...कि आप सबको शामिल नहीं करते चर्चा में....सिर्फ़ कुछ खास लोगों को ही शामिल करते हैं...हम नये ब्लोग्गर्स का तो ख्याल ही नहीं रखते....

एक चर्चा कार के रूप में ..सोचा कि अपने मन की बात रख दूं.....होता ये है कि..जब चर्चा करने बैठता हूं...तो कहीं से भी ये विचार मन में नहीं आता कि आज फ़लाना ने क्या लिखा ....क्या उसे चर्चा में शामिल किया जाये...बस ब्लोगवाणी और चिट्ठाजगत को खोला ...और शुरू हो गये...पढने...और बनाने...चाहे वो पोस्ट..लपूझन्ना जी की हो ..या खुद प्रधान मंत्री जी की....यदि बढिया लगा ..मुझे नहीं जी ....और लोगों को भी....तो बस ..चर्चा ...और कौन कहता है कि चर्चा में शामिल होने से ही ..आपको पढा जाता है...कई बार खुद मुझ से अपने उडनतशतरी जी की पोस्ट ही रह जाती है..जबकि सबको पता है कि जिस दिन वो पोस्ट डालते हैं....उस दिन सबसे ज्यादा कौन पढा जाता है...

एक और बात मुझे नहीं लगता कि ...कोइ ऐसा गुट है..जिसकी सिर्फ़ इस वजह से गुट्बंदी है कि उसकी पोस्ट की चर्चा ..चिट्ठा चर्चा में होती रहे..बल्कि हकीकत तो ये है कि कई बार ..इस वजह से मित्र नाराज़ होते हैं...कि ....छोडिये.....अब आप तो आज की चर्चा देखिये..


औबजेक्शन नोटेड, आगे से रखा जायेगा ख्याल


नेह निमंत्रण भेज दिया, प्रियवर तुम्हें बुलाने को,


जिंदगी को कभी ऐसे भी जी के देखिये,


आज सुपुत्रों के माध्यम से क्या कह रहे हैम विवेक बाबा,



ऐसे कार्यक्रम देख के आप भी क्या किजीये,


यानि कि पोस्ट आप ठेलेंगे, और टीपेंगे आपके पोते...


आप भी देखिये, चेहरे पर कैसी खुशी आयी...


क्या आपने देखा है पुलिसिया लंगूर,



अपने ये मंत्री लोग अभी तो और करेंगे शर्मसार



ब्लोग पढिये , और जम के उस टीप दिजीये,.



तस्वीर घर में आज हुई अनोखी बात,


प्रशांत जी के एक महीने का हो गया हिसाब,


ब्लोग पोस्ट पढ ली तो ये अब देखिये , कौन कहां क्या टिपियाये हैं..



आज इस धडफ़डिया चर्चा से काम चलाईये...बकिया कल ...

मंगलवार, 8 सितंबर 2009

ब्लोग्गिंग कालजयी..चर्चा मंगलमयी (चिट्ठी चर्चा )


अब तो आप समझ ही चुके होंगे कि ..चिट्ठी चर्चा के साथ साथ ..चचा टिप्पू ने टिप्पणी चर्चा का आदेश भी सुना दिया है...यानि डबल डबल काम...मगर हमें क्या जी ...जब लगे रहना है तो लगे रहना है....तो बस अब आपके सामने लाते और आते रहेंगे ...

आप तो जी आज की चर्चा का मज़ा लिजीये...


दिल्ली की पास दूर वाले, सब अब हो जायें तैयार ..


टीपने -टिपाने का यहां बंट रहा है ज्ञान,

हम कहते हैं बिना पढे, आगे मत बढो....


वो जरूर पढें, जिन्होंने लिखा सौ से ज्यादा चिट्ठा (पोस्ट)


मगर है बहुत दमदार, खुद देख लो दोस्त,


गंगा के घाट बनी, पांडे जी की कुटिया,


शेर नहीं कहेंगे, फ़िर भी कहिये इरशाद,


आप भी किजीये,खुशदीप जी के साथ..


भविष्य की चिंता, प्रभु की इच्छा,



जगती है सूरज की मधुमक्खियां, जब ये देते हैं आवाज,



दिल अगर फ़ूल सा नहीं होता तो कैसा होता,


आज ना जाने कौन सी मंज़िल रहे तलाश....


ताऊ की शोले क्या चल रही टकाटक,



सबने कर दी वाह वाह, जो भी पढ के आया...


आईये देखियी अहसास का ये घर,


लल्लू मियां, चेतराम ,और राजनाथ भाजपा वाले,


शिक्षा का देखिये क्या है सूरते हाल...


कितनी गहरी बात इन्होंने कह दी श्रीमान


कुत्ते से क्या लेना , कुत्ते ने गर काटा,


मिलिये अब कुछ नये ब्लोग्स से.......................


आईये पढिये इनको,जो कह रहे , लिखो अपना विचार,
ब्लोग जगत में, आपका स्वागत है सरकार


अरे वाह अभी अभी मिला है नया ब्लोग ये कमाल,


अच्छा जी अब राम राम आज के लिये

शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

दो लाईनों का खेल है, चर्चा है या रेल है.(चिट्ठी चर्चा )



मुझ से किसी ने पूछा ....कि आपको हमेशा ही ब्लोग्स पढ के सिर्फ़ दो ही लाईनें ही क्यों सूझती हैं....आगे पीछे ..
कुछ नहीं....मैनें छूटते ही कहा....भैया अपनी काबिलियत सिर्फ़ दो लाईन तक ही है...दो लाईन को जोड जोड के चाहे जितनी लंबी ट्रेन बनवा लो....हम बना देंगे.....तो लिजीये...चढ जाईये आप भी इस रेल पर ......


हिंदी ब्लोग्गिंग की दुनिया नित हो रही आबाद,



शुकल जी के बाद इन्होंने भी कर दिया कमाल..



फ़ौरन जा कर देख ले जिसने अब तक नही है देखा..



आज नहीं चलेगा जी ये सब, आज मनेगा जश्न..



सबकी रोज़ सुनते हैं न , आज हमारी भी सुनते जाइये,



आप खुद ही झांकिये, उसने किसको डराया..



राज भाई का ये लेख , बता जाता है..



हिंदी में लिखना है, चिंता क्यों करते हो यार,



सार्थक है मुद्दा, भाग लिजीये आप भी, दे कर अपनी टीप



विनोद जी कहते हैं, अजी जो होते, तो मर जाते


अल्पना जी की पोस्ट ये, है बहुत ही खास


देखिये किन किन अंको को सता रहा है रोग


रावण और लाउडस्पीकर, क्या है ये माजरा,



आप खुद ही देखिये कमाल इस कलम का...



आपको पता चला कि नहीं, पप्पू हो गया पास...



जो भी जैसा भी हो , चेली को जरूर बताना..



साथ में, बजते हैं गाने, गुनगुना लिजीये..



अदा की हर अदा निराली, कभी पानी, कभी आग.


आईये अब कुछ नये लोगों से आपको मिलवाते हैं,
कौन कौन आया इस कुनबे में, चलिये देख के आते हैं.........



बहुत चख ली तीखी अब इस मीठी मिर्ची का बताईये स्वाद,
अरे इतनी जल्दी नहीं है, बताना , पोस्ट पढने के बाद..


देखते हैं अभी इसमें, कैसे खुलते हैं राज़



अच्छा जी अब आज के लिये राम राम....

बुधवार, 2 सितंबर 2009

कुछ पोस्टें हंसी, कुछ खेली, हमने भी फ़ट से चर्चा ठेली....(चिट्ठा चर्चा)


आज सोचा इस ब्लोग का थोडा सा कलेवर बदल दिया जाये...कुछ खास वजह नहीं...बस यूं ही..अरे लिजीये भई..अब कभी कभी यूं भी तो कुछ कर लेना चाहिये..पता नहीं ....किसे आनंद आ जाये..तो लिजीये.....आज की चिट्ठी चर्चा .....


खुशदीप जी भी समझ रहे हैं ब्लोग्गिंग का फ़ंडा,


कौन है ऐसा जिसने , डाक्टर साहब से नहीं सीखा,


जल्दी देखिये, किसको कितना मिला ईनाम,


आप भी जानिये, धीरू जी के साथ..


प्रणय संबंध, विग्यान और कुछ विचार,


आप भी टिप्प्णी, मगर पोस्ट पढ्ने के बाद..


आप खुद ही पढिये , आज किसकी कथा रहे हैं बांच..


उनके लिये फ़ैसला लेने का जिम्मा आपपे छोडा..


अजी शहरों में ही नहीं, गांव का भी बदल रहा है जमाना,


नयी नयी शादी में राजू हो गये परेशान,


अदभुत है पोस्ट और विषय का सेलक्शन,


वक्त एक सिगरेट है , जम के सुलगाइये,


अभी जा के पढ लें, बाद में न कहना, रह गयी..


स्वर्ण से दिन और रजत सी रातें,


चंद पंक्तिय़ो का , गज़ब है असर.......


हम तो मिले उनसे, हमको तो भा गये..


अजी गया जमाना , अब न समझें उनको बेचारियां...


चलिये अब करते हैं कुछ अलग सी बात,
आप भी किजीये, इन नये चिट्ठों से मुलाकात..


आप भी हो आईये, हम तो हो आये....


मनभावन ब्लोग देख, तर गये नयन...


मा साब तो थे ही, अब मास्टरनी-नामा



चलिये जी अब चला जाये....बस इतना ही कि आने वाले समय में...बहुत से परिवर्तन देखेंगे आप...

सोमवार, 31 अगस्त 2009

मंडे मुस्कान मंद मंद, चिट्ठी चर्चा छंद छंद


मुझे नहीं पता कि मैं..चर्चा में क्या करता हूं...कोई कहता है..तुकबंदी है..तो कोई कहता है छंदमयी है चर्चा..बस अपना तो एक ही फ़ंडा है...आपको पढ के जो भी मेरे मन में आता है....उसे दो पंक्तियों में समेट कर रख देता हूं...मुझे खुशी होती है..कि इसी बहाने इतने सारे ब्लोग्स को एक दम घुस कर पढ लेता हूं...वैसे पढ्ने के लिये मुझे बहाने की जरूरत नही है..मगर ये तो है ही.....और खुशी दोगुनी तब हो जाती है जब अविनाश भाई द्वारा दिये गये जादू के चिराग ...अजी लिंक बनाने का नुस्खा ...को पकड कर मैं आपको उन सब तक ले जाता हूं..आज एक और खास बात कहनी है आपसे...बहुत जल्दी ही मैं इस चर्चा में ......एक ही चर्चा में .. सौ पोस्ट को समेट कर सबसे लम्बी चर्चा आपके सामने रखने की कोशिश करुंगा...




आज ब्लोगजगत की सबसे प्यारी ये खबर ..
एलियन जी की सालगिरह , पर सबकी नज़र..


अरे आप खुद ही देखिये मैं क्या बता दूं..


सबने प्यार और फ़ूलों का गुलदस्ता भिजवाया...

अपना नुकसान करेगा , जो रहेगा इससे अकेला रह कर..


छुट्टी हो गयी है, किसकी कहां पर,


बेचैन हुआ ब्लोग्गर, पोस्ट लिखी फ़टाफ़ट...


फ़ार्मूला यदि रहे कारगर तो इनको जरूर बताना..


यहां रोटी के लाले, पट्ठा पिज़्ज़ा खा रहा है..


दसवीं सालगिरह पर ब्लोगस्पोट ने दिये क्या क्या उपहार,


तारीखों की कहानी की पोस्ट बडी ये मस्त..


क्या था सारा गोलमाल, आज समझ में आया..


आज मोरा मन कहता है, छूं लूं इनके पांव.


अरे आपने नहीं पढा, तो आप पढेंगे कब


ब्लोगजगत की अपनी पत्रिका है जनाब


बस ये नहीं पता चला कि , क्या मिली थी रामप्यारी.


फ़ुर्सत से पढने का, फ़ुर्सत से सोने का..


आज बहुते गंभीर होके कहते हैं फ़ुर्सतिया,





तो फ़िर आप घूमिये..इस दुनिया में..अजी आपकी ही है..

सर दर्द ने शाम से किया हुआ है परेशान,
आज इतने से ही काम चलाइये श्रीमान..

























































































रविवार, 30 अगस्त 2009

रविवार की छुट्टी, चर्चा मीठी-खटटी..(चिटठी-चर्चा)


पिछले कुछ दिन में जितना उथल पुथल वाला पोस्ट सब पढे ...कि का कहें....आ सच कहें तो कुछ भी नहीं कहने का मन करता है..बस ब्लोग्गिंग किजीये जी सब लोग ..जम के किजीये....बंकिया सब छोडिये....



सबसे पहले आज गया इस पोस्ट पर ध्यान,


विवेक भाई ने इस पोस्ट में जाने किसे क्या समझाया,


जब जब वर्मा जी की कलम यूं लहरायेगी,


एक विजेट लगाने से दिखती हैं २५ पोस्ट..

ब्लोग जगत का एक ळंठ, अद्भुत है अंदाज़,


चिंता काहे की है, वकील साहब हाज़िर हैं श्रीमान.


ना पढलअ ई पोस्ट कहां पर ह सूतल हो,


बिनावजह नहीं लिखे हैं, जन्मदिन का है चिंतन,


कौन नहीं जानना चाहेगा, जब बता रह खुद समय..

महक का पूरे बरसात में, मन हो गया खटटा...

अब तक संगीता जी ने कई भविष्यवाणीयों से चौंकाया,


चल रही गणेश पूजा, कहीं हो रहा खिलवाड,


प्रशांत जी ने इस पोस्ट में कुछ खास है बताया,


क्या देखा सुना , जादू, पानी के बरसने का,


खबरों के धंधेबाजों के लिये ये संदेश है,


छोडिये, टंटा-लफ़डा, सारा, अब किजीये, स्माईल..


लगा हुआ है कई, ब्लोग्गर्स का कार्नीवल..


पोस्ट को पढिये, टिप्पणियां ठेलिये..


आलोक बाबू की शैली , सच में जानदार है..


इसीलिये तो जनता दुखी, और दुखी हुआ ये देश,


आउर का का कह्ते है, खुदही पढ लो भाया..


आज सबको ये , यही तो हैं लगे बताने,


अरे दुखी काहे होते हैं, रहिये अगली को तैयार...


गिनीज़ बुक तक पहला ब्लोग पहुंच ये पाया..


चलिये जी..इससे जादे चर्चियायेंगे ..तो फ़िर आपका पूरा रविवार व्यस्त हो जायेगा ..और रविवार में परिवार भी तो है..उसका भी तो सोचिये..हम चलते हैं....अरे बाहर नही....जी एक ठो दूसरका पोस्ट भी ठेलना है आज के आज....


































गुरुवार, 27 अगस्त 2009

आज की चिट्ठी चर्चा



आज कुछ भी लिखने का मन नहीं कर रहा है..सो सीधे सीधे चर्चा पर आता हूँ..


ताउजी के परिचय नामा में,आज मेहमान हैं इक ख़ास,
वाचस्पति जी ज्ञानी हैं, नाम है अविनाश

आंखों की धार भी चुपचाप बहती है,


देर किस बात की है , भई, जल्दी किजीये..

बता रहे हैं, कहां आजकल इन दोनों का डेरा..

कुछ नहीं लिखने का था मन तो ,लिखा दनादन,

शाम का अंधेरा देखा होगा, अब शाम का देखिये उजाला,


शिक्षा के क्षेत्र में ये चली है कैसी हवा...


लो जी..आज अचानक एक घट्ना हो गयी सच्ची,


आपने नहीं पढा क्या, नाम है चोखेरबाली..


एयरटेल और डिश टीवी में क्या है आखिर अंतर,


इन्होंने जीता पुरुस्कार, आप तो मुंह मीठा किजीये,


भविश्यवाणी है ये , इस बार दिवाली में दिक्कत आयेगी,


आप भी जानिये, हिन्दी ब्लोग्गिंग में हम क्या कर रहे हैं,


वो कह्ते हैं, उन्हें मिली थी एक लडकी ,


खून की क्या हुई कीमत, पोस्ट पढ के ही जानी


रविश जी की कलम से आज कौन है छपिस,


तसवीरें देख के , हम तो गये सिहर

उनको आप समझाइये, इसलिये आप तक पहुंचाया है..


ऐसे ही शब्दों से अजित बाबु करा रहे पह्चान


आपकी इस लेखनी पर कुर्बान जन-जन..


आप तो खुद ही देखिये, मैं क्या कहूं, हज़रात...


हंसने हंसाने में ही तो है, जिंदगी का राज...



चलिये ..तो बस आज इतना ही...

सोमवार, 24 अगस्त 2009

संगीत ब्लोग्स का, बात उनके सुर साज की , लीजिये जी पेश है चिट्ठी चर्चा आज की

जी हाँ सच ही तो कहा है ...मेरे लिए तो सारे ब्लोग्स संगीत की तरह हो गए हैं...जिसे भी खोलता हूँ ..नयी धुन...नए बोल...नया सुर..नए साज...और नया गीत-संगीत....बिलकुल अलग अलग स्वाद, अलग अलग मिजाज..अलग अलग राग वाला ...खैर ...ये मेरी समस्या है ...की मुझे इसमें कभी संगीत..कभी साहित्य..कभी समाज..और कभी पता नहीं क्या क्या दिखता ही रहता है...आप तो आज की चिट्ठी चर्चा का मजा लीजिये ..

आप देखिये , इनका क्यूँ और कैसे मन कर रहा है कूदने का,
ऐसी धारा प्रवाह लेखनी , वक्त है पढने का, और डूबने का

चलते फिरते कबाड़खाने में पहुँच गयी आज कनुप्रिया,
आप खुद ही देखिये , किसने किसको याद किया

ताऊ की मंडे मैगजीन का अपना इक स्थान,
इसीलिए इतने कम समय में ही बन गयी पहचान

लावण्यम पूछे अंतर्मन से कित्ते हमारे साल हुए,
गणपति बाप्पा को समर्पित पोस्ट पढ़ कर हम निहाल हुए

भारत में त्यूहारों का है लोक जीवन से सम्बन्ध,
इस विषय पर आज पढिये अनवरत में निबंध

इंटरनेट पर हिंदी, मिथक और यथार्थ,
कैसा किया विस्फोट, आपने हे पार्थ

कैसी है सच्चाई , कैसी है ये कहानी,
देह की भूख के आगे , सब कुछ बेमानी

कह रहे हैं डाक्टर बाबू सबका समझाए के ,
उड़ जाना नहीं, सबके होश उडाये के

फाटक चंद और झंडू लाल घूमने गए भोपाल,
सुन्दर चित्रों से सजी हुई पोस्ट बनी कमाल.

कौन जाने कौन क्या कह जाए कब,
महुआ कहे आज अपनी उदासियों का सबब

मेलं मेल की धक्कम पेल , ऐसी बढ़ी तकरार,
इसका भी इलाज लेके फिरसे आया ब्लॉग बुखार

आज जन्मदिन है पी डी के लड्डू गोपाल का,
सबको चल गया पता, लल्ला हो गया इक साल का

कहती हैं भावना , अब ठीक हो गयी बिटिया रानी,
बाँकी की पोस्ट आगे अभी और है आनी

वाया अविनाश भाई, पप्पू सबको बुला रहा ,
व्यंग्य लिखो , इनाम पाओ, सबको यही बता रहा

आज मिली सूचना , दुबले भी हैं दौड़ते,
जो नहीं हैं दुबले , वो उनपे पोस्ट हैं लिखते

हे भगवान् अब मत भेजना किसी भी जिन्ना को ,
देखिये कितना टेंशन हो गयी, बेरोजगार मुन्ना को

सिगरेट और संगीत से सज गया आज मयखाना ,
पीओ पढो या सुनो , जो मन आये कर आना

जन्मदिन है आज अदा का, वही अदा दिखाती रही,
कह रही है आज अदा, अदा खुद से ही बतियाती रही

फिर से एक बार वो हो चीज जो वो है,
क़माल की है ये , जो है सो है


चलिए रात बहुत हो चुकी है ..इसलिए आज की चर्चा पर विराम लगाते हैं..बहुत समय से सोच रहा हूँ की ..जो नया इस चर्चा के लिए सोच रखा था ..उसे प्रयोग में लाऊं...मगर शायद अभी वक्त मुझे उतना वक्त नहीं दे रहा है ...चलिए आगे सही..

शनिवार, 22 अगस्त 2009

जय हो गणपति बप्पा की, देखिये किसकी चर्चा की

साल का ये आधा भाग ..कम से कम भारत में तो बहुत ही खुशियों भरा रहता है ...या कहें की त्योहारों का / उत्सवों का ...रोशनी का , मिठाइयों का ..अजी क्या क्या कहें ..और किस किस का मौसम होता है ....और मौसम खुशगवार होने की तैयारी कर रहा होता है ..तो बस शुरू कीजिये आप भी ..तैयारी ..गणपति पूजा की, दुर्गा पूजा की..दिवाली की ..सबकी........शुभकामना ....

चलिए फिलहाल तो चर्चा का मजा लीजिये ....

सिगरेट के साहित्य (विल्स कार्ड ) ,के बाद, अब बीडी ब्रेक का मजा लीजिये ,
अजी मारिये गोली आपत्ति को , आप तो यूँ ही लिखा कीजिये

कहती है स्वप्निल , इस बार , उसके घर भी आयेंगे गणेशा ,
हमारी शुभकामना , सुख समृद्धि भी आये साथ हमेशा ..

सुना है आजकल प्रोपर्टी की रेट हो रहे हैं हौट,
फिर भी अविनाश भाई कहते , कहाँ पे लूं मैं प्लौट

राज भाई का आनन फानन में भारत आना हुआ ,
हुए अस्वस्थ , तो फिक्रमंद ये ज़माना हुआ


सफ़ेद घर में आज ऐसी हरी भरी एक पोस्ट है गयी लगाई,
पढ़ के , देख के , जाने किस किस को घर की याद आयी

लंठ महाचर्चा में , अब आ गए हैं बित्तन बाबा ,
गिरिजेश जी की अद्भुत शैली, अद्भुत आभा

ये कहते हैं , कमीने न नेचुरल हैं न ही इमानदार ,
कमाल है , कमीने भी ऐसे क्या होते हैं यार

परसाई जी को याद करके , शरद भाई ने कमाल का संस्मरण है पढ़वाया ,
जिस जिस ने चखा इसको , कभी मछली का, कभी फिश करी का स्वाद आया

पढ़ा , देखा , सुना कि, बिहार से खाने की इक थाली है आयी,
इस पोस्ट ने माँ की फिर से याद है दिलाई

कमीने देखने जाना था , फिर भी अलोक जी ने चर्चा कर दी चिट्ठों की,
आप खुद ही देखिये , चर्चा हुई है कित्तों की

ताऊ जी की पहेली का उत्तर देने का अब समय हुआ ख़तम ,
जय गणपति बप्पा की , इस बार समझ गए हम


ऐड्स दूर करने के लिए मंत्रों का हो गया आविष्कार,
वाह वाह कलयुग में अद्भुत ये चमत्कार

नेता निकलते सड़क पर , सड़कें होती बंद ,
राजतंत्र में आज यही मुद्दा हुआ कलमबंद

संगीता जी ने मंजू दीदी के बहाने , ये किसका दर्द उठाया ,
आप खुद ही देखिये , कौन कौन पढ़ -टीप के आया

विश्व स्वस्थ्य संगठन के खिलाफ यहाँ हुआ विरोध ,
होम्प्योपैथी के खिलाफ क्यूँ करे कोई प्रतिरोध

बारिश से बेहाल हुए , निकल गया सारा दम ,
इरफान भाई की तुलिका में फंस गया दिल्ली नगर निगम

आसान नहीं होती , राख में मुस्कान की तलाश ,
गौर से पढियेगा, पंक्तियाँ है बहुत ख़ास

इंसान के भीतर इक कुत्ता छुपा होता है ,
जानिए वो कैसे कैसे बड़ा होता है

वो पूछ रहे हैं , कहाँ चली गयी देश की दाल ,
हम क्या कहें जी , खाए हो गए कितने साल

मिसर जी गए घूमने , पहुँच गए बाजार,
कैमरा भी साथ था , धाँसू पोस्ट हुई तैयार


इस पोस्ट का , शीर्षक है , जयचंद , जिन्ना और जसवंत ,
इसी के साथ अब इस चर्चा कर , करते हैं हम अंत



तो मित्रों/बंधू ..आज की चर्चा हुई ख़तम,
कल रविवार की चर्चा के साथ फिर से हाज़िर होंगे हम

रविवार, 16 अगस्त 2009

कहीं जारी बहस ,कहीं पर द्वंद , आप तो पढिये , चर्चा के ये छंद

हलाँकि शुरू से एक जो बात नियमित रूप से ब्लॉग्गिंग में दिख रही है ...वो है कोई न कोई विवाद ....और वाद विवाद तो एक स्वस्थ और जागरूक समाज की निशानी है .....मगर विवाद भी स्वस्थ और स्पष्ट अर्थों में हो तो सार्थक होता है....इतने बड़े परिवार में मतान्तर होना स्वाभाविक है ...और जरूरी भी...मगर उद्देश्य हमेशा यही होना चाहिए की ...उससे किसी का भला हो न हो ...कम से कम बुरा नहीं हो ...और दूसरी बात जो इन दिनों बहुत ज्यादा देखने में आ रही है ..वो हिंदी ब्लॉग्गिंग पर ..खुद हिंदी ब्लोग्गेर्स के द्वारा ही ..लगातार प्रश्नचिन्ह लगाना ....बात गंभीर है ..और दुखद ये है की प्रवृत्ति बनती जा रही है .....खैर ...इस विषय पर तो मैं अपने दुसरे ब्लॉग पर विस्तार से लिखने का प्रयास करूँगा ..फिलहाल तो आप आज की चिट्ठाचर्चा का आनंद लीजिये ..

यहाँ दिल्ली में पिछले तीन दिनों की लगातार बारिश ने मौसम में थोड़ी सी ठंडक ला दी है ..जबकि ब्लॉग जगत आज काफी गर्मागर्म लग रहा है ...देखिये .....


राज भाई कहते हैं , बस अच्छा लिखते जाओ यार,
टिपण्णी मिले बिलकुल कम , या मिले बेशुमार

विनय पत्रिका में साहित्य पर कुछ है कहा गया,
हमसे तो बिना पढ़े , बिलकुल भी न रहा गया

प्रवीण जी को उनकी बात का, दिया संगीता जी ने जवाब ,
ये पूछ कर कि ,क्यूँ की गयी उनकी छवि खराब

ब्लॉग बुखार से परेशान हैं, बिलकुल मत घबराइये,
अपने चिट्ठे का मुफ्त हेल्थ चेकअप , यहाँ पर करवाइए

ब्लॉग्गिंग में हो रही गाली गलौज का क्या हुआ परिणाम ,
रोमन में की टिपण्णी , हो गया काम तमाम

कोई कहता है बादशाह, कोई कहें हमें डॉन,
अमरीकीयों ने फिर भी पूछा ,आप हैं कौन

इंसानों के पढ़ लिए अब पढिये किस्से भूत के,
हाय क्या लिखा है जालिम, दिल ले गए लूट के

स्वप्न लोक में घुमते हुए , पहुंचे कहाँ से कहाँ ,
जाओ जहां मर्जी चाहे, मगर रहो हमेशा यहाँ

डाकखाने ने अपने सचिन से पूछे हैं कुछ सवाल ,
अरे क्रिकेट के नहीं, पोस्ट के, कैसा हुआ कमाल

प्रधानमंत्री के भाषण में ,न्यायव्यवस्था पर कुछ कहा गया,
देखिये तीसरे खंभे पर , इस बारे में क्या लिखा गया

राजीव भाई को हंसते हंसते , सबने इतना प्यार दिया,
आज उनके ब्लॉग पोस्ट ने सौ का आंकडा पार किया

डाक्टर साहब ने जाकिर साहब को क्या खूब है समझाया,
धर्म और आस्था का अब मतलब समझ में आया

ताऊ जी की पहेली अबकी जीते सुशील कुमार .
मेरिट लिस्ट आ गया जी अबकी नाम हमार

पांच पंक्तियाँ लिख के ये चुप्पी किसने ओढी ,
आप पढ़ के देखिये , ये चुप्पी किसने तोडी

चलती रहे ये जिन्दगी, अलविदा मत कहा करो,
नहीं कहेंगे जी, कभी, आप यूँ ही लिखा करो

लविज़ा की मम्मी को कैसा अनोखा आईडिया आया,
आपम खुद ही देखिये, उसने कैसे इनदेपेंदेंस डे मनाया


आज की चर्चा ..यहीं पर समाप्त करते हैं ...

शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

जय कन्हैया लाल की, पोस्टें हैं कमाल की (चिट्ठी चर्चा )

आप सबको जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई और मुबारकबाद ...इस अवसर पर ना जाने क्यूँ बस एक बात मष्तिष्क में घूम रही है...हम हर साल इन पर्व त्योहारों को तो खूब धूम धाम से मनाते हैं ..कृष्ण को, उनके हर रूप को ....सबको याद करते हैं, उनकी पूजा अर्चना करते हैं ....मगर कृष्ण जीवन की ..कृष्ण के गीता उपदेश की ..गीता के दर्शन की ..याद शायद ही कभी याद आती हो ...खैर ...

आज की चर्चा का लुत्फ़ लीजिये .....


न पढिये , न पसंद कीजिये , और न ही टिपियाइये ,
जन्माष्टमी पर प्रभु के दर्शन कर के आइये

रुकने को किसने कहा , आगे बढ़ते जाइए,
दर्शन तो हो गए, अब कृष्ण लीला , नोश फरमाइए

सबने अपना समय आज इसी में खर्चा है,
चहुँ और नंदलाल की ही तो चर्चा है..

या तो कृष्ण हैं छाये आज , या छाई हुई तकरार ,
आप निकाले खुद ही, रही सार्थक , या हुई बेकार


तिरंगे के कोड को लेकर कुछ ऐसे उठा विवाद,
आप खुद ही देखिये , क्या हुआ इसके बाद

इधर चल रहा वाद विवाद , उधर पकड़ में आया चोर,
पकडो ,पकडो ,माफी मंगवाओ , सब और यही था शोर.

कुछ यादें, कुछ लहरें, उनकी गिनती , मैं और तुम ,
आप भी पढिये मन से , अपने होश कीजिये गुम

ताऊ की पिक्चर का रिलीज हुआ पहला एपिसोड
गब्बर ने ठाकुर से मांग कर गन कर लिया लोड

इक रोमांटिक सी जर्नी , जिसे कहते हैं सफ़र
अनिल भाई की कलम में देखिये कितना है असर

क्यूँ इधर उधर इतना रहे हैं भटक ,
देखिये इस पोस्ट में माँ की रोटियों की महक

ब्लॉगजगत का नन्हा ब्लॉगर , कभी बैठता नहीं बेकार,
आज कर दिया एक बार फिर से टेलीफोन का आविष्कार

वो कह रहे हैं , उसे इल्म नहीं मेरे फोन काल का,
आप खुद ही पढिये , क्या लिखा है , कमाल का ,

इस ब्लॉग के लेखक हैं शब्दों के खिलाडी ,
आज जानिए क्या होता है जोड़तोड़ ,किसे कहते हैं जुगाड़ी

शुकल जी अभी अभी ,अपने इश्टाईल में चर्चियाये हैं,
आप भी देखिये, किस किस को लटकाए हैं ...

एक साबुन से हुई इन्हें अटैचमेंट कितनी इमोशनल ,
एकदम निजी अनुभव हैं, नहीं है प्रोफेशनल

आजादी की संध्या पर स्वतन्त्रता संघर्ष में महिलाओं की भूमिका जानिए,
इनके लिखे का माना है लोहा , पढिये , और आप भी मानिए

पोस्ट ये समर्पित है, वतन के रखवालों को,
शत शत नमन , आजादी के मतवालों को

का का तो कह दिए ,पांडे जी, बुजुर्गियत के बहाने से ,
कौन नहीं दीवाना हुआ , उनके इस फ़साने से

वो कुछ भी कह दें , उसमें होती है कुछ बात ,
आज फिर पहुँची है वो, उसी अदा के साथ

इस देश में न जाने कैसी बन रही परिपाटी ,
निर्दोष पर ही पुलिस भी भांज रही है लाठी


मिसर जी ने भी स्वाईन फ्लू को समर्पित की एक पोस्ट ,
कह रहे ई ससुरे मेहमान का,मौसमवा है जी होस्ट


चलिए आज के लिए इतना ही ..आजादी की सालगिरह पर आप सबको बधाई ...

बुधवार, 12 अगस्त 2009

चिट्ठी चर्चा वाली , हमने फिरसे डाली

देश में स्वाइन फ्लू का कहर फैलता जा रहा है....स्कूल , कॉलेज ,सिनेमा, दफ्तर ..सब बंद किये जा रहे हैं...बस एक बात समझ में नहीं आती की ...जब कुछ समय पहले से ही इसकी प्रसार और आक्रमण की खबरें थी तो ..सरकार , स्वास्थ्याजागत ,,,क्यूँ नहीं ...पहले से एहतियात बरत कर ..इसके लिए खुद और जनमानस को तैयार कर सकी....जो भी हो अब तो इश्वर से एक ही प्रार्थना है की ..जल्दी ही ये हालत काबू में आ जाएँ ....

आज की चर्चा आपके लिए पेश है ....


निंदा की जाए चीन की , या दिया जाए धन्वाद ,
इसका फैसला कीजिये , ये पोस्ट पढने के बाद

इन तरही गज़लों को पढिये , आँखें तर कीजिये,
पसंद आयें तो टिप्प्न्नी से पोस्ट को भर दीजिये

शब्दावली में आज अर्थ जानिए अभिवादन का,
दोगुना हो जाएगा , भाषा के रसास्वादन का

तोफा बन गया सोफा , किसको हुआ कबूल ,
पढिये -हंसिये, जो हँसना गए हैं भूल

ब्लॉगजगत की पहली पिक्चर हो रही है रिलीज
ताऊ जी की शोले का टिकट अभी से ले लीजिये प्लीज

वंडरफुल लाईफ है , दुनिया हुई निगोड़ी ,
डाक्टर साहब अपने अंदाज में जो न कह जाएं थोडी

बिना पढ़े ही कैसे पसंद मिली, मनीषा ने किया सवाल
अलबेला जी की साफगोई ने , फिर से किया कमाल

छोटे विवेक जी आज है जनम दिन, आशीष दीजिये,
स्वप्नलोक के नौनिहालों से आप भी मिलिए

इनकी नींद को कौन उड़ा के ले गए ,
सुंदर सी पोस्ट में वे , सबको, बहा के ले गए

थोडा सा ज्ञान पाइए , थोडा सा मनोरंजन ,
आ रहा गूगल का नया सर्च इंजन ..

राष्ट्रकवि और हिंदी के ठाठ देखिये ,
अमर बाबु ने लगाई कैसी वाट देखिये..

शब्दशिखर में वन्देमातरम और मुस्लिम समाज है,
रोज की तरह , फिर से इक सार्थक पोस्ट आज है

क्या है लड़की , मीनू जी बता रही हैं,
समाज को सच का आईना दिखा रही हैं

फटाफट पहुँचिये , आप भी लीजिये इनको पहचान ,
अरे नकदी की भी व्यवस्था है ,इनाम में श्रीमान

कंप्यूटर शब्दावली को बतलाता ब्लॉग ये अनोखा ,
क्यूँ नहीं पहुंचे अब तक , किसने है रोका

कुश भाई ने चर्चा करके नाम रख दिया चर्चु,
बधाई हो कुश मिया, सुना आप बन गए चाचू

हमने पूछा आदि से , और क्या कर रहे हो भाई,
अले अंकल आप भी देखो , खिलोने की कैसी बैंड बजाई

स्वाइन फ्लू की खबर से मनोज जी बोले बाप रे बाप,
इसके अलावा क्या क्या कहा , खुद पढ़ लीजिये आप..

दो बातें एहसास की तन्हाई में कीजिये
मैं ज्यादा क्या कहूँ , आप ही पढ़ लीजिये

अच्छा जी ...राम राम...अपना और अपनों का इस फ्लू के कहर में ध्यान रखिये ....

मंगलवार, 11 अगस्त 2009

चिट्ठाचर्चा में जो हुआ ये अन्तराल, नेट कनेक्शन ने किया था बेहाल

जी हाँ ,...इरादा तो यही था ..की जब वापसी करेंगे....इस चिट्ठे पर चर्चा की तो कोशिश करेंगे की ..जल्दी से अन्तराल ना आये...और होता भी ऐसा ..मगर हमारे इस इरादे की खबर ..कमबख्त हमारे नेट कनेक्शन वाले को नहीं थी शायद..मुआ लगा नखरे दिखाने ..जब देखो ..डिस्कनेक्टेड...एक दिन दो दिन...एक ब्लॉगर को दो दिनों तक ..ब्लोगों को लिखने-पढने, टीपने जैसे मौलिक अरे नहीं नैटिक अधिकार ..अरे नेट से जुड़े अधिकार भाई .....से वंचित रहे तो काहे का पंद्रह अगस्त जी..हमने भी ..आखिरकार ..उसे फाईनल अल्टीमेटम दे ही दिया..साथ ही ताकीद कर दी की बेटा आज के आज यदि ..हमारा समबन्ध ब्लॉगजगत से स्थापित नहीं हुआ ..तो .उनसे तो कल को हो ही जाएगा ..मगर तुमसे न होगा..जान लो...खैर जैसे तैसे ...गाडी पटरी पर आ गयी....तो लीजिये हाजिर है ..हमारे अंदाज वाली चिट्ठी चर्चा ...

अभी हाल ही में पी डी बाबु गए घूमने पटना,
कैसे बना दोस्त पत्रकार , पढिये अद्भुत घटना

यदि ब्लॉग्गिंग की किसी भी समस्या से आप हैं परेशान,
इस क्लीनिक में हर रोग का होता है निदान

इस पोस्ट को पढ़ के आप हो जायेंगे हैरान,
अरहर की जीवनी का अद्भुत किया बखान

एक साल पूरे हुए इनके ...कैसे आये मन में भाव ...
किलो भर बधाई दें , ..टिप्प्न्नी एक पाव

अखबारों में हिंदी का मालिक भगवान् है...
नीचे वालों की हरकत से पाठक परेशान है ..

भाटिया जी को मातृशोक हुआ , दुःख बड़ा है भारी,
मुझे भी याद आ गयी ,अपनी माता प्यारी

सोसायटी को नहीं है दिक्कत ,,हाशमी को मिला मकान ,
बात से कैसे बनती है बतंगड़ ..आप लीजिये जान

आलसी के चिट्ठे पर बाऊ कथा है जारी ..
गिरिजेश जी की शैली , साहित्य जगत पर भारी

शुकल जी ने चर्चा कर दी, कहते हैं जैसी तैसी .
हमसे पूछिए तो हमें चाहिए रोज चर्चा ऐसी

नीतिश कुमार भी कट्टा निकले , नहीं तोप का गोला ,
ये तो उसका सच है भाई, मैंने कुछ नहीं बोला ...

राखी सावंत की पंचवर्षीय योजना का यहाँ पढिये संवाद ,
हाय राखी तूने कर दिया , किस किस को बर्बाद

पूछ रहे हैं मोहन जी मन से , अंधा प्यार है या इंसान,
हम तो दोनों श्रेणी में आ गए, क्या उत्तर दें श्रीमान

मुन्ना भाई, पिक्चर नहीं जी. इस पोस्ट का मजा लीजिये..
अरे हुजूर कभी कभी तो आप भी हँसा कीजिये

इसको पढिये , ये मत सोचिये , सिर्फ दो हजार का किस्सा है ,
आज न जाने कितने लोगों के यही जीवन का हिस्सा है

आज अदा ने लिखा कैसी सौलिड पोस्ट रे बाप,
क्या भाषा , क्या शैली , खुद देखिये आप....

सुना है किसान भी ब्लॉग लिखने लगे हैं,
अजी लिखने क्या , वे तो छपने लगे हैं

पंद्रह अगस्त के मौके पर बेरोजगार ने एक अनोखी पोस्ट कर दी पेश,
गुस्से में कहते हैं ..ये हाल रहा तो , इक दिन भाड़ में जाएगा देश




अच्छा जी अब ख़त्म करें बहुत हुई अब रात ....
इतना वादा करते हैं , अब रोज रहेंगे साथ ......

शनिवार, 8 अगस्त 2009

चलो जी ,ये हफ्ता भी हो गया ख़तम ,,चिट्ठी चर्चा लेकर फिर से आ गए हम.

मेरा हमेशा ही मानना है कि..किसी भी बात को देखने के दो नजरिये होते हैं..एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक...ऐसा हो सकता है कि हमेशा ही ऐसा न होता हो..मगर अधिकांशतः तो होता ही है..और कुछ लोगों को न जाने क्यूँ ..सिर्फ नकारात्मक नज़रिया ही पसंद है..जब देखो तब एक ही रवैय्या..हो सकता है कि इस बार सामने वाला कुछ और ही कहना चाहता हो..या कि आप पहले से ही मान के चलते हैं कि ..नहीं जी ये तो वही बात है ..जैसा हम सोच रहे हैं..और एक पल को यदि मान भी लिया जाए कि सचमुच ही गलत है...तो उसके विरोध के भी कई रास्ते हैं...हर वक्त हाथों में पत्थर लेकर बैठे रहना..कहाँ की इंसानियत है...मुझे लगता है कभी कभी ..मेरे लिए तो अक्सर ही फूलों से भी बात बन जाया करती है...और पत्थर भी फेंकना हो तो रेशम में लपेट लें ...देखिये कितना गहरा असर होता है...न जाने किस बात से प्रेरित होकर ये सब कह गया.

आप तो चिट्ठीचार्चा का मजा लीजिये

ब्लॉग बुखार नापने को इक नया थर्मामीटर आया,
इस अद्भुत ब्लॉग से,पाबला जी ने , फिर से लोहा मनवाया ...

सायकल चलानी की प्रथा बेशक कम हो रही आज,
बाल संसार में खुल गया सायकल का सब राज

स्त्री विमर्श में आज की बागी लड़कियों की दास्तान..
नहीं पढ़ा , तो क्या पढा....आपने श्रीमान...

ना नेकी बची , न बचा है कुँआ, दोनों हुए ख़तम,
विवेक भाई की पोस्ट से सम्मझ गए जी हम..

पंद्रह अगस्त नजदीक है, मुर्गियों का गणतंत्र देखिये,
आप भी ऐसे ही साईन बोर्ड लगा कर अपना माल बेचिए

बुलडोज़र पहुंचा घर गिराने महिला पत्रकार का,
नया तमाशा देखिये बहन जी की सरकार का

ताऊ की पहेली ने फिर सबको है घुमाया,
और उनकी रामप्यारी ने बस में है बैठाया,
दो दो बार हिंट दिए कोई काम न आया,
मैंने खुद कई बार गूगल बाबा को दौडाया

अदा की अदाकारी का फिर देखिये चमत्कार,
मुहावरों के प्रयोग से कर दी अद्भुत पोस्ट तैयार

भागिए जल्दी जल्दी , स्वाइन फ्लू है आया...
बचने-फंसने पर क्या खूब कार्टून है बनाया

आप भी अपने बीच के इन ब्लॉगर को पहचानिये,
अजी कैश इनाम की घोषणा है ,ये भी तो जानिए,,

तीसरा खम्भा पर छपा आज एक अनोखा ही विवाद है
दहेज़ लेना ही नहीं , दहेज़ देना भी अपराध है ..

वर्मा जी ने फिर लेखनी से किये हैं तीखे वार ..
कहते हैं ,उम्मीद से भी आधे हुए हैं बलात्कार ,

शुकल जी ने आज इक टुईयाँ सी चर्चा दी है बांच
झूम झूम के चर्चा में शकीरा रही है नाच

खेलगढ़ ने पोस्टों की तीसरी सेंचुरी है जमाई.
देर किस बात की दे दीजिये बधाई

आप खुद ही जानिए असली अर्थ हाथ मिलाने,
ये अच्छा मौका है, पढने और टिपियाने का

राम जी ने इस पोस्ट में पंक्तियाँ उकेरी ख़ास हैं..
जितनी बार पढिये , मिटती नहीं ये प्यास है

इन्होने अपनी डायरी के पन्नो से इक पोस्ट निकाली प्यारी,
वो तब कहते थे , हम अब , आ गयी देखो बरसात की बारी

सफ़र ठीक कटेगा पक्का , यदि साथी हो सवारी,
पत्नी के भरोसे ही , चलती रहे ये गाडी

कह रही हैं डाक्टर पूजा जी, ढल गयी इक और शाम,
आप भी पढ़ लीजिये ,दिल को मिले आराम


ये साजिश है कुछ और है ,,आप खुद कीजिये तय ,
जाइए जल्दी दूर कीजिये , इनके मन का भय ...

पोस्ट को पढिये , चिंतन -मनन को आँखें कीजिये बंद,
निर्मल जी की लेखनी का खूब लीजिये आनंद

डंके की चोट पर गूगल का इन्होने कर दिया है त्याग .
चिंगारी है सुलग उठी, अभी और फैलेगी आग..

अच्छा जी राम राम..सन्डे की सनसनाती चर्चा के साथ कल मिलते हैं...

मंगलवार, 4 अगस्त 2009

मंगल भवन अमंगल हारी , हे ब्लॉगर चर्चा हुई तिहारी

कुछ मौसम हमारे यहाँ कभी नहीं बदले ..मसलन बरसात ..मेरी स्मृति में आज तक कोई ऐसी बरसात नहीं गयी जब देश के किसी कोने में..... कहीं न कहीं बाढ़ ना आयी हो....अब ये मौसम की दृढ़ता है ..या हम मनुष्यों की धृष्ट ता ...ये तो स्वयं इश्वर ही जाने..बरसात का जिक्र नहीं बदलने वाले मौसमों में इसलिए किया है क्यूंकि सर्दी और गर्मी को तो अब बहुत बदलते हुए देख रहा हूँ..खासकर जब से दिवाली में गर्मी के कारण शर्ट भी भारी लग रही थी..खैर..जिस तरह कुछ मौसम कभी नहीं बदले ..उसी तरह ..अपने देश में कुछ त्य्हारों का स्वरुप भी कभी नहीं बदला ..और मुझे यकीन है की ...ये बदलेगा भी नहीं..जैसे की रक्षाबंधन ..आप सबको ..इस पवित्र दिवस पर ..इस अटूट बंधन की बहुत बहुत शुभकामना...मुझे इस दिन अपनी स्वर्गवासी दीदी की बहुत याद आती है ..और अब भी इस दिन ..पूरे दिन में कभी न कभी ..रो तो पड़ता ही हूँ...कल मेरी बिटिया भी अपने भैया को राखी बांधेगी जो उसकी पहली राखी होगी ..एक बार फिर आप सबको बधाई और शुभकामना ..अब चर्चा करते हैं ..


चिट्ठाचर्चा आज विवेक जी के रंगी हुई रंग ,
क्या कीजिये यदि विवाह के दिन टूट जाए पलंग

स्वयंवर के तुंरत बाद , ब्लॉगजगत में राखी का पहला साक्षात्कार
शेफाली जी ने लिया है ,,ख़ास आपके लिए ही सरकार...

जाने कौन कौन से दर्द समेटे फुर्सत से इत्ता लिखा होगा,
आप भी देख लीजिये , जिसने छेड़ा होगा, वो पिटा होगा

पांडे जी आज खुलमखुल्ला , अपना एड्रेस कर दिए पोस्ट ,
आप में है हिम्मत , तो जरा उनके घर पहुँच दिखाओ दोस्त


हंसते हंसते एक हॉकर ने सच्ची बात है बतलाई,
अविनाश भाई के शब्दों की देख ली गहराई

पिता हुए अवकाशप्राप्त , पुत्र ने दिया सम्मान ,
पिता पुत्र प्रेम से सजी ये पोस्ट पढिये श्रीमान

किशोर दा को याद करती अनोखी ये पोस्ट है आयी
उनको समर्पित करके राजीव जी ने है लगाई

अलबेला जी की अलबेला अंदाज सब होते हैं हैरान ,
इस पोस्ट में देखिये , कैसे खुदा , बन सकता इंसान

शास्त्री जी ने हायकू लिखा ,क्या सुर है क्या लय,
हायकू है , क्षणिकाएं, या त्रिवेणी , सब कर रहे हैं तय

राखी के स्वयंवर का अगला एपिसोड है दिखाया,
इसी बहाने इस मुद्दे का तगडा बैंड बजाया


ये नन्ही सी गुडिया देखिये कहाँ घूम कर आयी,
अपनी यात्रा की , लाविज़ा ने सुन्दर पोस्ट लगाई.

शादी के लिए जरूरी नहीं है कुण्डली को मिलाना ,
बस आपको आता हो , सबके लिए खाना पकाना

उनकी ये लेखनी दिल को लुभाने लगी है ,
वो कहते हैं गजलें थपकी दे सुलाने लगी हैं

संजय जी पूछ रहे ..टैक्स काहे हो भरते ,
पढ़ कर यही लगा ,,सब हैं गलती करते

ये कह रहे हैं ब्लॉग्गिंग से लाखों -करोडों कमाइए ,
जो कमा रहे हैं , हमारा हिस्सा भी दिलवाइये

दस पंक्तियों में अद्भुत रिश्तों की परिभाषा ,
पसंद ये पोस्ट आयेगी , हमको है ये आशा


जानिए श्यामल जी क्या है आकांक्षा ,
पढिये-टिपिये , आपसे यही है अपेक्षा


इनकी गुजारिश है इनकी पीठ को दिवार ना बनाया जाए
इसलिए जो भी लिखना है, पोस्ट पर ही टिपियाया जाये


इरफान जी आज फिर ये गजब का कार्टून बनाया,
छोडा बैंड जनरल ने , तबला है बजाया ..

जो इस पोस्ट की चर्चा दोबारा न की तो ये चर्चा रहेगी अधूरी ,
विवेक भाई ने सुबह वाली चर्चा अब कर दी है पूरी

चलिए आज के लिए इतना ही ..कल अपनी बहनो और अपने भाइयों के साथ प्यार/स्नेह/ बांटिये ......
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