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शनिवार, 8 जुलाई 2017

मन खुद का मस्त रहने दो .....



बहती नदी के संग तू बहता जा ,
मन तू अपने मन की कहता जा ,
न रोक किसी को ,न टोक किसी को,
थोडा वो झेल रहे ,थोडा तू भी सहता जा ..

वर्तमान में सोशल नेट्वर्किंग साईट्स पर ,उपस्थति बनाए रखने , किसी भी वाद विवाद में पड़ने , तर्क कुतर्क के फेर में समय खराब करने से बहुत बेहतर यही है , कि हम आप जिस भी विषय अपर लिखें , वैसे , जैसा कि मित्र और तकनीक गुरु पाबला जी अक्सर कहा करते थे कि , धर्म और राजनीति दो ऐसे विषय हैं जिनपर वे लिखना कभी नहीं पसंद करते , इन दोनों ही विषय का यूं तो हमेशा से ही विमर्श में विवाद का लाजिमी होना जैसा है , किन्तु वर्तमान में तो स्थति इतनी विकट हो चुकी है कि लगता है मानो



राजनीति के तेजाबी छीटें , अवाम की ओढी केंचुली ,बखूबी उतार रहे हैं |


और इसका एक परिणाम ये हो रहा है कि ,सभी जहर उगल रहे हैं ,सभी , हो सकता है जाने अनजाने हम भी | कथ्यों और कथनों के अर्थ और अनर्थ दोनों ही इतनी तीव्र गति से तर्क कुतर्क के सहारे , भ्रामक जानकारियों और अफवाहों के रथ पर सवार होकर सिर्फ कुछ ही क्षणों में , सब कुछ तहस नहस करके विनाश का तांडव शुरू हो जाता है | उदाहरण तलाशने के लिए ज्यादा दूर और देर तक देखने की ज़हमत नहीं उठानी पड़ेगी | तो फिर ,कहीं से ऐसे में मन के भीतर से ही एक आवाज़ आकर कहती है


दुनिया करे सिर्फ फुटौव्वल तो , उसको पस्त रहने दो ,
अपनी दुनिया में रमे रहो , मन खुद का मस्त रहने दो .....

11 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (10-07-2017) को "एक देश एक टैक्स" (चर्चा अंक-2662) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    उत्तर
    1. आपका आभार और शुक्रिया शास्त्री जी

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  2. बहुत सही कहा झा जी आपने.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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    उत्तर
    1. प्रतिक्रया के लिए आपका आभार ताऊ जी , राम राम | स्नेह बनाए रखियेगा

      हटाएं
  3. आपके अनुसार रहने की ही कोशिश रहती है ! पर , मनवा पागल.....

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    उत्तर
    1. हम भी कहाँ रह पाते हैं सर ..| शुक्रिया सर , स्नेह बनाए रखिएगा |

      हटाएं
  4. निया करे सिर्फ फुटौव्वल तो , उसको पस्त रहने दो ,
    अपनी दुनिया में रमे रहो , मन खुद का मस्त रहने दो .....
    सच है जिसका मन मस्त हो उसी की ये पूरी दुनिया समझो

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  5. जागेंगे नहीं तो जागने लायक रहेंगे भी नहीं.

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  6. बिलकुल ... मस्त रहो .. जो मन चाहे करो ... पर जागते रहो ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. हम भी राजनीति से दूर रहते हैं, पोस्ट के मामले में भी. नौकरी भी अनुमति नहीं देती.

    उत्तर देंहटाएं

पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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