बात नहीं ये बडी पुरानी ,
सुनिए जरा सब ज्ञानी ध्यानी ,
मणि रत्नम ने बुनी कहानी ,
राम सीता रावण की बानी
राम जी ने जाने इक दिन कैसी ठानी ,
सीता जी की दुविधा पहचानी ,
और दुविधा देख सिया की ,
जतन से लिखी इक पोस्ट सयानी ,
अब दिल थाम के सुने हर प्राणी ,
अटक गई उसी पर ब्लोगवाणी ,
हाय ऐसी बदली तब सबकी बानी ,
सब ब्लोग्गर्स की याद आई नानी ॥
हर ब्लोग्गर हाय हुआ दिवाना ,
और हर पोस्ट हो गई दिवानी ,
चलो माना कि कुछ गर्मी थी पहले ,
मगर अब आया बरसात और आया पानी ,
कब तक दुविधा में अटकी रहोगी ,
अब तो वापस आओ महारानी ॥