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शनिवार, 24 अप्रैल 2021

बागवानी के लिए जरूरी बातें -बागवानी मन्त्र


 

#बागवानीमन्त्र :
आज बागवानी से जुड़ी कुछ साधारण मगर जरुरी बातें करेंगे।  

बागवानी बहुत से मायनों में इंसाओं के लिए हितकर है , बल्कि बाध्यकारी भी है।  प्रकृति के साथ सहजीवन और सामंजस्य के लिए सबसे सरल साधन बागवानी ही है।  दायरा देखिए कि इंसान बाग़ बगीचे उगाएं इसके लिए प्रकृति कभी इंसाओं की मोहताज़ नहीं रही है उसे कुदरत ने ये नियामत खूब बख्शी हुई है।  तय हमें आपको करना है कि हम कितना और क्या क्या कर सकते हैं।  



बागवानी घर , बाहर जमीन पर भी छत पर भी और बालकनी में भी।  बच्चे से लेकर बूढ़े तक और धनाढ्य परिवार से लेकर साधारण व्यक्ति तक कोई भी , कभी भी कर सकता है।  शौक के रूप में शुरू की गई बागवानी इंसान के लिए तआव ख़त्म करने का एक बेहतरीन विकल्प होने के कारण जल्दी ही आदत और व्यवहार में बदल जाती है।  बागवानी शुरू करने के सबसे आसान तरीकों में से एक ये की माली से गमले सहित अपेक्षाकृत आसान और सख्तजान पौधों से शुरआत करना बेहतर होता है जैसे -गुलाब , तुलसी , एलोवेरा , गलोय।  


बागवानी के लिए मिट्टी , बीज , पौधे , मौसम पानी इन सभी बिंदुओं पर थोड़ा थोड़ा सीखते समझते रहना जरूरी होता है।  मसलन पौधों में पानी देना तक एक कला है ,विज्ञान है और उसकी कमी बेशी से भी बागवानी पर भारी असर पड़  सकता है।  बागवानी विशेषकर अपने क्षेत्र (मेरा आशय मैदानी ,पहाड़ी या रेतीली ) को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले वहां के स्थानीय , आसानी से उपलब्ध और उगने लगने वाले पौधों को लेकर शुरुआत करना श्रेयस्कर  रहता है।  मसलन -राजस्थान में बोगनवेलिया और महाराष्ट्र में अंगूर , बिहार में आम अमरूद , उत्तर प्रदेश में गेंदा गुलाब आदि।  

बागवानी की इच्छा रखने मगर समयाभाव के कारण नहीं कर सकने वालों को पाम म क्रोटन , एलोवेरा , कैक्टस आदि और इनडोर पौधों से शुरुआत करना बेहतर रहता है क्यूंकि अपेक्षाकृत बहुत काम श्रम व् समय माँगते हैं  ये पौधे।  लम्बे समय तक हरियाली बनाए रखते हैं तथा बाहु के लिए बेहद लाभकारी होते हैं।  खिड़की व बालकनी में बागवानी करने के लिए बेलदार पौधों का भरपूर उपयोग करना बेहतर विकल है क्यूंकि इससे उनकी जड़ छाया में और बेल धूप  हवा में रह कर अच्छा विकास कर पाती है -जैसे मधुमालती ,अपराजिता आदि।  

बागवानी में सिद्धहस्त होने तक पौधे उगाने लगाने से बचते हुए पहले से विकसित पौधों की देखभाल , खाद पानी डालना , काटना छांटना निराई गुड़ाई आदि धीरे धीरे सीख कर फिर खुद उगाने लगाने की शुरुआत करनी चाहिए।  यदि फिर भी खुद करने का मन कर ही रहा है तो फिर घरेलु बागवानी के लिए धनिया ा, पालक , मेथी आदि जैसे बिलकुल सहज  साग सब्जी से शुरू करना ठीक रहता है।  





बागवानी में सबसे जरूरी होता है धैर्य और सबसे बड़ा सुख आता है अपने बोए बीज को अंकुरित ,पुष्पित -पल्ल्वित होते हुए देखना।  मिटटी के अनुकूल होने से लेकर पौधे के फूल फल आने की आहात तक एक खूसबूरत सफर जैसा होता है।  बागवानी धीरे धीरे मिटटी , पानी , बनस्पति , हवा , पक्षी और सुबह शाम तक से सबका परिचय करवाने का एक खूसबूरत माध्यम है।  

नए पौधों को लगाने , उगाने और स्थानांतरित करने का सबसे उपयुक्त समय शाम का होता है।  गमलों के पौधों की जड़ों में पानी देना सुरक्षित रहता है और कई बार शीर्ष पर या कलियों , फूल आदि पर पानी पड़ने /डालने से नुकसानदायक हो जाता है।  बागवानी में सबसे ज्यादा अनदेखी हो जाती है जड़ों की निराई गुड़ाई।  जबकि वास्तविकता ये है की ,जड़ों की मिट्टी को ऊपर नीचे करके , निराई गुड़ाई नियमित पानी डालने से ही आप बागवानी का आधा और जरूरी दायित्व निभा लेते हैं।  



शुक्रवार, 1 मई 2020

बागवानी के लिए जरूरी हैं गमले





आज बात करते हैं गमलों की।
बागवानी विशेषकर शहरों में जहां आपको छत पर ,बालकनी में ,सीढ़ियों में और खिड़की पर जैसी जगह ही बड़ी मुश्किल से मयस्सर होती है वहां गमलों में बागवानी ही एकमात्र विकल्प बचता है इसलिए ऐसी शहरी बागवानी में गमलों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
गमलों का आकार प्रकार सिर्फ सिर्फ उसमें लगाए जाने वाले पौधे पर निर्भर करता है। छोटी जड़ वाले पौधे के लिए छोटे और माध्यम आकार के गमले चल सकते हैं किन्तु जिन पौधों की जड़ों को फैलाव की जरूरत होती है उनके लिए निश्चित रूप से माध्यम आकार के गमले ही चाहिए।
यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि मैंने बड़े छोटे पौधे नहीं कहा है बल्कि कहा है बड़ी जड़ वाले और छोटी जड़ वाले पौधे। मसलन गुलाब के पौधे बड़े होते हैं मगर जड़ छोटी इसलिए छोटे छोटे गमले में भी उग सकते हैं इसके उलट गेंदे फूल छोटे होते हैं मगर रेशेदार जड़ों को फैलाव अधिक चाहिए इसलिए यदि उन्हें आप छोटे गमले में लगा भी दें तो या तो फूल आएंगे ही नहीं या फिर फूल आकर में छोटे आएँगे।
फूलों के गमलों का आकर तो थोड़ा बहुत छोटा बड़ा फिर भी चल सकता है किन्तु फल सब्जी आदि के लिए मध्यम और बड़े आकर का गमला ही जरूरी है नहीं तो फल का आकार छोटा रह जाएगा हमेशा।
गमले मिट्टी के ,प्लास्टिक के ,लकड़ी के और ग्रो बैग भी हो सकते हैं। गमलों का चयन उन्हें रखने जाने वाले स्थान पर भी निर्भर करता है। बस ध्यान ये रखना होता है कि सभी गमलों में पानी की निकासी के लिए निर्धारित छिद्र बना हुआ हो ताकि उसमें पानी न जमा रहे और पौधों की जड़ें अधिक पानी से सड़ न जाएँ।
साग पात धनिया पुदीना मेथी पालक आदि जैसे सब्जियों के लिए चौड़े और कम गहरे गमले का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जबकि मिर्च नीम्बू संतरे चीकू अमरूद केले अनार आदि के लिए बड़े और गहरे गमले का प्रयोग उचित रहता है।
गमलों में मिट्टी कभी भी ऊपर से एक दो इंच या तीन इंच तक भी से नीचे ही रहनी चाहिए ताकि पानी डालने के बाद जड़ों तक पहुँच कर सोखने के लिए पर्याप्त पानी व समय मिल सके।
शुरुआत में बागवानी करने वालों को ,बोतलों ,ज़ार ,मग आदि को गमलों में परिवर्तित करके बागवानी में रोमांच के प्रयोग से बचना चाहिए। जब बागवानी में सिद्ध हस्त हो जाएं तो फिर चाहे वे अपनी हथेली पर भी गुलाब उगा लें।
गमलों को मौसम में गरमी सर्दी के अनुसार उनका स्थान भी बदलना जरूरी होता है। इससे एक तो पौधों को अनुकून वातावरण मिल जाएगा दूसरे अधिक समय तक एक स्थान पर पड़े रहने के कारण छत बालकनी आदि में उनसे पड़ने वाले निशान से भी बचा जा सकता है। गमलों के नीचे प्लेट रखना भी इन निशानों से बचाने का एक विकल्प होता है।
किसी भी गमले की उम्र कम से कम चार वर्ष तो रहती ही है बशर्ते कि आपसे भूलवश वो गिर कर टूट न जाए।
आज के लिए इतना ही , आप चाहें तो अपने प्रश्न यहाँ पूछ सकते हैं
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