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शनिवार, 24 अक्तूबर 2009

कुछ जाने पहचाने, कुछ अनजाने : चिट्ठों को हम लगे सजाने (चिट्ठी चर्चा )

जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि कुछ न कुछ नये प्रयोग तो होते ही रहने चाहिये...फ़िलहाल तो इलाहाबाद में हो रहे ब्लोग्गर सम्मेलन की धूम मची हुई है पूरे ब्लोगजगत में और क्यों न हो इतने सारे फ़ुरसतिये, निठल्ले, ब्लागियों का संगम हो गया है । मैं तो रपटें पढ पढ के और सबकी फ़ोटुएं देख देख ही यहां से सबको अर्घ्य दे रहा हूं। बहुत अच्छा लगता है जब चारों तरफ़ खुशी का माहौल होता है ...इश्वर करे यूं ही ये कारवां चलता रहे । आज के चर्चा देखिये.....


चर्चा की एक चर्चे से ही शुरूआत हो,
इससे अच्छी भला और क्या बात हो।


कभी कभी नई पोस्टों को भी छानिये॥


कोई हर्ज़ नहीं है जी, एक पैग लगाने में ॥



इनका दिल तो प्यार का मारा है दोस्तों,



शब्दों से सजी कविता की सुंदर तस्वीर है॥



जिंदगी में आती हैं कैसी कैसी मुसीबतें ॥


बडा कठिन है भाई , सर्वश्रेष्ठ होना ॥



देख लिये न तो अपनी टिपिया ठेलिये॥



ताऊ की पहेलियों की अनोखी है बात,



यही पता नहीं, कौन अपने , कौन बेगाने हैं॥


अविनाश भाई का पप्पू भी है बडा ही अलबेला ,



प्लीज जेल के सीन को सेंसर न करो,



यदि सबने कर ली कोशिश ऐसी, तो आ जाएगी बाढ॥



ललित जी ने ब्लोग्गिंग की एक नयी खोली है दुकान,




क्या आप जानते हैं बेनामी संपत्ति का राज,




सुंदर पंक्तियां, खूबसूरत चित्र, और इक सुंदर पोस्ट,



छठ पूजा की परंपरा , और जानिये उसका इतिहास,



सम्मेलन पर तो बहुत सारी पढ ली आपने रपटें,



आज इससे ही काम चलाईये ..कल फ़िर ठेलते हैं तनिक बडकी वाली


26 टिप्‍पणियां:

  1. आज तो मैने सबको पहले से ही पढ लिया है .. शायद इसलिए आपकी चर्चा छोटी लगी .. वैसे इतनी ही मेहनत कहां कर पाते हैं हम .. बहुत मेहनत करते हैं आप !!

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  2. झा जी,
    चर्चा पे चर्चा सजाते चलो,
    ब्लॉगरों की गंगा बहाते चलो...

    (इलाहाबाद वाली भी...)

    जय हिंद...

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  3. जी संगीता जी ..चर्चा छोटी इसलिये लगी ..क्योंकि है ही छोटी....कल सारी कसर पूरी कर दूंगा ..धन्यवाद।

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  4. छोटी सी चर्चा!
    देखन में छोटी लगे… करे गंभीर

    बी एस पाबला

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  5. छोटी है मगर सटीक है महाराज...

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  6. पाबला जी से सहमत !
    झा जी लगे रहे !

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  7. चर्चा चाहे छोटी ही सही लेकिन बढिया रही.....

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  8. वाह झा साहब सब चर्चा करे लेकिन आपके मुकाबले नहीं हो सकती ...धन्यवाद सबको एक ले में प्रस्तुत करने की

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  9. चिट्ठाचर्चा में बड़ा दम था...

    दूध,चीनी,पत्ती ज़्यादा
    पानी थोड़ा कम था

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  10. हम सोचत हैं कि हमहि जागत है
    ईहां तो देखि तो सबहि जागत है
    चिट्ठा चर्चा बहुतै बढिया बन रही
    गागर मा सागर नित समावत है

    जय हो झा जी,

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  11. अजय भाई आप नहीं गए थे क्या बिलागर सम्मलेन में ? सूना है बड़ी मजा आयी है

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  12. जनाब छोटी भले है लेकिन है भरपूर चर्चा

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  13. अरे ! धन मिरचाई चर्चा सजाये हैं
    और सबको पानी पिलाए हैं
    देखिये न सब सी.. सी.. चिल्लाएँ हैं...

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  14. अभी तो साली इलाहाबाद वाली साली ही सर से उतर नहीं रही !

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  15. चर्चा छोटी हुई तो क्या है तो दमदार :)

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  16. झा जी ...रोचक अंदाज़ में रोचक चर्चा .

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  17. चिट्ठाजगत को ऐसी ही चर्चा की जरूरत है। बहुत सुंदर!

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  18. बढि़या चर्चा
    लाईन लाईन ही सही चर्चा तो बनी

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  19. अरे आप की चर्चा में आये तो पता चला कि कुछ महत्वपूर्ण चिट्ठे छूट गये थे, अब पढ़ लिये गये हैं, आखिर चर्चा का काम भी तो यही है न।

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  20. बह रही है टिप्‍पणियों की गंगा

    पोस्‍टें देखकर सारी मन हो गया चंगा

    रंगा खुश।

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  21. सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर
    देखन मे छोते लगे घाव करें गंभीर

    अति सुंदर.

    रामराम.

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  22. भूल सुधार :

    छोते = छोटे

    पढा जाये.

    रामराम.

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  23. एक साथ मिल जाते लिंक्स
    लगता नहीं कुछ इसका दाम,
    अच्छे चिट्ठों की चर्चा करना
    यही तो जी! झा जी का काम।

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  24. बहुत सुंदर चर्चा लगी आज तो निकल ही गई थी हाथ से,

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  25. अरे वाह.. मस्ती भरा अंदाज़... एकदम जुदा.....

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पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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