इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

सब आपकी खातिर है, लो जी चर्चा हाज़िर है..(चिट्ठी चर्चा )


ये जानकर , देखकर, और पढकर ....बहुत ही अच्छा लगा कि हिंदी दिवस को इस बार कम से कम हिंदी ब्लोग जगत ने तो खूब जम कर मनाया....हर दूसरी पोस्ट ..हिंदी पर ही थी...और मेरा मानना है कि ..हिंदी न तो कभी कमज़ोर थी....न है...और न ही होगी....इसलिये ..पूरे मनोयोग से इसकी सेवा करते रहें ..सब अपने स्तर से ..अपने तरीके से ...मंज़िल मिल ही जायेगी..फ़िलहाल तो आप चर्चा देखिये....


कभी दाल तो कभी मुर्गी है पिछडती......


जिसने छुआ ये आसमान , उसके दिल के निकट रहा..


उसे मिलेंगी, पुस्तकें अनमोल, जो लायेगा, ज्यादा नंबर....


फ़िर चाहे बांकी उम्र, पतियों को पडे रोना..



पढ जाईये, जो तैयार हैं पोस्ट में, डूबने को, बहने को....


जो भी निकला परिणाम, ब्लोगवाणी से किया अनुरोध..


फ़टाफ़ट पहुंचे वे, जो हंसने को तैयार है,


मेरे इस अनोखे ब्लोग पर आप भी नज़र मारिये भाई..



मौज लेने वालों को गाली सुनने को रहना चाहिये तैयार..


ब्लोग्गिंग में हमेशा, ब्लोग टिप्स के साथ चलिये,



इस वीर बहुटी के जादू से कौन है बच पाया...


नहीं समझे तो खुद ही पढिये, आप ये निबंध..



आज बस इस छुटकी मोटकी चर्चा से काम चलाईये.....कल सारी कसर पूरी करेंगे...

19 टिप्‍पणियां:

  1. पूरे दिन का सार मिल जाता है आपकी इस रपट से

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  2. हम थे मुन्तज़िर
    हो गई चर्चा हाज़िर
    लेकर सुकल-मिसर:)

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  3. आपका हिन्दी में लिखने का प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है. आपके इस प्रयास के लिए आप साधुवाद के हकदार हैं.

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  4. वकील साब सही कह रहे है,आज तो पाकेट बुक साईज़ की है चर्चा।

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  5. नी मामा से काणा मामा अच्छा.:)

    रामराम.

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  6. हम आप से भी करते हैं अनुरोध
    चिट्ठों का हमेशा ऐसे ही कराया करें बोध

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  7. देखन में छोटी लगे
    लिंक चटकायें सभी तो
    पढ़ने में समय पूरा लगे।

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  8. महत्वपूर्ण प्रविष्टियों का एक जगह प्रस्तुतिकरण हो जाता है । आभार चर्चा के लिये ।

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पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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