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बुधवार, 24 जून 2009

वे हिंदी में ब्लॉग्गिंग करते हैं..और हिंदी ब्लॉग्गिंग को गरियाते हैं





















कुछ लोग यहाँ पर आजकल,
गजब की हिम्मत (हिमाकत )दिखा रहे हैं,

हिंदी में कर रहे हैं ब्लॉग्गिंग,
और हिंदी ब्लॉग्गिंग को ही गरिया रहे हैं,

पोस्ट , दो-चार लाइन की ठेल कर,
किसी को भड़का, किसी को उकसा रहे हैं,

लोग पढें ,पसंद करें, और टिपियाएँ भी,
सबसे यही अपेक्षा लगा रहे हैं,

टिप्पियाँ भी हाँ जी वाली तो ठीक, नहीं तो,
मोडरेशन के बहाने ,,उड़ा रहे हैं...

सिर्फ वही करते हैं, गंभीर लेखन,
ऐसा बार -बार जता रहे हैं.....

खुद की चर्चा नहीं हो कहीं, या की कोई करे आलोचना,
बस वहीं,,उबल उबल कर टिपिया रहे हैं...

समझ नहीं आता जब हिंदी ब्लॉग्गिंग इतनी ही गंदी है,
तो क्यूँ अपनी कलम यहाँ चला रहे हैं...

हमें तो उनका अंदाज पसंद न आया, जिस थाली में खाया,
खुद खा खा कर, उसी में छेद बना रहे हैं....

आप सब भी समझ गए होंगे ही,
और वो भी ,जिनके लिए इतना लिखे जा रहे हैं..

आम तौर पर मैं इस तरह की बातें नहीं लिखा करता..मगर पिछले कुछ दिनों से देख पढ़ रहा हूँ की कुछ लोग यहाँ सिर्फ नकारात्मक बातें ही कर रहे हैं..कारण वे ही बेहतर जाने.....यदि आलोचना करनी ही है...तो फिर पूरे तर्क के साथ और स्वस्थ अंदाज में कीजिये....अजी किसी पर उंगली उठाना तो सबसे आसान काम है..हो सकता है हिंदी ब्लॉग्गिंग में अभी बहुत सी कमियां हों मगर इन्हें दूर करने के लिए आसमान से कोई उतरेगा नहीं......ज्यादा नहीं कहना चाहता..मुझे हिंदी ब्लॉग्गिंग पसंद है..और इसके लिए किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं लगती....

बुधवार, 17 जून 2009

अच्छा जी घूम के आते हैं......




भाई पिछले कई दिनों से देख रहा था की कोई न कोई पोस्ट इस गर्मी में ऐसी आ ही रही थी जो आँखों और मन को सुकून पहुंचा रही थी..कोई बर्फ के पहाड़ दिखा रहा था तो कोई हरियाली ...यार कब तक बर्दाश्त करते....मन पिनक गया...और हमने भी बना लिए प्रोग्राम..वैसे भी श्रीमाती जी जब भी ..कोई सुन्दर दृश्य सिनेमा में देखती , और मेरे ये कहने की देर नहीं हुई...बड़ी ही सुन्दर जगह है..बिक्लुल अद्भुत और मनोरम...पत्नी जी बिदक कर तुरत मनोरमा बन जाती ..और शुरू हो जाती ..हमें कहीं घुमाते-फिरते भी हो.(दरअसल , जोश जोश में हमन श्रीमती जी को बता दिया था की अपने कुंवारे समय में हमने देश के सत्तर शहरों में घुमाई फिराई कर राखी है...)बस लगे रहते हो अपने इस कम्यूटर के साथ...किसी दिन सारा गुस्सा इसी पर निकलेगा ..इसे तो वाशिंग मशीन में धो दूंगी...

मैंने सोचा की सचमुच ही ऐसा हो..इससे पहले ही कार्यकम बना लिया..सो अब चलते हैं...डलहौजी..चम्बा .खजियार..पंचदिवसीय दौरा है..वापसी आने पर दो तीन पोस्टों का जुगाड़ भी हो जाएगा..उन्ही फोटुओं में अपनी श्रीमती जी..अपने पुत्तर लाल श्री गोलू जी और बिटिया रानी बुलबुल से आपको मिलवायेंगे...
आप जो मन करे लिखिए टिपियाइये..हम मोबाईल पर पढेंगे...अरे नहीं लैपटॉप नहीं जा रहा हम नहीं चाहते की कल को खबर मिले की एक लैपटॉप की लाश डलहौजी की घाटियों में पायी गयी..

शनिवार, 13 जून 2009

अफज़ल की पेंशन तय...कसाब ने भी मांग की



मुझे तो पहले ही पता था की इस बार जय हो जय हो ..करके सरकार बनी है तो कुछ न जय तो जरूर ही करेगी ..भाई लोगों जो भी अफज़ल और कसाब की सजा और फाँसी को लेकर चिंता में थे .उन्हें अब दुबले होने की जरूरत बिलकुल भी नहीं है..वे अगले पच्चीस सालों तक मज़े में इस मुद्दे पर ब्लॉग पोस्ट ठेल सकते हैं..
चलिए पहले ये बताता हूँ की माजरा क्या है..आज प्रकाशित खबर के अनुसार..नए कानून मंत्री (वीरप्पा ,यार ये नाम कुछ सुना सुना सा लगता है ..अरे नहीं उसमें तो न लगा था ) ने मजबूरी जाहिर करते हुए बताया है की जब तक राष्ट्रपति के पास अफज़ल की दया याचिका लंबित है ....तब तक उसे फांसी पर नहीं चढाया जा सकता. ..और अब लंबित याचिकाओं की भी सुन लीजिये...राष्ट्रपती के पास अभी कुल अट्ठाईस याचिकाएं लंबित हैं....जिनका निस्तारण होने में कम से कम पच्चीस साल लग सकते हैं...कम से कम है ये समय....तो इस हिसाब से अपने अफज़ल miyan तो yaheen buddhe हो जायेंगे ....ऐसे में bhaarteey परम्परा के अनुरूप उनके लिए पेंशन की भी व्यवस्था होनी ही चाहिए..देखिये देखिये ....अब इसका विरोध तो नहीं ही करिए..आखिर उसने आपना पूरा जीवन देश में लगा दिया जी....इतना तो उसका हक़ बनता है...हाँ एमाउंट कितना होगा ये अभी तय नहीं हुआ है....मगर सब कुछ मंदी के ऊपर निर्भर करता है..

इस सारे मुद्दे को देखते और समझते हुए कसाब (क्या समझ रहे हैं आप...अजी कसाब सब कुछ ठीक से समझे इसीलिए तो सरकार ने उसे एक काबिल वकील भी मुहैया कराया है ...और वो अब पहले से ज्यादा समझदार है ) ने भी अविलम्ब ही अपने लिए भी सरकार से कुछ सोचने की मांग की है. उसका कहना है की अफज़ल भैया के लिए तो बुजुर्गी पेंशन तय ही की जा चुकी है..लगभग ..का क्या मतलब है जी..पक्का ही समझें....मगर वो तो अभी बच्चा है ..सो उसके बालिग़ होने तक बच्चों की कोई इंश्योरेंस पालिसी ही करवा दो..और बालिग़ होने पर जीपीईफ़ ..पीपीईफ़ वैगेरह का इंतजाम कर दिया जाए..किसी भी तरह के बोंड से उसने साफ़ मन किया है..मंदी के दौर को देखते हुए उसकी चिंता स्वाभाविक ही लगती है...मौजूदा समय में मुझे तो उसकी मांगें बिलकुल जायज़ लगी...हालांकि मेरा तो विचार था की सरकार को नया वेतन आयोग लागू करते समय ही इन अफज़ल ..कसाब ..और बहुत से ..जो अभी आने वाले हैं ..उनके कल्याण के लिए कोई ठोस नीती बनानी चाहिए थी..

सुना है की इस खबर का अन्तराष्ट्रीय फांसी वेटिंग मुजरिम्स असोसीयेशन ने स्वागत किया है..और मांग की है की उन्हें पूरे विश्व में भारत की न्याय व्यवस्था पर सबसे ज्यादा भरोसा हो गया है ..विशेषकर सबने एक ख़ास आग्रह किया है की उन सबकी अंतिम याचिका भारत के राष्ट्रपति के पास ही भेजी जाए..इसके लिए वे अपने अपने देश से एक एक राष्ट्रपति भी भेज सकते हैं...(यहाँ राष्ट्रपति के पास ज्यादा पेंडिंग न बढ़ जाए इसलिए. )

गुरुवार, 11 जून 2009

महाराष्ट्र में भी भारतीय प्रताडित किये गए.....



ऐसा लग रहा है की विश्व सचमुच एक गाँव का रूप ले चुका है...देखिये न ..घटना कहीं और होती है और प्रतिघटना कहीं और..अभी कुछ समय पहले ही बाहर किसी सिख गुरु पर हमले के विरोध में कैसे पूरा पंजाब सुलग उठा था....वो तो शुक्र है की मामला जल्दी शांत हो गया...आजकल भारतीयों पर हमले की घटनाएं बहुत बढ़ गयी हैं...अरे नहीं नहीं मैं उन नेताओं की बात नहीं कर रहा हूँ जो चुनाव के दुरान जूते के हमले का शिकार हुए थे., सच कहूँ तो तो न तो वो हमला था और न वे नेता लोग भारतीय जैसे थे..खैर,
तो बात हो रही थी की इन दिनों हमारे बच्चे जो बाहर जा कर पढ़ना चाह रहे थे ...कमबख्त गोरों ने पता नहीं कौन सी निकाली है.....सुना एक कारण तो ये भी बताया जा रहा है की जबसे आमिर ने लगान में गोरों की टीम को हरा दिया तब से वे बेचारे
कोई भीमैच नहीं जीत पा रहे हैं..चलिए छोडिये उस मुद्दे पर फिर बात करेंगे...फ़िलहाल तो चिंताजनक खबर ये है की कुछ भारतीयों पर महाराष्ट्र में भी मानसिक हमले किये गए हैं...पूरी खबर ..आज के दैनिक जागरण में पढें...दरअसल वहाँ के पुणे आई आई टी संस्थान में साकछात्कार देने गए बिहारी (क्यों वे भारतीय नहीं हैं क्या, आप क्यूँ चौंके )विद्यार्थियों को मानसिक रूप से प्रताडित किया गया ..उनसे पूछा गया की बिहार देश की अपराध राज्धाने क्यूँ और कैसे बनी....बताइये भला ..अरे ये तो लालू जी पासवान जी ..और भी जितने जी हैं....उनसे ही पोछना चाइये था न...

विद्यार्थियों से कहा गया की यहाँ महाराष्ट्र में जितने अपराध होते हैं ...वे बिहारी करते हैं......बताइए भला...मुझे तभी जाकर पता चला की ..दाउद इब्राहीम...अरुण गावली. हाजी मस्तान..और राज ठाकरे लोग बिहारी हैं.....मैं तो उन्हें महाराष्ट्र का ही समझ रहा था अब तक.......सुना है नीतिश जी ने पूरी गंभीरता से ये मसला उठाया है..अब ये पता नहीं की उन्होंने आस्ट्रेलिया बात की है या.....नहीं नहीं यार ...भारत में कोई भारतीय को क्यूँ.......अच्छा ऐसा हुआ है....लोगों की मानसिकता कितनी आस्ट्रेलियन हो गयी है.....नई.....

सोमवार, 8 जून 2009

ब्लू लाइन बसें सेना में शामिल :सेना के लिए गर्व का दिन



न जाने कितने वर्षों से मैं इस घड़ी की प्रतीक्षा कर रहा था ..और ब्लॉग्गिंग के अपने शुरुआती दिनों में भी ये बात मैंने अपनी एक पोस्ट में जाहिर की थी..और आखिरकार आज वो दिन आ ही गया...आज ही अपने विश्वस्त ( जिन पर मुझे कभी भी विश्वास नहीं रहा ) सूत्रों से पता चला की ..सेना ने दिल्ली की ब्लू लाइन बसों के लगातार बढ़ते सटीक परिणाम और अचूक मारक क्षमता ...को मानते और समझते हुए ...आखिरकार उसे सेना के इन्फैन्ट्री में शामिल करने का निर्णय ले ही लिया...हालांकि अभी ये तय बहिन हुआ है की ये नयी बसें...जिन्हें नए मारक अस्त्र के रूप में सेना में शामिल किया गया है ..वे बोफोर्स तोप का स्थान लेंगी या नहीं ...मगर इतना तो तय है की आने वाले समय में ब्लू लाइन बसें..लोगों को मारने और कुचलने की अद्भुत क्षमता के बदौलत ...अन्य सभी तोप और अन्य मारक वाहनों को कड़ी टक्कर देगी...

दरअसल सेना का नजर तभी से इस अचूक मारक वाहन पर लगी हुई थी जब से वे देख रहे थे .....की सरकार और पुलिस के इतने पहरे..नियमों और कानूनों के बावजूद ये वाहन लगातार अपनी मारक क्षमता को बढ़ा रहा था .....और तो और उन्हें इस वाहन का ये गुण भी विशेष रूप से पसंद आया था की ये अपने लक्ष्य में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं करता....आदमी क्या. स्कूटर कर. कार क्या...सब को एक ही नजर से लक्ष्य बना लेता है....वेतन आयोग के लागु होने के समय जब सेना ने सरकार के सामने अपनी मांगें राखी थी तभी ये भी कहा था की इन बसों को भी सेना में शामिल किया जाए..
मगर जनसँख्या नियंत्रण विभाग ने ये कहते हुए आपत्ति की , की इन बसों ने पिछले दिनों में उनकेअभियान को बड़ी सफलता दिलाई है.......लेकिन आखिरकार उन्हें मना ही लिया गया......

सेना ने इस मौके पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा की पहली बार देश में बने किसी मारक वाहन को अपनी सेना में शामिल करके उन्हें अभूतपूर्व गर्व का एहसास हो रहा है....सेना को हमारी भी शुभकामनायें...

(ऐसी ही एक पोस्ट मैंने अपने शुरआती दिनों में लिखी थी ...मगर आज भी सामयिक लगी सो लिख दी....)

शनिवार, 6 जून 2009

सावधान....यहाँ सौ का नोट दस में बदल जाता है.....

जी हाँ, आप सोच रहे होंगे कि अब तक तो यही सुन और देख रहे थे कि , कोई पैसे ले कर उसे दुगुना और तिगुना कर देता है ......मगर ये कौन सी अनोखी स्कीम आ गयी है जहां सौ का नोट सीधे दस रुपये के नोट में बदल जाता है.....यकीन नहीं हो रहा ...तो खुद ही देख लीजिये.....
जी ...बिलकुल ठीक समझे आप ये अनोखी स्कीम इन दिनों भारतीय रेलवे के टिकेट काउंटर पर खूब मजे में चलाई जा रही है....ख़ास कर उन स्टेशनों पर जहां लोगों की भीड़ बहुत ज्यादा है....ऐसे में राजधानी दिल्ली में तो पूछिए मत......गरीब, मजदूर, अनपढ़, और बहुत से लोग जो अचानक घर जाने (मेरा मतलब अपने मूल प्रदेशों ) का कार्यक्रम बना लेते हैं....स्टेशन पहुँच कर टिकेट की लाइन में लग जाते हैं.....घंटे दों घंटे बाद जब नंबर आता है तो जैसे ही काउंटर के अन्दर पैसे पकडाते हैं.....आवाज आती है......भाई ये क्या दे रहे हो.....वो कुछ समझे इससे पहले ही उसके सौ के नोट के बदले दस का नोट वापस देकर कहा जाता है पैसे कम हैं......लोग अक्सर पैसे गिरने के दर से नोटों को लपेट कर या मोड़ कर काउंटर में डालते हैं....और बस यही से कमाल कर देते हैं स्कीम वाले......अभी कल ही एक महिला काउंटर क्लर्क को विजिलेंस वालों ने रँगे हाथों यही कलाकारी करते पकड़ लिया ....इन महिला के खिलाफ कई दिनों से शिकायत आ रही थी...चूँकि लोगों को ट्रेन पकड़ने की जल्दी होती है इसलिए वे झगडे में पड़ने की जगह दूसरा नोट पकडाना ही बेहतर समझते हैं......फिर लाइन में लगे अन्य लोग भी उसे वहाँ ज्यादा देर तक नहीं रुकने नहीं देते.....
यदि आप भी किसी ऐसी स्थिति में पड़ते हैं तो मेरी तरफ से दों सलाह.....हमेशा नोट को खोल कर पक्दाइये...जिससे काउंटर के अन्दर कलाकारी करने वालों को मौका न मिले....यदि फिर भी ऐसा हो ही जाए तो,,,समय हो तो खुद अन्यथा जो भी आपको छोड़ने आये हों.....उस काउंटर के कलाकार की शिकायत....वो भी लिखित में....(हालाँकि इसके लिए शिकायत पुस्तिका मिलना भी किसी चमत्कार से कम नहीं होगा आपके लिए )जरूर करें....इससे किसी न किसी दिन उस रेलवे के कलाकार का नाम जरूर रोशन होगा....

कमाल है रेलवे की इतनी तन्क्वाह और ओवर टाईम के बावजूद ये स्कीम......सौ रुपये दों....दस का लो.....

शुक्रवार, 5 जून 2009

सुना है...पर्यावरण दिवस पर.....

पर्यावरण दिवस को, छोटे में, कुछ यूँ, मनाया हमने, उन्होंने किये वादे, दोहराए संकल्प, बस सच, दिखाया हमने, सुना है , इक कार, सबको , सस्ते में मिलेगी, धुंआ तो , वो भी छोडेगी, आखिर , सड़क पर चलेगी, सुना है,कोरिया ने, कूलर से सस्ता, ऐसी बनाया है, सी ऍफ़ सी, गैस न निकले, क्या कोई ऐसा, यन्त्र लगाया है...? सुना है, इको संतुलन को, अमरीका भी तैयार है, ढूंढ रहा है सी आई ए, उसे जो , पर्यावरण, असनतुलन का, जिम्मेदार है.....

और जैसे ही वो मिल जाएगा... हम उसे पकड़ कर सभी प्रदूशानो से मुक्त हो जायेंगे...आप भी तलाश जारी रखें.....
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