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गुरुवार, 31 जनवरी 2008

ये ब्लोग्गिंग हो रही है या बिहारिंग ( बिहार सिंड्रोम par एक चर्चा)

इस ब्लॉगजगत में भी मुझे लगता है कि कोई ना कोई भूकंप,सूनामी, और चक्रवात आता रहता है या फिर कहूँ कि सक्रियता बनाए रखने के लिए लाया जाता रहता है। इन दिनों एक तरफ बर्ड फ़्लू की चर्चा है तो दूसरी तरफ बिहार सिंड्रोम की। मुझे दोनो के बारे में ही नहीं पता पर सुना है कि बीमारी है। चलिए बर्ड फ़्लू के मुर्गे तो खूब लड़ा लिए अब ज़रा इस बिहार सिंड्रोम की बात हो जाये।

अजी चर्चा है कि इस चर्चा से पूरा मोहल्ला गरमाया हुआ है। लो कल्लो बात, अम भैया पेहले ही इतनी चर्चा है , बिहार की, बिहारियों की, और यहाँ तक की बिहारीपन की भी। सड़क से सरका तक, जम्मू से जालंधर तक, और दिल्ली से दरभंगा तक, सब जगह तो चर्चा है ही इसकी। कहीं प्रशंशा में, कहीं आलोचना में कहीं, फबतियों में, कहीं गालियों में तो कहीं द्वेष में। और ये हो सकता है इक इधर ये चर्चा थोडी जोरों पर है , थोडी ज्यादा है दूसरों की अपेक्षा । मगर फिर ये भी तो सच है की हम बिहारियों की संख्या भी तो ज्यादा है।

मेरी समझ में ये नहीं आता कि आकहिर इसे हौवा क्यों बनाया जा रहा है? आप ही बताइये राजधानी में , किसी भी नगर या महानगर में, तरकारी बेचते, रिक्शा चल्ताते, रेहडी लगाते, और पान के खोमचे लगाते ज्यादातर लोग कौन हैं। और ये भी बताइये कि इस देश की राजनीति में , सरकार में, सर्विस में , मंत्री हों, बुरोक्रट्स हों, स्कोलर हों , पत्रकार हों या कुछ भी हों उमें भी बिहारियों की संख्या बहुत ज्यादा ही मिलेगी।

छोडिये जी बहस बहुत लम्बी चलेगी। अन्तिम सच ये है कि बिहारी तो आगे बढ़ रहे हैं, बदल रहे हैं, पर बिहार आज भी बीमार है और इसके लिए हम सबको कुछ ना कुछ करना होगा।सिर्फ राज्यों के बंटवारे, फिल्मों के निर्माण, भाषाओं को अनुसूची में शामिल कराने से परिवर्तन नहीं आयेगा। और हाँ इस ब्लॉगजगत पर इसकी रस्साकशी से भी कुछ बड़ा हासिल होगा ऐसा मुझे नहीं लगता मगर बिहारी होने के नाते यदि कुछ ना कहता तो लानत है मुझ पर।

आपका अपना,
बिहारी उर देहाती बाबू

रविवार, 20 जनवरी 2008

अबे पगला गए हो का ?

आज भोर भोर फिर ओही खबर्वा देख के त सच पूछिए त दिमग्वा सनक गया। आज फेर कहीं पर कूनो लोग कुछ विदेशी में लोगन के साथ जबरदस्ती किये थे। साला पिछला पता नहीं काटना दिन से खाले एही बात सुनते पढ़ते आ रहे हैं। अमुक जगह पर कौनो किसी महिला के साथ बदमाशी किया तो कौनो जगह पर कौनो लुछा किसी विदेह्सी युवती के साथ बत्मीजी किया है। अबे तुम लोग पगला गए हो का? रे ई ओही देश हैं ना जाऊँ कभी अपना मेहमान लोग को देवी देवता कहता मानता था।

भैया बाबु लोग ई त हमहू देख रहे हैं कि आज का नसल आ फसल दुनु एकदम गद्बदायल है मुदा ई हमको गुमान नहीं था के सब इतना नीचे गिर गया है कि जाऊँ बेचारा सब पता नहीं केतना सुन्दर कल्पना और सपना ले के आता है अपना देश के बारे में ऊ सबके परिवार के साथ इहाँ ई सब हो सकता है। khair ऊ लोग सब जो ई सब kar रहा ऊ सब तो हमरे ख्याल से पशु निशाचर बन गया है इसलिए ऊ लोग ई बात का मतबल नहीं बुझायेगा, मुदा हरेमरे समझ में ई नहीं आता है कि ई अपना पुलिस आ सरकार प्रशाशन सब का बुका आ बहिरा के जैसन चुपचाप तमाशा देख रहा है । काहे नहीं पकड के ठोकता है ई लतखोर सबको।

इहाँ शायद ई बात का कौनो को अंदाजा नहीं है कि ई सब करके ऊ लोग उन लोगन की खातिर कतना बड़ा मुसीबत खडा कर रहा है जाऊँ लोग अपने इहाँ से काम धंधा के वास्ते बेचारा सब बाहर बह्तक रहा है । ई सबका परिणाम देर सबेर ऊ सब बेचारा लोग को भुगतना ही पडेगा ना। आ सबसे बढ़कर का इज्ज़त आ छवि रह जायेगी आपना देश आ लोगन की पूरा संसार में। रे भैया लोग अभियो तनी शर्म कर हो .

बुधवार, 16 जनवरी 2008

बाबू kanshiram ko भारत ratn to bahan मायावती को nobel kyon नहीं ?

अभिये अभिये पता चला है बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक स्वर्गवास बाबू कांशीराम को भारत रत्न देने कि माँग की जा रही है भैया । त ई में कौन बुरी बात है भिया आज काल त जमनवा ही माँग आ आपूर्ति का है चाहे अधिकार हो कि पुरूस्कार पहले प्यार से मांगो फेर धमकी दये दो आ उसके भी बाद भी ससुर नंबर नहीं आवत है टू खूब हल्ला मचाओ , कहो ई पुरूस्कार का तौहीन है सरकार का बदमाशी है । खैर ई सब टू अपना इहाँ अब एगो स्थापित परम्परा बन गया है , मुदा ई सब के बीच आज हमरे उत्तम दिमाग में एगो नायका ख्याल आ रहा है आ ई भी देखिए काटना उपयुक्त समय पर आया है , अभिये अभिये त बहिन जी का भारी भरकम जनम दिन मनाया गया है । त ई समझिए कि बहिन जी को हमरे तरफ से ई बल डे का गिफ्ट शिफ्ट हो गया।

हमरा विचार है कि जब बाबू कांशीराम को भारत रत्न दिया जा रहा है टू कहे नहीं इसी सुअवसर पर बहन जी को नोबेल पुरूस्कार के लिए नामित कर दिया जावे। आरे चिहुन्किये नहीं इसके पीछे बहुत सारा ठोस रेजन्वा है भाई। पहले बात जब दस्यु सुंदरी फूलन देवी को लोग सब नोबेल पुरूस्कार ऊ भी शांति का नोबेल पुरूस्कार के लिए नामानकर कर दिया था, आ कर का दिया था ऊ त बेचारी का देहांत हो गया न त झुंझला के नोबेल समिति वाला सब दे ही देता एक दिन, त ऐसन में बहन जी को कहे नहीं विज्ञान आ तकनीक के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित कर देल जाये । हाँ समझ गए आप पूछेगे की ई विज्ञान आ तकनीक की कतेग्री में कहे त भैया ई आप लोगन शायद भूल रहे हैं कि "सोशल एन्ज़ीनीरिंग " का फार्मुल्वा कौन इजाद किहिस है ई अपनी बहन जी ही ना।

ओइसे त आप लोग चाहे कुछ भी समझिए देर सवेर बहन जी को उनका चुनाव चिन्ह हाथी के माध्यम से पशु प्रेम को बढावा देने के लिए भी कौनो न कौनो जीव संरक्षण का पुरूस्कार भी मिलबे करेगा।

भैया हम सब त देती आ भैया लोग त बहन जी के साथ हैं , आप कहिये ?

शनिवार, 12 जनवरी 2008

जान गए बकनर आ bensan का matbal

लोटन जब भी कूनो मोश्किल में पड़ता है सीधा हमरे पास चल आता है ओकरा पूरा विश्वास है कि ओकर जुनो कोइ समम्स्या हो चाहे कौनो प्राब्लेम हो ओकर जबाब हमरे पास जरूर होगा काहे से कि एक त हम बहुत लिखते पढ़ते रहता हूँ आउउर ऊपर से कम्पूटर आ इंटरनेट पर भी जाता रहता हूँ। हमारा इन्तेल्लिगेंत्वा देखिए कि हमका भी सचमुच ऊ सब जबाब आता ही रहता है .खैर ।

ऊ दिन लोटन आते ही पूछा कि भैया ई अपना क्रिकेट टीमवा फेर से एगो आउउर मैच हार गया , भैया हमरे त ई नहीं समझ आता है कि जब ई सब बाहर जा कर ससुर हारे जाता है तो काहे नहीं सब के सब मैच यहीं पर खेलता है , सबको बुलाओ खूब खिलाओ ,पिलाओ, खातिर दारी करो और सारा मैच में हरा के भेज दो । मुदा ई बार त सुने हैं कि ई वाला मत्च्वा सब बेचारा कुछ कहते हैं कि "बकनर " आ बेन्सन के कारण हारा है , । भैया ई का है ई बकनर आ बेन्सन।?

हम थोडी देर गंभीर चिंतन किये आ फिर पूरा मनन के पश्चात् लोटन को विस्तार से बताये ," देख रे लोतानमा जहाँ तक हमका मालूम है, जैसे कि बकलोल होता है जैसे कि बकवास होता है ओएसे ही इतना त निश्चित है कि जैसे बक लगा हुआ सब चीज़ एकदम बेकार होता है ओइसे ही बकनर भी जरूर कोनो बेकार चीज़ , अच्छा अच्छा , बक नर यानी बेकार नर रे अभियो नहीं समझा बेकार पुरुष बल्कि अब तो हमरे लग रहा है कि बक वानर होगा । वैसे भी भज्जी केकरो बन्दर या वानर कह रहा था , शायद केकरो आउउर को था मुदा लगता है की ई बक्नारो को बुरा लग गया था। समझा।

आ भैया ऊ दूसरा बला " बेन्सन "

अरे ऊ त कुछ नहीं है , जैसे पढ़ने लिखने , नाकुरी चाकरी, जिन्दगी, प्यार, सबमें कूनो तरह का पीराब्लेम को टेंसन कहते हैं ना ओइसे ही क्रिकेट में यदि कौनू तरह का पीराब्लेम होता है तो ऊ बेन्सन कहलाता है । तू तो खाली बुरबक ही रहेगा रे हमरे तरह बनो।
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