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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

नहीं खत्म हुई है लडाई ........अभी तो और लडना है भाई ...जंतर मंतर पर आज का दिन




ये वो नौनिहाल हैं जो कल अपनी इस लडाई का परिणाम देखेंगे तो खुद पर गर्व करेंगे , और ये देश भी इन पर गर्व करेगा


क्या कोई राजनीतिक दल , कोई राजनेता झुका डरा सकता है इस अवाम को ?



इस महासमर में जाने कौन कौन कहां कहां से शामिल है ......और आप ?




अब कोई नहीं कह सकता कि देश का युवा आंदोलन क्यों नहीं करता

बंद है मुट्ठी , और तनी है मुट्ठी .,..बस एक प्रहार ..और गई सरकार



ये जनसैलाब है बाबू ,,,,,,देश की जनता है ..कौन रोक सकता है इस आंधी को अब



स्कूल तो कल भी खुलेगा और पढाई कल भी होगी ...आज जो करना है वो कल नहीं होगा

इन्हें गौर से देखिए .दुनिया इन्हें नेत्रहीन कहती है ....मगर ये नेत्रहीन हैं या सरकार ....आप खुद तय करिए ..


देश की अगली पीढी ....कतार बद्ध और प्रति बद्ध  भी कटि बद्ध भी ..

यदि जोर से फ़ूंक भर मार दे , हुंकर भर ले तो पल में सियासत धूल चाटती नज़र आएगी






आप सिर्फ़ अनुभव करिए इस आग को अपने भीतर और जहां हैं वहीं से जलाइए

ये प्रवाह अब रुकने वाला नहीं है

13 टिप्पणियाँ:

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh ने कहा…

शायद भारत बदलने का समय आ गया है...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

सबकुछ बदलेगा.... समय आने वाला है..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यही जोश चाहिए था ...अंदर ही अंदर सुलग रहे थे सब ..बस हवा देने की ज़रूरत थी ..

cmpershad ने कहा…

चित्रों से साफ पता लगता है कि युवा वर्ग तैयार है, उन्हें बस सच्चे और अच्छे नेतृत्व की आवश्यकता है।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

धन्यवाद झा जी,
आप हमें जन्तर मन्तर ले गए।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

छात्रों को अनुकरणीय व्यक्तित्व मिल गया है।

आकाश सिंह ने कहा…

असली जीत तो अभी बाकि है |
जबतक सारे भ्रस्ट लोग हवालात में न चले जाएँ तबतक ये मुहीम जारी रहनी चाहिए |
आगे आगे देखिये होता है क्या ?

यहाँ भी आयें|
यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो फालोवर अवश्य बने .साथ ही अपने सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ . हमारा पता है ... www.akashsingh307.blogspot.com

Udan Tashtari ने कहा…

लोगों का ज़ज्बा देखने के काबिल है....वाह...कुछ तो बदलेगा.

Radhe Radhe Satak Bihari ने कहा…

एक चोरी के मामले की सूचना :- दीप्ति नवाल जैसी उम्दा अदाकारा और रचनाकार की अनेको कविताएं कुछ बेहया और बेशर्म लोगों ने खुले आम चोरी की हैं। इनमे एक महाकवि चोर शिरोमणी हैं शेखर सुमन । दीप्ति नवाल की यह कविता यहां उनके ब्लाग पर देखिये और इसी कविता को महाकवि चोर शिरोमणी शेखर सुमन ने अपनी बताते हुये वटवृक्ष ब्लाग पर हुबहू छपवाया है और बेशर्मी की हद देखिये कि वहीं पर चोर शिरोमणी शेखर सुमन ने टिप्पणी करके पाठकों और वटवृक्ष ब्लाग मालिकों का आभार माना है. इसी कविता के साथ कवि के रूप में उनका परिचय भी छपा है. इस तरह दूसरों की रचनाओं को उठाकर अपने नाम से छपवाना क्या मानसिक दिवालिये पन और दूसरों को बेवकूफ़ समझने के अलावा क्या है? सजग पाठक जानता है कि किसकी क्या औकात है और रचना कहां से मारी गई है? क्या इस महा चोर कवि की लानत मलामत ब्लाग जगत करेगा? या यूं ही वाहवाही करके और चोरीयां करवाने के लिये उत्साहित करेगा?

ZEAL ने कहा…

बेहतरीन झलकियाँ दिखायीं आपने। मन का उल्लास दोगुना हो गया।

सतीश सक्सेना ने कहा…

बहुत प्यारी पोस्ट है आनंद आ गया ! यह मेहनत सफल होगी !

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

अभी-अभी समाचार पढ़कर बहुत आघात हुआ और दुःख पहुंचा. शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन परिवार अजय कुमार झा जी के पिताश्री को श्रद्धाँजलि अर्पित करते हुए परमपिता परमात्मा से दिवंगत की आत्मा को शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह आघात सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता है.दुःख की इस घडी में हम सब अजय कुमार झा जी के साथ है.

ZEAL ने कहा…

पिताजी के निधन का दुखद समाचार मिला। पिताजी की आत्मा को शांति मिले , इश्वर से यही प्रार्थना है। आपके दुःख में आपके साथ हूँ ।

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पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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