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गुरुवार, 8 मार्च 2012

चिन्हिए तो ...हम भी हैं क्या






ई प्रागैतिहासिक काल में जब हम होली मनाया करते थे ..तबका एक ठो छवि चित्र संग्रहालय में से छांट के जब तब हम अईसे अवसर पर इहां साट देते हैं ..चिन्हिए तो ..हम भी हैं क्या

7 टिप्‍पणियां:

  1. सबसे आगे वाले को कौन नहीं पहचानेगा.

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  2. जी हाँ ,आप तो सामने ही बैठे हैं ...
    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  3. सबसे आगे तो बैठे हैं ... कौन नहीं पहचानेगा ??????? होली की शुभकामनायें

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  4. आप दिख गये, दायें बिराजे हैं, रंगे पूरा..

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  5. बहुत जोर लग रहे हो बिटवा । :)
    होली की शुभकामनायें ।

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  6. पता नहीं कौन से भय्या... पर यह दाई ओर खूब सारा पाउडर मल कर जो बैठा है, वोह कुछ जाना पहचाना लग रहा है.. खैर....



    होली मुबारक हो!

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  7. दांयी और तो आप ही अल्युमोनियम पैंट लगा कर बैठे दिख रहे हैं ... होली की शुभकामनाएं

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पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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