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शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

चचा टीपों को रहे समेट, हम पोस्टों को रहे लपेट (चिट्ठी चर्चा, दो लाईना )


गजबे गजबे कमाल हो रहा है...चचा आज वापस आके धमाकेदार टीप चर्चा लगा दिये....बीच में पता नहीं कौन कहां सपना देख देख के फ़ुसफ़ुसाई दिया कि...चचा कौनो नहीं हम ही लोग हैं ..नाम ऊम बदल के लिख रहे हैं....अब का कहें ..जी..इहां हमको जानने वाले जानते हैं कि हम ..भतीजा वाला पोस्ट में ही टिक सकते हैं...काहे से जिसको एतना मेहनत के बाद ..पता नहीं कतना कतना ..ब्लोग मास्टर ट्यूशन पढा के ..खलिया ..लिंक बनाना सिखाया हो....ऊ का टेम्पलेट बदलेगा...वैसे ..और भी जानना हो तो आप टीप चर्चा का पहिला या दूसरा पोस्ट को पढिये ..सब माजरा साफ़ हो जाएगा ..अरे हम सफ़ाई नहीं दे रहे हैं जी ....बस बता रहे हैं कि चचा चचा हैं...हम भतीजा हैं...ऊ भी चचा के साथ ...एक दम फ़ेविकोल के गोंद की तरह चिपके हुए...छोडिये जी ..आप तो आज की चर्चा का मजा लिजीये..

मठाधीश बाबा प्रकट भए, हमें नाम नया मिला अपना ॥


चलो इसी बहाने सही, एक सार्थक बहस पडी है चल ॥


श्री समीरानंद महाराज का कैसे हुक्म दिया जाए टाल,



जिस जिस को पता हो, पहेली हल करो हे मित्र..॥



इससे पहले कि हम भी मिलते शास्त्री जी गये निकल ॥



मा साब ने अभी अभी बतलाया,



इहां गजब ढा रहा तनेजा जी का नकाब,




ऐसी सुंदर पोस्ट और कहीं पाई न गयी॥



सब पूछ लिया सिवा उसके जिसकी थी दरकार,



अनवरत रहे जारी ये सफ़र, हर सूरत, हर हाल में ॥



अनीता कुमार जी के सुपुत्र के विवाह की दिजीये बधाई,



विषय बहुत सामयिक है, आप किजीये चिंतन ॥



हम भतीजा डिक्लेयर कर दिये ताउम्र करेंगे नौकरी ॥


कार्टूनवा देखे जौन जौन, मुंह से निकला वाह...॥



हमें तो भैया आपकी ई पोस्ट खूब भाई ॥



नित नए नए अंदाज में, बहुतों को लपेट रहे ..॥



एक आलसी लंठ बना, फ़िर बन गया ब्लागर,



क्षमा मांगना नहीं होता है इतना भी आसान,



आज फ़िर छोटका है..कल बडका रहेगा ..अबकी पकिया है जी ..कल छुट्टी न है जी..

शनिवार, 24 अक्तूबर 2009

कुछ जाने पहचाने, कुछ अनजाने : चिट्ठों को हम लगे सजाने (चिट्ठी चर्चा )

जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि कुछ न कुछ नये प्रयोग तो होते ही रहने चाहिये...फ़िलहाल तो इलाहाबाद में हो रहे ब्लोग्गर सम्मेलन की धूम मची हुई है पूरे ब्लोगजगत में और क्यों न हो इतने सारे फ़ुरसतिये, निठल्ले, ब्लागियों का संगम हो गया है । मैं तो रपटें पढ पढ के और सबकी फ़ोटुएं देख देख ही यहां से सबको अर्घ्य दे रहा हूं। बहुत अच्छा लगता है जब चारों तरफ़ खुशी का माहौल होता है ...इश्वर करे यूं ही ये कारवां चलता रहे । आज के चर्चा देखिये.....


चर्चा की एक चर्चे से ही शुरूआत हो,
इससे अच्छी भला और क्या बात हो।


कभी कभी नई पोस्टों को भी छानिये॥


कोई हर्ज़ नहीं है जी, एक पैग लगाने में ॥



इनका दिल तो प्यार का मारा है दोस्तों,



शब्दों से सजी कविता की सुंदर तस्वीर है॥



जिंदगी में आती हैं कैसी कैसी मुसीबतें ॥


बडा कठिन है भाई , सर्वश्रेष्ठ होना ॥



देख लिये न तो अपनी टिपिया ठेलिये॥



ताऊ की पहेलियों की अनोखी है बात,



यही पता नहीं, कौन अपने , कौन बेगाने हैं॥


अविनाश भाई का पप्पू भी है बडा ही अलबेला ,



प्लीज जेल के सीन को सेंसर न करो,



यदि सबने कर ली कोशिश ऐसी, तो आ जाएगी बाढ॥



ललित जी ने ब्लोग्गिंग की एक नयी खोली है दुकान,




क्या आप जानते हैं बेनामी संपत्ति का राज,




सुंदर पंक्तियां, खूबसूरत चित्र, और इक सुंदर पोस्ट,



छठ पूजा की परंपरा , और जानिये उसका इतिहास,



सम्मेलन पर तो बहुत सारी पढ ली आपने रपटें,



आज इससे ही काम चलाईये ..कल फ़िर ठेलते हैं तनिक बडकी वाली


बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

ब्लोगजगत का आईना : चर्चा दो लाईना (चिट्ठी चर्चा )

शुकल जी ने जब चिट्ठा चर्चा की शुरूआत की होगी ,.तो जरूर ही ये उनके बहुत से धमाकेदार आडिईया में से एक होगा..महेन्द्र भाई ने इसे साप्ताहिकी का रूप दिया...हमने भी हंसते खेलते जो बन पडा ठेल दिया..और अब तो आदत बन गयी है..अब चच्चा टिप्पू जी ने और पंकज जी ने ये कारवां और भी लंबा कर दिया ..और अब तो टीम लगातार बढती ही जा रही है । यानि कुल मिला कर मौजां ही मौजां...अब विकल्पों की कमी नहीं रहेगी और न चर्चा मंचों की। मुझे बहुत ही खुशी हो रही है..कि जो अलख जगी थी अब वो रौशन हो रही है। अब सोचता हूं कि ..जब नियमित चर्चाएं आ ही रही हैं तो एक नए प्रयोग के रूप में आपको उन चिट्ठों, पोस्टों से रूबरू कराया जाए जो अनछुए से रह जाते हैं......तो तैयार हैं न आप फ़िर एक नए प्रयोग के लिये.........


ब्लोग ऐग्रीगेटर्स की खुल गई इक नयी नगरी,


हम काहे लें इतना टेंशन, ले वो, जिसका है...॥


दि्ल्ली में शादी, किसी झमेले से नहीं होती कम,


आप भी हंसते हंसते ,पकड लेना पेट...॥



देखिये न चर्चा कितनी आ रही निखरकर॥



हे झगडा झंझट वालों , तुम तो भैया पास ना आओ ॥



इन यक्ष प्रश्नों से कब तक आखिर बचेगा ये समाज ॥



अब टेलिविजन पर भी आएगी ब्लोग्गिंग की बारी॥



आप जरूर ही पढिये इसे, हमरा है निवेदन॥



आपके तो ठाट हैं जी खूब सारी चर्चायें पढा किजीये,


और हिंदी ब्लोग्गर्स की मालगाडी को भी अपनायें॥


तुम तक पहुंचने से पहले, कहो और कहां पहुंचा जाए,



ऐसे सवाल जवाब से ही तो है ताऊ लाजवाब॥


अरे आपको सिर्फ़ पंसद है करना, पैसा नहीं है देना॥


हर रोज अपनी अदा से चौंकाने की ठानती हूं॥


दिल टूटने से बढ जाती हैं दिलों की दूरियां ॥



मिसर जी राम जी उजागिर कथा रहे हैं बांच,


एक तरफ़ मकान मालिक, एक तरफ़ किराएदार,



मटुक जूली तो पहले ही एक इतिहास रच गए,



सच कह रहे , जो खिलाए, पाले, वो भगवान है किसान ॥



उफ़्फ़ पाकिस्तान में अब कुत्तों की कैसी हालत होगी ॥


रिशते जब यूं ही रिसने लगेंगे......



आज की चर्चा एतने ..अब समेटते हैं जी..कल से देखिये फ़िर कुछ नया नया...

मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

कई देखे कई पढ डाले, आज की चर्चा आपके हवाले (चिट्ठी चर्चा )


आज सीधे सीधे चर्चा का मजा लिजीये...........

बकलमखुद की डायरी में अद्भुत फ़साना,



ये कहते हुए कि हाय हम तो नहीं थे ऐसे ।



नेताओं की गंदी राजनीति का करने को हिसाब किताब,


इक छोटे से दीप से दिवाली मनाये सारा देश।



आप खुद ही देखिये कितना क्या निकल कर आता है।


चंद शब्दों में कितना कुछ कह गई मीनू खरे,



देखिये तो सही ,पाने को बंदूक इतना क्यों है बेकरार।



आप भी किजीये उनको अपना स्नेह अर्पित



वकील चढे पानी की टंकी पर करने को बगावत,



कूची के रंग से लिखी गयी कुछ क्षणिकायें,



अब क्या कहें इससे ज्यादा , जो भी है, कमाल है।



इस दुनिया में , इन बातों का क्यों अब तक कोई ठौर नहीं।



घूम के देखा, पढ के देखा, शहर बडा अनमोल है।



जाईये पढिये आप भी हो जाईये इनके संग।


व्यंजना में व्यंग्य पढ्के हो जाईये, हंसने को तैयार।


रेत, वैतरणी नाला और बंदर पांडे ने मचा दी हलचल,



इस पोस्ट पर उठाईये, एक अलग ही स्वाद।


प्रशांत बाबू ने उसे पोस्ट बना के ठेल दिया।


आप खुद ही देखिये न जाकर के सरकार।


तभी तो श्रीश कह रहे यहां , चल रहा लाठी और बल्लम।


जैसी प्रजा होती , वैसा ही होता है जी राजा,



पवन जी की पहेली का है अंदाज़ बडा ये खास,



कह रहे हैं मेरा शहर तो गंदगी से हो गया बेजार।



चलिये तैयार हो जाईये फ़िर से आप सबको हंसाना है,


ओहो मैं क्या कहूं, आप खुद ही क्यों नहीं लेते देख ।


सोज ए दिल , दिल की बात, और सुंदर सी है भाषा,


सोच में पड जायेंगे आप जरूर ये पढकर ।



आप क्यों पीछे रहो, जाओ आप भी तो कल्लो जी।



वो बम जिसने किया था ये, वो खुशदीप ने ही धरा था ।


इसी के साथ आज की चर्चा हो गयी खतम......आप तब तक खूब लिखिये पढिये अब कल मिलते हैं हम।

शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2009

मुद्दों की कंगाली का दौर, कहिये क्या बतियायें...क्या पढें क्या छोडें जी, कैसे हम चर्चियायें (चिटठी चर्चा )


क्या कहा जी ....चाहे अनचाहे सब उसी दलदल में फ़ंसते जा रहे हैं..जिसमें फ़ंसने के लिये दलदल बनाने वाले नयी नयी तरह से कीचड डाल रहे थे....वैसे मुझे पूरी उम्मीद है कि..यदि इन विषयों पर कुछ दिनों तक चुप्पी साध ली जाय या बिल्कुल निष्क्रिय हो जाया जाये.तो ये उन्हीं पादपों की तरह दम तोड देंगे जिन्हें पोषण के लिये कुछ नहीं मिलता...खैर छोडिये ये सब आप तो चर्चा का मजा लिजीये..चलते चलते यही कह रहा है मन कि...

ये मुद्दों की कंगाली का दौर है, अपनी कलम को संभालो यारों,
दलदल बन रहा है दरिया, अब तो इसे बचालो यारों,
चाहे जिस धर्म जाति भाषा की हो, दो घडी की है जिंदगी,
फ़ैसला तुम्हारा है, रो के या हंस के बितालो यारों,

अदा की हर अदा निराली, क्या किजीये,


पढिये और कैसी लगी, उन्हें टीप कर बतायें


जल्दी ही सैकडा लग गया, नहीं हुई देर,


लहरों के साथ बह के हम भये दंग,


आप भी देखिये न, हमारी है गुजारिश,


कह रहे नेह , किजीये ऐसे धर्म को अलविदा,


आखें हो गयी स्तब्ध, सिले हुए हैं होठ,



ऐसा अद्भुत हमने तो देखा और कहीं न


यदि जानना हो कैसे दिखेंगे , बीस साल के बाद,



बर्तनों पर भी पड गया, इत्ता काला इंपेक्ट..



खुशी के दीप जलाओ, मत घबराओ बच्चा,



सच्चे इंसान का मन , कैसे रो रिया है


आप खुद ही देखिये , होता है क्या असर,



देखिये क्या क्या हो रहा है बिग बौस के घर में



कमाल कर रहे टिप्पू चच्चा, करके टिप्पणी चर्चा...


इन चार में कौन हैं ब्लागर आप जरा बतायें,

अपनी अपनी रचना भेजिये न थोडे तो बनिये चुस्त,


अरे कभी तो खुश हो ले, काहे को रोता है जी,


तो बस आज के लिये इतना ही....अब तो आप लोगन के पास चर्चा के बहुत सारे मंच हो गये हैं...सो मजा लिजीये...
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