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सोमवार, 14 दिसंबर 2009

आज की छुटकी चर्चा (चिट्ठी चर्चा )

जितनी खुशी मुझे नए चिट्ठों के आने से होती है ....उतना ही दुख किसी चिट्ठे के चले जाने से होता है ....खासकर जब उनका जाना असहज सा होता है । पिछले दिनों जब मैं यहां नहीं था .....आया तो देखा कि कुछ अच्छे ब्लोग्गर्स सिर्फ़ एक छोटे से कंफ़्यूजन के कारण ब्लोग्गिंग को अलविदा कहने का निर्णय ले गए। जबकि देखा तो पाया कि जाने से पहले ही वो आपसी कन्फ़्यूजन भी लगभग दूर हो गई थी .....मगर फ़िर भी उनके चले जाने का निर्णय दुखद और अफ़सोसजनक लगा । मैं अपने तमाम ब्लोग्गर्स मित्रों की तरफ़ से उन सबसे ये आग्रह करना चाहता हूं कि जब मतभेद समाप्त हो गया है तो एक दूजे के लिए न सही , हमारे लिए भी न सही ॥चलिए खुद के लिए भी न सही .......मगर हिंदी के लिए ......उसकी सेवा के लिए तो आ ही जाईए । आज इस छुटकी चर्चा का लुत्फ़ उठाईये ......कल से चर्चा का डबल डोज मिलेगा कुछ दिनों तक तो जरूर ही





भिलाई ब्लोगर्स कर रहे हैं उज्जवल ब्लोग्गिंग की तैयारी,
इस पोस्ट पर उसकी एक झलक गई है उतारी ॥



एक पैकेट में तीन प्रोडक्ट का मजा लिजीये,
कभी कभी सांप की हंसी भी सुना किजीये ॥

सफ़ल दांप्तय जीवन हेतु यहां लें परामर्श ,

पहेली के बहाने , स्त्री पुरुष विमर्श ॥


मेजर की कलम का दीवानापन कहां सर से उतरे,

कभी लिखे गजल गीत, कभी कहे फ़िकर करें फ़ुकरे॥


छत्तीस गढ में एलियन जी का राज भाई कर रहे वैलकम ॥
कनेडा छत्तीसगढ के बीच है दिल्ली, बता देते हैं हम ॥


विज्ञापन देखिये और खूब पैसे कमाईये,
अरे,टीवी पर नहीं हुजूर , इस पोस्ट पर जाईये



इरफ़ान भाई की तूलिका ने आज किया किसका काम तमाम,
एक ब्रश से देखिए कितने कह उठे , त्राहि माम -त्राहि माम ॥


और अब पंकज भाई की चर्चा का मजा लिजीये ,
एक साथ ढेर सारा , बहुत कुछ पढा किजीये ॥


योगेन्द्र भाई के जादू से कौन है जो बचा ,
आज देखिये उन्होंने क्या कहां है लिखा ॥




वर्ष २००९ में हिंदी ब्लोग्गिंग का यहां है जोखा-लेखा,
जिसकी नहीं पडी नजर इसपे , उसने कुछ नहीं देखा ॥




शरद भाई के अलग अलग क्या कहने अंदाज ,
आप खुद ही देखिये , क्या कहते-करते आज ॥




आज अविनाश भाई का है जन्मदिन दुआ दीजिए,
मोबाईल पे , मेल पे या यहां पे जहां मन हो विश कीजिए ॥





प्रभात जी याद कर रहे अपने स्कूटर का जाना,
इसके आगे की बातें तो आप यहां पढ के आना ॥



अरे इहां ताक ब्लागर, कहां नजर रहा है फ़ेर,
इर्दगिर्द में चर्चा है भगवान के घर अंधेर ॥



खंडहर की ईंट क्या क्या कह गई अफ़साना,
दीपक की गज़लों का यहां है ठिकाना ॥




देखिए आज क्या कह रही हैं मन की पाखी,
आज उसकी आखें किसके दर्द में झांकी ॥


मेरे आखों में बसे सारे ख्वाब तुम ले जाओ,
पढो मुझे और अपनी स्नेह भरी टीप दे जाओ ॥

32 टिप्‍पणियां:

  1. देखन में छोटी लगे, घाव करे गम्भीर...

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  2. बढ़िया काव्यमय चर्चा की है।
    घुघूती बासूती

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  3. काहे छुटकी कह रहे हैं जी..इतना तो बढ़िया बनाये हैं॒॒

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  4. सुन्दर चर्चा । उपयोगी लिंक संजोया है । आभार ।

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  5. अगर ये छुटकी है तो बढ़की चर्चा कैसन होगी.. :)

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  6. हर बार की तरह एक सुन्दर चर्चा!

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  7. छुटकी! जहाँ काम आवै सुई कहाँ करे तरवारि बढिया चर्चा।

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  8. हम तो झा जी की चर्चा पढ़ने को तरस गए थे...अब डबल डोज़ से उसकी भरपाई तो बनती है न...

    जय हिंद...

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  9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  10. पहिले वाला कमेन्ट में टाइपिंग का बहुत गलती हो गया...इसी लिए हटा दिए हैं....
    हां तो हम कह रहे थे.....


    झा जी छोटा है मगर खोटा है...
    सीधे हम सीधन सों महा बाँके हम बाँकन सों.........हाँ नहीं तो,,,

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  11. अगर इसे ही छुटकी कहते हैं तो बड़की किसे कह्ते है ? उम्दा चर्चा ।

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  12. चर्चा के पहले के सरमन पर सभी ब्लागर कृपया ध्यान दें और अमल करें॥

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  13. अच्छी चर्चा रही...कुछ अच्छे लिंक्स मिल गए...जो छूट गए थे,पढने से

    उत्तर देंहटाएं

पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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