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शुक्रवार, 19 मार्च 2010

एक और चर्चा झेलिए …..झाजी चर्चा वाले …..

 

मुझे क्या पता था कि पिछला ट्रेलर आप सबको खूब पसंद आएगा ..हम तो सोच रहे थे कि सब कहेंगे कि अरे कहां फ़ंस गए झाजी ..आप तो बस अपनी टरेन दौडाईये ….धडाधड पटरी बिछा के …और हमको भी ई ससुर लाईव राईटर के स्यापे से मुक्ति मिलेगी …अरे ई इतना स्लो है कि का बताएं यार ..इत्ते में तो हम जैसा ब्लोग्गर ..पचास पोस्ट के पेट में घुस के निकल आए ….मुदा आप लोग तो खूबे न बदमाश हैं जी …मार का का तो बोल के चढा दिए …कि हमको अगला ट्रेलरवा ले कर आना ही पडा । चर्चा झेलिए इसलिए कह दिए हैं ..काहे से कि सुने हैं कि आजकल चर्चा को भी लोग बाग ओतना ही डेडिकेशन से झेल रहे हैं जितना डेडिकेशन से पोस्ट सबको झेलते हैं ….फ़िर ई भी बताना जरूरी हो गया है कि …हम झाजी चर्चा वाले हैं ….नक्कालों से सावधान रहिएगा …..तो झेला जाए जी

 

इन दिनों सरकार के कामकाज की खूबे तारीफ़ हो रही है ..और ब्लोग्गर अपनी पोस्टों से सरकार के कामों की असली समीक्षा कर रही है ….बताईये इस काम के लिए हर साल ई विपक्ष में बैठे लोग संसद में बैठ कर जाने कित्ता पैसा फ़ूंकते हैं और कुछ कहते करते भी नहीं …देखिए आज सुश्री अनु चौधरी क्या ठोक के सरकार की नई शिक्षा नीति का खुलासा कर रही हैं

जनतंत्र पर अनु सिंह चौधरी image

अमीर छात्रों के लिए काम कर रहे हैं अमीर कपिल सिब्बल

लेखक: अनु सिंह चौधरी  |  March 18, 2010  |  हक़ की आवाज़   |  

सरकार ने भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए दरवाज़े खोल दिए हैं। हर सिक्के के दो पहलुओं की तरह इस फैसले के भी दोनों पहलू समझ में आ रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में नए विकल्प खुलेंगे, शिक्षा की गुणवत्ता शायद बेहतर होगी और हो सकता है, देशी-विदेशी विश्वविद्यालयों की इस प्रतिस्पर्द्धा का फायदा उन शिक्षकों को भी मिले जो सालों से कम वेतन का रोना रो रहे हैं।

लेकिन ये तो तय है कि भारत में कैंपस स्थापित करने का सबसे बड़ा फायदा विदेशी विश्वविद्यालयों को ही मिलेगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से है। भारत से हर साल तकरीबन 1.20 लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशों का रूख करते हैं, जिसमें से अधिकांश छात्रों की मंज़िल अमेरिका होती है। मानव संसाधन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी संस्थानों में पढ़ने के लिए छात्र और अभिभावक सालाना 4 बिलियन डॉलर (तकरीबन 180.2 अरब रुपये) खर्च करते हैं। हैरानी नहीं कि अटलांटा की जॉर्जिया टेक यूनिवर्सिटी ने 2008 में ही भारत में कैंपस खोलने के लिए हैदराबाद में 250 एकड़ ज़मीन खरीद ली थी।

 

कुछ घटनाएं इस तरह से घटती है कि वे प्रेरक प्रसंग बन जाती हैं ..और जितनी बार भी उनके बारे में पढा सुना जाए …जाने कितनी हिम्मत मिलती है …तो पढिए आज एक ऐसा ही प्रसंग ….

श्री यू पी सिंह फ़रमाते हैं

फर्श से अर्श तक

लोकोपदेशक प्रसंग


   एक स्कॉटिश लड़का अमेरिका में छोटा-मोटा काम करने के लिए आया. कुछ सालों की मेहनत से उसने तत्कालीन(सन 1870  के आसपास ) विश्व का स्टील का सबसे बड़ा व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर दिखाया.
उसकी गिनती आधुनिक विश्व के उन पहले धनकुबेरों में होती है जिन्होंने फुटपाथ से जिन्दगी की शुरुआत की थी. और    एक समय ऐसा भी था जब एंड्र्यू कार्नेगी के नीचे 43 लखपति कार्मिक काम करते थे. इतिहास के पन्नो में जॉन डी रौकफेलर के बाद इस दुनिया का दूसरा  सबसे धनी आदमी कहलाया.
आज से सौ-सवा सौ  साल पहले एक लाख डॉलर बहुत बड़ी रकम होती थी. आज भी यह बड़ी रकम है. किसी ने एक बार कार्नेगी से पूछा की वे अपने साथ काम करने के लिए सर्वश्रेष्ठ लोगों को कैसे खोज निकालते हैं. कार्नेगी ने कहा – “सबसे अच्छे कार्मिकों का चयन करना सोने की खान से सोना निकालने जैसा काम है. एक तोला सोना प्राप्त करने के लिए टनों मिट्टी को खंगालना पड़ता है लेकिन जब आप खुदाई करते हैं तो आपकी नज़र मिट्टी को नहीं बल्कि सोने को टटोलती हैं.” फर्श से अर्श तक

 

 

कवियत्रि बीना शर्मा जी बडी ही सरलता से कुछ आसान शब्दों में कविता का एक संसार बसा लेती है आज देखिए न फ़िर उनकी कविता का ये अंश….और बांकी की उनकी मर्जी आप उनकी पोस्ट पर बांचिए …..

प्रयास में बीना शर्मा image

Thursday, March 18, 2010

तुम्हारी मर्जी है|

न जाने 

समय की मार 

हमें कहाँ ले जायेगी

और बुदबुदाते हुए हम

गुदगुदाए जाने पर भी

लंबे सोच में बैठे रह जायेगे 

अपनी पीड़ा को ना भूल पायेंगे|

 

अपने कुलवंत भाई ने अपनी फ़ोटो की जगह एक अनजानी से छवि चेप रखी थी …हमही कौन कम थे ..हमने उनका फ़ेसबुक ही उठा लिया …कैसे मजे से खडे हैं देखिए …अरे हां इसके बाद इनकी पोस्ट को पढिए ,और मजे उठाईये …जैसे हमने उठाए

भाई कुलवंत हैप्पी image अपनी खुली खिडकी में कहते हैं

Friday, March 19, 2010

कुछ दिन पहले बठिंडा से मेरे घर अतिथि आए थे, वो मेरे खास अपने ही थे, लेकिन अतिथि इसलिए क्योंकि वो मुझे पहले सूचना दिए बगैर आए थे, और कमबख्त इस शहर में कौएं भी नहीं, जो अतिथि के आने का संदेश मुंढेर पर आकर सुना जाएं। वो आए भी, उस वक्त जब मैं बिस्तर में था, अगर खाना बना रहा होता तो शायद प्रांत (आटा गूँदने का बर्तन) में से आटा तिड़क कर बाहर गिर जाता तो पता चल जाता कोई आने को है। वो कुछ दिन यहाँ रहे, मुझे अच्छा लगा, लगता भी क्यों ना, तीन साल में पहली बार तो कोई बठिंडा से आया था, जो मेरे घर रुका। आने वाले अतिथियों में मेरी मौसी, मौसी की पोती यानी मेरी भतीजी, मौसेरा भाई और उसकी पत्नी। मौसेरा भाई अपना सामान और कुछ अन्य काम निपटाने आया था, और इस दौरान सैर सपाटा तो होना ही था, जो हुआ।

 

जागरण जंक्शन इन दिनों ब्लोग्गिंग के एक तेजी से उभरते मंच के रूप में आगे आ रहा है ,,,,,आखिर हो भी क्यों न ..जागरण मंच ने ब्लोग्गिंग को प्रोत्साहित करने के लिए के खासमखास प्रतियोगिता भी रख दी है ….आप भी फ़टाफ़ट बनाईये ब्लोगअऔर जीतिए ……मगर आज तो देखिए कि वहां मालावती जी पर क्या कौन कह रहा है ?

श्री वी कुमार जी image आऊटर सिगनल पर कहते हैं

माला नहीं, पढ़ें मानसिकता

पोस्टेड ओन: March,19 2010 जनरल डब्बा में

 

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने रैली के तीसरे दिन जब दूसरी बार नोटों की माला पहनी तो बात साफ हो गई कि हजारी नोटों की पहली माला मंत्रियों-विधायकों या कार्यकर्ताओं की ओर से आकस्मिक तुच्छ भेंट नहीं थी। सर्वजन को चौंकाने वाली थी लेकिन योजना के मुताबिक नोट गुंथे गए थे। विपक्ष चिढ़ता है तो और चिढ़े, मनुवादी मीडिया (मायावती के शब्दों में) जितनी आलोचना करेगा वोट बैंक जय बोलेगा। वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने दो कदम आगे बढ़कर भविष्य में भी नोटों की माला पहनाने की घोषणा कर डाली, सच मानें, यही है बहुजन हिताय का सारतत्व। बहन जी खुश, मंत्री-विधायक खुश तो प्रदेश की जनता भी खुशहाल।
माला-माल होने के बाद बसपा सुप्रीमो ने प्रदेश में चुनाव की डुगडुगी पीट दी, समय कम है कार्यकर्ता चुनाव में जुट जाएं। झंडा बैनर निकाल लें, आंदोलन करें, जिला मुख्यालयों पर धरना दें, जुलूस निकालें। क्यों, आखिर किसलिए? जनहित में या सरकार के सत्कर्म गिनाने के लिए ? जी नहीं, विपक्ष का पर्दाफाश करने के लिए। सत्ता में तो आप हैं विपक्ष ने क्या गलती कर दी? रैली को असफल बनाने का प्रयास किया, माला की तारीफ के बजाय उसका अपमान किया, जांच की मांग उठा रहे (जो कभी नहीं होने वाली)। फैशन के हिसाब से एक मुद्दा महंगाई भी है लेकिन सत्ता दल और उसके कारिंदे जब महंगाई के विरोध में आंदोलन करें तो जनता किसके द्वार जाएगी। खासतौर से वे पार्जीजन जो माला में हजार-हजार के करेंसी गुंथने की कूबत रखते हों। महंगाई किसकी देन है?

 

कुछ ब्लोग्स की रूपरेखा ..ओह मतलब रंगरूप ही इतना मनमोहक लगता कि बरबस ही मन खिंच जाता है ..ऐसा ही हुआ जब हम रूपम जी के इस ब्लोग पर पहुंचे …बकिया सब और टनाटन हुआ जब उनकी धुन पर मन थिरकने लगा ..आप भी थिरकिए न …

भाई रूपम जी image  प्रेम धुन गाते हुए …

Friday, 19 March 2010

क्षितिज ने पहली बार चादर हटाई है

दिल में अजीब सी उलझन है

पर लगता यूँ है ,कुछ उम्मीद नजर आई है.

सब कुछ भुला देने को मन करता है,

तो ऐसी कौन सी बात याद आई है.

नजरों के सामने भीड़ दिखाई पड़ती है,

पर अन्दर तो दिखती तन्हाई है.

अँधेरा भी है और सन्नाटा भी,

पर देखा तो लगा, कोयल गयी है.

मौसम थमा सा और खुला सा दिखाई देता है,

फिर कहाँ से बिजली कि चमक आई है.

तन में थकन और आँखों में नीद है,

पर होंटों पर जागृत सी मुस्कान उभर आई है.

दिमाग ने मन ही लिया था इसे उदासी,

पर दिल ने कहा खुशी की झलक पाई है.

धरातल भी दिखाई पड़ता है, और आसमां भी,

क्षितिज ने पहली बार चादर हटाई है..........

बहुत कम ही ऐसे ब्लोग्गर हैं आज इस ब्लोगजगत में जो ब्रांड नेम की तरह स्थापित हो चुके हैं उनमें से ही एक हैं हमारे ताऊ जी …इत्ते सारे प्रोजेक्ट ले रखे हैं हाथ में कि कौन सा कब शुरू हो जाए कहा नहीं जा सकता …..कभी पिक्चर , तो कभी ,सम्मेलन ..कभी पहेली तो कभी भजल कीलतन ….तो आज की कीलतन का मजा लिया जाए ….

ताऊ अपने अनेक रूपों में से एक और रूप में भजल कीलतन कलते हुए

image

इस भजल प्रस्तुति के बाद माता रामप्यारीजी ने पधार कर सभी को आशीर्वाद दिया. तत्पश्चात माता रामप्यारी जी के सानिंध्य में भजल कीर्तन का आयोजन हुआ. नीचे उसी अवसर का चित्र और तत्पश्चात भजल कीर्तन.

ऊपर चित्र में कीर्तन करते हुये... बांये से दांये : परमपूज्य माता रामप्यारी जी, तबले पर संगत करती हूई मिस. समीरा टेढी, सिंथेसाईजर पर श्री ललित शर्मा, हारमोनियम पर प्रख्यात भजलगायक ताऊ रामपुरिया, चिमटा बजाते हुये मिस. राजी भाटिया, झांझ बजाते हुये बालक मकरंद, हारमोनियम पर मिस. अजया कुमारी झा और कार्यक्रम के निर्देशन की कमान संभाले हुये श्री खुशदीप सहगल.

 

ललित जी की जितनी बडी मूंछे हैं उतना ही बडा दिल भी है जो चौबीसों घंटे ब्लोगजगत पर हरा होकर टंगा रहता है ..चर्चा के मामले में तो इन्होंने ऐसा कमाल कर दिया है कि सुना है कि चिट्ठाजगत ने एक बंदा एक्स्ट्रा रखा है कि भाई शर्मा जी से पूछ लो आज कित्ते हवाले लगाने हैं …चार सौ या पांच सौ ….मगर आज इनकी तस्वीर ने जाने क्या क्या कह दिया ..

ललित जी मूंछों वाले आज देखिए तो क्या दिखा रहे हैं image

आजादी को छ: दशक बीत चुके हैं, प्रतिवर्ष बजट मे नयी-नयी योजनाओं का आगाज होता है। फ़िर वही नारे लगते हैं गरीबी हटाओ, गरीबी हटाओ। मानवाधिकार की बाते गर्माती हैं वातावरण को 2 रु किलो गेंहुँ-चावल बांटने की योजना का शुभारंभ होता है, कोई भुखा नही मरेगा। सबको रोटी कपड़ा मकान उपलब्ध होगा। कुकुरमुत्ते की तरह गली-गली मे उग आई हैं स्वयं सेवी संस्थाएं। जिसे NGO कहा जाता है। सेवा के नाम पर नोट बटोरे जा रहे हैं। वृद्धाश्रम भी खोले जा रहे हैं, जहां पर निराश्रित वृद्ध रह कर अपने जीवन के बाकी दिन काट सकें। लेकिन यह सब सेवा कागजों मे ही हो जाती  है। मानव और पशु मे कोई अंतर नही है। इसका एक उदाहरण मैने रायपु्र रेल्वे स्टेशन मे देखा जहाँ एक वृद्ध महिला प्लेटफ़ार्म पे पड़ी थी और गाय उसको चाट रही थी और वह गाय को। लोग भीड़ लगा कर इस दृष्य को देख रहे थे। इन्सान और जानवर मे फ़र्क करना मुस्किल था। यह जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए शासन है।

 

 

बीबीसी हिंदी ब्लोग मंच पर बीबीसी हिंदी रेडियो सेवा के संवेदनशील पत्रकार मित्र सामयिक घटनाओं पर बेबाकी और संजीदगी से अपनी बात रखते हैं आप भी यहां पहुंच कर उन पोस्टों को पढ के न सिर्फ़ उन तक बल्कि पूरी दुनिया तक अपना मत वहां रख सकते हैं …आज भाई जुबैर अहमद कह रहे हैं

मोरा गोरा रंग लइ ले!

ज़ुबैर अहमद ज़ुबैर अहमद | शुक्रवार, 19 मार्च 2010, 10:49 IST

मुंबई में रहने वाले हिंदी भाषी उत्तर भारतीय इन दिनों राहत की सांस ले रहे हैं क्योंकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के 'देश भक्त' अभियान का निशाना वो नहीं बल्कि बॉलीवुड में काम करने वाले विदेशी कलाकार बन रहे हैं.

बॉलीवुड में लगभग एक हज़ार विदेशी जूनियर कलाकार काम करते हैं. जिनमें से अधिकतर गोरी नस्ल की यूरोपीय लड़कियां होती हैं.

पिछले हफ़्ते राज ठाकरे के अभियान की शुरुआत हुई फ़िल्म क्रूकेड के सेट पर. इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन भी हैं और 136 विदेशी जूनियर अभिनेत्रियाँ और डांसर काम रही हैं.

एमएनएस के कार्यकर्ता सेट पर गए और विदेशी कलाकारों से भारत में क़ानूनी तौर पर काम करने के दस्तावेज़ दिखने की मांग की. पार्टी का दावा है कि ये विदेशी जूनियर आर्टिस्ट स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं इस लिए इन्हें बॉलीवुड में काम करने की इजाज़त नहीं होगी.

 

इन्होंने अपना नाम अपने ब्लोग पर लिखा हुआ है direct from heart …तो हमने भी दिल लगा के पढ लिया और ले आए आपके लिए उनकी ये पोस्ट बांचिए …..

डायरेक्ट दिल से image जी को पढिए …..

उसका आना

वो आये और आ कर रह जाए
तो उसका आना सर आँखों पर
दुनिया की रस्मों को तोड़ कर आये
तो उसके आने की नवाज़िश
वो आये केवल मेरा मन रखने के लिए
तो मैं उसके बिना ही जी लूँगा
वो आये मेरी बन कर रहने के लिए
तो दुनिया भूला दूंगा
वो आये मोहब्बत के एहसास के लिए
तो उसकी चाहत में सब लूटा दूंगा!!!

देखिए जी …ई लाईव राईटरवा एकदम सुस्त है …कम से कम हमारी धुंआधार टाइपिंग को तो नहींये झेल पाता है ..टाईप करते करते बीच बीच में इससे पूछना पडता है …का हो राईटर …स्पीड ठीक है न …बताईये राईटर नाम रखने से कौनो राईटर हो जाता है का ??

रविवार, 14 मार्च 2010

आज तो पोस्टों की चर्चा …हां चर्चा कर ही ली …(पोस्टों की चर्चा )

 

ओईसे तो ब्लोग पटरी बिछाने का काम हमारा खूब जम जमा के चल रहा था पर सोचे कि बहुत लोग कह रहे हैं कि का जी ..ई आप लोग सब संगी साथी मिल के खाली लिंक पटक कर कहते रहिएगा कि चर्चा कर दिए हैं । अरे चर्च का मतलब तनिक चर्चियाईये भी …तो हम सोचे कि जब ई गूगल बाबा सबको एक ठो नयका कैमरा थमा दिए हैं ..अपना अपना ब्लोग का थोबडा सुंदर करने के लिए और हमने भी फ़्री सेवा का सुनते ही फ़ौरन उसका लाभ उठाते हुए ..इसका रंग रूप बदला है ..तो काहे नहीं तनिक स्टाईल भी बदला जाए   तो लीजीये …बामुलाहिजा …बाअदब …होशियार ..खबरदार ….चर्चा शुरू  होती है …

भाई मिथिलेश दूबे को पिछले दिनों ……एक ही विषय पर खूब पेन रगड रगड के लिखने के कारण ….संसद तक से नोटिस आ गया कि …भाई अब तो उनको भी तैंतीस नंबर …यानि पासिंग मार्क्स मिल गया है ,…तो आप काहे नहीं गाडी आगे बढाते हैं ….हमने भी फ़ौरन उन्हें ..ललकारा ..कि चलिए ..अब फ़टाक से कुछ अईसन लिख डालिए कि ..लोग कह उठें ..दूबे दुने चौबे ….लिख रहा है गजबे …..और देखिए कमाल …का लिखे हैं

भाई मिथिलेश दूबे अपनी इस पोस्ट में पूछ रहे हैं कि  image

'हिन्दू' शब्द मानवता का मर्म सँजोया है। अनगिनत मानवीय भावनाएँ इसमे पिरोयी है। सदियों तक उदारता एवं सहिष्णुता का पर्याय बने रहे इस शब्द को कतिपय अविचारी लोगों नें विवादित कर रखा है। इस शब्द की अभिव्यक्ति 'आर्य' शब्द से होती है। आर्य यानि कि मानवीय श्रेष्ठता का अटल मानदण्ड। या यूँ कहें विविध संसकृतियाँ भारतीय श्रेष्ठता में समाती चली गयीं और श्रेष्ठ मनुष्यों सुसंस्कृत मानवों का निवास स्थान अपना देश अजनामवर्ष, आर्याव्रत, भारतवर्ष कहलाने लगा और यहाँ के निवासी आर्या, भारतीय और हिन्दू कहलाए। पण्डित जवाहर लाल नेहरु अपनी पुस्तक 'डिस्कवरी आफ इण्डिया' मे जब यह कहते है कि हमारे पुराने साहित्य मे तो हि्दू शब्द तो आता ही नहीं है, तो वे हिन्दूत्व में समायी भावनाओं का विरोध नहीं करते। मानवीय श्रेष्ठता के मानक इस शब्द का भला कौन विरोध कर सकता है और कौन करेगा।

 

इधर हमको लगने लगा है कि कुछ मित्र लोग आभासी दुनिया ..आभासी दुनिया कर के छाती पीट रहे हैं …उतने ही डबल स्पीड से ब्लोग्गर मीट का आयोजन हो रहा है । जबलपुर में भाई महेन्द्र मिश्रा जी ने एक धमाकेदार मीट कर डाली । और सबसे बढिया बात ई रही कि लखनऊ से महफ़ूज़ जी भी बिना टरेन मिस किए ….इस मीट के लिए भर भर के मीट मसाला लेकर पहुंचे ….फ़ोटो शोटो का मजा उठाईये

भाई महेन्द्र मिश्र जी ने जबलपुर ब्लोग्गर मीट की रंगारंग फ़ोटो शूट पेश किया है image


ब्लागरो के समक्ष मीडिया ...

 

पिछले दिनों श्री रवि रतलामी ने दैनिक जागरण के नए ब्लोग्गिंग प्लेट्फ़ार्म जागरण जंक्शन के बारे में बताया था और हमने भी वहां ब्लोग बकबक के नाम से अकाऊंट खुलवा लिया …..बहुत बढिया मंच है …आज उसी मंच पर भाई संजय जी एक घटना का जिक्र करते हुए देखिए क्या बता रहे हैं

संजय उपाध्याय जी image

जागरण जंक्शन पर अपने ब्लोग में बता रहे हैं कि आज किस तरह से इंसान, समाज,और दोनों की फ़ितरत बदल गई है

 

आदमी। फितरत। समाज। तीनों बेहतर हो तो फिर मान लीजिए कि जीवन धन्य हुआ और आप जीवन की जंग जीत गए। लेकिन ऐसा अब शायद ही कहीं होता है। होता भी है कि नहीं यकीन से कोई नहीं कह सकता। मैने देखा है कि जवानी की दहलीज को कैसे बेकरार मुसाफिर पार करते हैं और न जाने कितनी सांसे थम जाती है। यदि किसी कि सांस बची तो जिल्लत भरी। आह भरी। दर्द की याद भरी। उपर से हर उस सफर की निशानी से जूझने की जिद से लहूलुहान जिगर के साथ। यह कैसी सांस और यह कैसा जीवन। बात उस प्यार के सफर की और यार की बेकरारी की जो अचानक से जीने का मतलब ही छीन लेता है। वर्तमान में हम जिस दुनियां में जीते हैं। हर दिन नई चुनौती है। कहीं गरीबी है तो कहीं यारी है। कही चैन है तो कहीं बेकरारी है। इसी बेकरारी से जूझता एक प्रसंग बताता हूं बिहार के पश्चिम चम्पारण जिलान्तर्गत चौतरवा थाना के अधीन है एक गांव कौलाची। गांव में एक बिन ब्याही मां है, जो अपनी लाड़ली को बाप का नाम दिलाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री तक का दरवाजा खटखटा चुकी है। उसके चेहरे पर बेबसी साफ दिखती है। सीने से अपनी बच्ची को लगाए एक झोपड़े में अपने उस प्यार के बेकरार सफर में खोयी रहती है। कोई बोलता है तो बोलती है वरना खामोशी को ही अब अपना हमसफर मान बैठी है। ऐसा नहीं है कि इस युवती ने अपने प्यार को यूं ही छोड़ दिया। जब यार ने उसे प्यार के सफर से निकाल फेंका तो उसने अबला होने का भ्रम तोड़ा न्यायालय गई। सीएम के दरवाजे गई। यार जेल गया और फिर पुलिस ने कोरम पूरा किया। अर्थात् यह अबला एक बार फिर अबला हो गई और अपनी बच्ची के लिए बस बाप का नाम ढूंढते चल रही है। ऐसे में एक बार फिर आदमी, समाज और उसकी फितरत का घिनौना रुप दिखा है। अब देखना यह है कि कबतक समाज के लोग महिलाओं को अपनी बेकरार सफर का रास्त बनाएंगे।

 

बीबीसी हिंदी सेवा से हमारा नाता एक श्रोता के रूप में पिछले लगभग बाईस सालों से है ..अब नेट पर भी उनसे बतियाते रहते हैं …बीबीसी ब्लोग के मंच पर बीबीसी संवाददाता राजेश जी हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट खिलाडियों पर गिरी गाज के मामले पर कुछ बता रहे हैं

 

अच्छी-ख़ासी टीम का यूँ बिखरना....

पंकज प्रियदर्शी पंकज प्रियदर्शी | गुरुवार, 11 मार्च 2010, 11:08 IST

पाकिस्तान क्रिकेट में जो भी हो रहा है, उसे आप बवाल कहें, खलबली कहें या फिर सनसनी, एक क्रिकेट प्रेमी होने के नाते मुझे बहुत अफ़सोस है.

अफ़सोस इसलिए नहीं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कुछ नामी-गिरामी चेहरे पर पाबंदी लगाई गई है. बल्कि इसलिए क्योंकि क्रिकेट के शीर्ष पर पहुँचने का दम रखने वाली इस टीम का क्या हाल हो गया है.

एक समय घातक तेज़ गेंदबाज़ी और मैदान पर आक्रामकता का दंभ एशियाई देशों में नहीं दिखता था. ये वो दौर था जब मैदान पर घायल होने वाले एशियाई खिलाड़ियों की सूची काफ़ी लंबी थी.

इन दिनों फ़िर से संकंलकों के मुख्य पृष्ठों पर धर्म संप्रदाय के चेहरे चमकने लगे हैं और इन बातों पर बहस भी खूब चल रही है । मुझे कोफ़्त तब होती है जब कुछ लोग दूसरों को गलत साबित करने की कीमत पर खुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं । खैर उनका शायद यही रास्ता हो । मगर भाई रत्नेश बहुत सशक्त ढंग से कुछ प्रश्नों के द्वारा सरकार , समाज और सबके सामने कुछ सवाल रख रहे हैं …

 

रत्नेश त्रिपाठी image

अपनी इस पोस्ट में गजब के प्रश्नों को उठा रहे हैं …आप भी देखिए

 अफजल गुरू देशभक्त है, भगत सिंह व साध्वी आतंकवादी है।
 सिमी, इंडियन मुजाइद्दीन समाज सेवा में लगे संगठन है, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विष्व हिन्दू परिषद आतंकवादी संगठन है।
 गोधरा-कांड एक दुघर्टना है, गुजरात दंगे सुनियोजित हैं।
 15 प्रतिशत मुसलमान इंसान है, 85 प्रतिशत हिन्दू कूड़ा-कचरा हैं।
 मालेगांव धमाके ही सच्चे धमाके हैं, अन्य जगहों पर हुए धमाके दिवाली के पटाखे हैं।
 मालेगांव में 5 मुसलमानों की मौत बहुत बड़ी घटना है, दूसरे स्थलों पर सहस्रों की संख्या में मौत के शिकार हिन्दू केकड़े हैं।
 मुसलमानों के लिए आरक्षण, हिन्दुओं के लिए धमाके।
 हज के लिए करोड़ो रूपये, अमरनाथ यात्रा के लिए फूटी कौड़ाी नहीं।
 इस्लामी आतंकवाद का समर्थन धर्मनिरपेक्षता है, भारतीय को मारना देशप्रेम हैं।
 बाबरी ढ़ांचे का गिराया जाना एक मुद्दा है, सैकड़ौं हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करना विकास कार्य है।
 मुसलमान की मौत मृत्यु है, हिन्दू की मौत नियति हैं।
 हिन्दुओं को नियमों का पालन करना चाहिए, मुसलमानों के लिए कोई नियम नहीं।
 अल्लाह परमेश्वर है, राम एक काल्पनिक पात्र है।
 क्या यह हमारे सपनों का भारत हैं।
वाकई क्या ये हमारे सपनों का भारत है ?

पता नहीं ये इस देश की बदकिस्मती है कि यहां के लोगों की नियति …किसी न किसी वजह से आम अवाम झुलसती ही रहती है , कभी हादसे , कभी दंगे ..तो कभी कुछ और …बरेली इन दिनों अशांत चल रहा है …और उसी के बारे में बात करते हुए अजय सिंह कहते हैं कि

 

भाई अजय सिंह image

अपने ब्लोग में बरेली में फ़ैली आग पर कुछ कह रहे हैं

 

बरेली की सूरमई पहचान  पिछले 13  दिनों से दंगों की आग में झुलस रही है। इस आग पर काबू पाने के लिए शासन स्‍तर पर लगातार तमात कवायदें ही जा रही हैं लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिली। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्‍या वहां का लोकल प्रशासन बेहद कमजोर है या पब्लिक में उसके मंसूबों की गलत छवि घर कई है। पुराने अधिकारी बदल गये और जो नये पहुंचे उनके सामने इन दो अहम सवालों का जवाब ढूढ़ने की चुनौती है। नये अधिकारियों की ओर से लगातार कोशिशें चल रही हैं और शासन के अधिकारी आसमान के जरिये हालात की निगरानी कर रहे हैं। इसके बावजूद हिंसा की चिंगारी रह-रह कर भड़क रही है। इन हालातों में यह जरूरी हो गया है कि दंगे पर काबू करने के प्रयासों के साथ ही नागरिकों के दिलों को जीता जाय। इसके लिए दोनों पक्षों के मानिन्‍द लोगों के साथ बैठक कर उन्‍हें अमन और भाईचारा बढ़ाने के लिए आवास से अपील की जाय। हर किसी को इस बात का भान कराया जाय कि प्रशासन और शासन किसी के पक्ष में नहीं बल्कि निष्‍पक्ष भावना से शांति बहाली के प्रयास में लगा है। इस कार्य में हिन्‍दू-मुस्लिम, सिख, इसाई सभी धर्र्मो के धर्मगुरुओं को भी आगे आने की जरूरत है। वहीं सभी राजनीतक दलों को एक मंच पर आकर अमन का पैगाम देना चाहिए न कि उन्‍माद को बढ़ाने के लिए हवा।

कहते हैं कि जब शब्द नहीं बोलते तस्वीर बोलती हैं …कल विवेक भाई के हाथ में नोटों के असंख्य बंडल से भरा हुआ गेराज आ गया था आज बंडल बंडल अमिताभ बच्चन आ गए ….हमारे लिए तो दोनों ही बंडल एक से …भारी भरकम दूर दूर से निहारते रहे …..आप भी अपने नैन जुराईये ..

 

विवेक भाई image

आजकल खूब फ़ोटो शोटो दिखा रहे हैं ….कल नोटों के बंडल लगाए थे आज अमिताभ बच्चन के बंडल लगा दिए हैं

अपने देश में हुए बम धमाकों की प्रतिक्रिया में तो हमारी कलम खूब चलती है मगर ऐस बहुत कम होता है कि पडोस में हुए किसी ऐसी घटना पर हम कभी कुछ ज्यादा कहते हों …भाई सूर्यकांत गुप्ता जी इसी बात पर  गौर फ़रमाने की बात अपनीइस  कविता में कह रहे हैं

 

श्री सूर्यकांत गुप्ता जीimage

 कुछ गौर करने को कह रहे हैं

 

इस बात पे हम सभी करें गौर

अभी अभी देख रहा था दूरदर्शन समाचार 

बताया जा रहा था, पकिस्तान में बम विस्फोट से

तकरीबन 47 लोग मारे गए व कई घायल हो गए 

मगर वहाँ के ऊंचे ओहदे वाले कह रहे हैं इसमें भारत का हाथ है 

तत्काल मन में विचार घुमड़ा;

इस बात पे हम सभी करें गौर 

पनाह लिए हुए हैं "पाक" में ही आतंकवाद के

बड़े बड़े सिरमौर, 

यह जानते हुए भी वहाँ के कर्णधार 

छोड़ दिए हैं आरोपों का दौर

 

आगे की कविता उनके ब्लोग पर पढिए ..

आज सुबह से ही संकंलकों के पहले पन्ने पर दर्ज़ इस खबर भी सबकी नज़र जा रही है और हम तो लोट लोट कर मरे जा रहे हैं जबसे पता चला है कि किसी ब्लोग्गर को तीस करोड हिंट भी मिलता है । अब इत्ते बडी जनसंख्या का फ़ायदा  आप ओलंपिक में उठा लो कोई गम नहीं …..मगर यार ब्लोग्गिंग में भी …तीस करोड हिंट पाने वाला ब्लोग्गर …..छोडो या र था तो था ..हमें नहीं पता था तो सोच कर फ़ूल रहे थे कि ओह आज तो पोस्ट को पढने वालों की संख्या सौ के पार हो गई ...मगर श्री जगदीश्वर चतुर्वेदी जी ने सारा भ्रम तोड कर रक दिया …..कैसे अरे नीचे पढिए न ?

जगदीश्वर चतुर्वेदी जी image

अपनी पोस्ट में मिलवा रहे हैं देखिए किनसे

विश्व के श्रेष्ठतम ब्लॉगर की चुनौती बोलो चीनी शासको बोलो

(विश्व का श्रेष्ठतम ब्लॉगर हन हन)

अरविंद मिश्रा जी ने टिप्पणी मिटौव्वल के मुद्दे पर एक बहस छेड दी , इसकी शुरूआत तो कल की पोस्ट से हुई थी , मगर कल पंचायत का फ़ैसला नहीं आ सका …आज उसकी प्रति हासिल हो गई है ….सो उन्होंने उसे सबके सामने रख दिया है …लगता है बहस पार्ट टू चालू हो गई है …आप खुदे देखिए ….तब तकले अरविंद जी जरा ई पुस्तक बांच लें ….ई लोकस पर अरविंद जी जाने कित्ते बरस से फ़ोकस किए हुए हैं …पता करते हैं कि …आखिर है का ई मैगजीन में ..???

 

अरविंद मिश्रा जी ने image

अपनी पोस्ट में टिप्पणी को सहेजने/मिटाने के मुद्दे को आगे बढाते हुए कहा कि

 

टिप्पणियाँ चिट्ठाकार को भी नियमित और मर्यादित करने/रखने /रहने  की क्षमता रखती हैं -कहीं  अंकुश  बनती हैं तो कहीं सचेतक भी लगती हैं .नहीं तो कई चिट्ठाकार निरंकुश ही न होते  जायं? मेरी दो टिप्पणियाँ ब्लॉग मालिको पर इतनी भारी पड़ गयीं कि उन्हें अपनी पूरी पोस्ट ही डिलीट करनी पड़ गयी -अब पुनः संदर्भ देकर मैं कोई वितंडावाद नहीं शुरू करना चाहता मगर मुझे इस बात का अफ़सोस जरूर हैं  कि मेरे पास अब वे ऐतिहासिक  टिप्पणियाँ(बात रखने के लिए निर्लज्ज आत्मप्रशंसा ही सही )  सुरक्षित नहीं हैं,याद कर भी उन्हें वापस लाना मुश्किल हैं - गेहूं के साथ घुन बन पिस गयीं वें ! मगर हाँ इसी विमर्श से उन्मुक्त जी द्वारा यह एक साईट सुझा दी गयी है जिसे मैंने अपना भी लिया है और जोरदार सिफारिश है कि जो भी अपनी टिप्पणियों पर जान  छिडकते हैं उन्हें इस साईट पर जाकर पंजीकरण करा लेना चाहिए! समीर भाई तो संत हैं! नेकी कर दरिया में डाल और परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर वाली परम्परा के सचमुच !

 

तो आज के लिए एतना  ही तनिक बताया जाए कि ई ट्रायल कैसा रहा ….???????

आगे का पूरा ट्रेवेल ट्रिप उसी पर डिपेंडेड है सो जान लीजीए …….

रविवार, 7 मार्च 2010

कुछ नई रेलों की नई पटरियां (ब्लोग लिंक्स , दो लाईना , और क्या )




आज बहुत दिनों बाद फ़िर पटरियां बिछाने का मन हुआ , मगर जब स्टेशन पर पहुंचा तो सोचा कि , सभी सुपर फ़ास्ट, शताब्दी , राजधानी, गरीब रथ , दोरांतो तो धडाधड दौडी जा रही हैं , कुछ छोटी छोटी सुंदर सी रेलें इंतजार करती रह जाती हैं कब पटरी बिछें और उन्हें भी दौडने का मौका मिले तो सोचा आज क्यों उन्हीं , अनछुई , अनपढी , रेल पोस्टों को आपसे मिलवाया जाए........तो मिलिए न



पढने बैठा तो पहली पोस्ट यही पढी है आज,
इस पोस्ट को देखिए कौन सा खोल रहे हैं राज ॥




इतनी सुंदर बात भला कौन कहां कह पाता ,
पढिए और बताईये इसको क्या कहा है जाता ॥



कुछ सोच कर ही हमने इनको भी चुना है ,
आप भी सुनिए कि इन्होंने क्या सुना है ॥




बस देखता हूं पोस्टें नहीं देखता नाम ,
देखिए इन्होंने कब से नहीं देखी ऐसा शाम ॥




इस पोस्ट को भी देखिए सुन हमारी फ़रियाद,
पढिए और जानिए ये कर रहे हैं किसको याद ॥




इहां पूछ रहे सचिन जी कईसे भरेंगे जखम ,
आप ही कुछ बतलाईये, का बतलाएं हम ॥



इहां पर बुकनु के तमाशे का मजा लीजीए ,

रूटीन से हट कर भी तो पढा कीजीए ॥



बीमार पडो तो कभी न लो पंगे ,
क्रोसिन खाओ और हो जाओ चंगे ॥



प्रेम का पाठ,इहां पढाया जा रहा है,
पोस्ट पर पहुंचिए देखिए कौन पढा रहा है ॥



गर्भ में कविता एक पल रही है ,
देखिए यहां लव की कलम खूब चल रही है ॥



सचिन यहां करा रहे पास फ़ेल की पढाई,
अरे नहीं यार ये तो है कुछ तैंतीस प्रतिशत की लडाई



पढते पढते ये पोस्ट भी मुझे मिली थी आज ,
इस पोस्ट के अलग हैं अंदाज और मिज़ाज़ ॥





यहां अमित जी किसकी जवाबदेही तय कर रहे हैं ,
ब्लोग्गिंग को एक दिशा देने का काम यह कर रहे हैं ॥



इन्होंने सोचा कि ये उनके बिन जी न पाएगा ,
सारी बात उसे पता चलेगी , जो यहां पर जाएगा ॥




अनकही बातों में आज बिखरा है प्रीत का रंग ,
हमने पढ ली आप भी पढिए मन को करिए चंग ॥



पूनम जी ने इस पोस्ट में संदेश दिया बेजोड,
देखिए कौन कहां पर हिंदी को चला है छोड ॥



यहां पर देखिए क्या होता है ज्यादा पैसे का नतीजा ,
किस्सा बताया गया है , एक था चाचा , एक भतीजा ॥

सोमवार, 1 मार्च 2010

होली है भई होली है ...अब है तो है .....और अब तो हो .ली ..ताजा समाचार ..

बस देखिए जी अभी अभी के ताज़े समाचारों के अनुसार ..झाजी की होली ..कुछ यूं ....होली ..आप खुदे देखिए ..


(बुलबुल ....रंग गुलाल को ...... चैक करते हुए कि आखिर इस पैकेट मे था ऐसा क्या....जो इसने ...हमारे दोनों झाजी ..........भैया और पापा का ऐसा हाल कर दिया .....




(बुलबुल बडे झाजी ...अपने पापा को नजदीक से निहारते हुए ....ओह पापा आप तो भांग खा के पूरे भांग के गोले की तरह लग रहे हो..............)

(छोटे झाजी .....गोलू जी ..........ओह जब तक पापा पानी गरम करते हैं ...ऐसे ही बैठ कर डोरेमोन,और टौम एंड जैरी को हैप्पी होली बोल देता हूं ।

शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

हमने आज इनको देखा , और खींच दी सारी रूपरेखा , (अरे वही ब्लोग लिंक्स यार )

सोचा था कि आज आपको हम अपना फ़ाग राग सुनाएंगे , मगर आज चर्चा का मूड निकल आया तो हाज़िर है फ़िर ....................................

रंग भर के ले आये दीपक आज अपना मशाल ,
आप देखिए दु लाईना में सबका किया है कैसा हाल ॥


ब्लोग्गर के साथ pspo का अजब लगाया कनेक्शन ,
खुशदीप भाई ने फ़िर से छेड दिया वही डिस्कशन



इनकी हर अदा एक शोला एक आग ,
इन्होंने भी मनाई ब्लोगजगत की फ़ाग ॥



और भला क्या हो अच्छा जब दिन हो शनिवार ,
ताऊ की पहेली को यहां बूझिए सरकार ॥



यहां जानिए कि खुद को एक सफ़ल ब्लोग्गर कैसे बनाएं ,
फ़टाफ़ट कुछ नुस्खे आप , यहां सीख के आएं ॥



अब भी नहीं हुए सफ़ल तो यहां पहुंच जाईये ,
कह रहे हैं जो प्रभात जी वो गुण अपनाईये ॥



कई बातें होती हैं दिलचस्प कुछ होती हैं अजीब ,
राज भाई बता रहे हैं कौन है सबसे गरीब ॥



यहां सुरभि ने कुछ खूबसूरत पंक्तियां हैं पढवाई,
आप भी खुद पहुंचिए और देखिए न भाई ॥




हाय गंगा हुई पोखरिया , ज्ञान जी ने बतलाया ,
गंगा मईया की दुर्दशा ने मन को बहुत रुलाया ॥



आज जाना कि आखिर क्या होती है होली ,
जो प्रेम की हो ली , वही होती है होली ॥




जब शब्द नहीं बोलते तस्वीरें बोलती हैं ,
और जाने किस किस के कैसे राज खोलती हैं ॥




सुंदर ब्लोग , सुंदर पोस्ट , हम रह गए दंग ,
वृंदा कह रही हैं छूट रहे हैं रंग ॥



चाहे लाख रखना शिकायत, या गिला रखना ,
बस इतनी इल्तज़ा है , शब्दों का सिलसिला रखना ॥



यहां बताया राजीव भाई ने , होली मेरे गांव में ,
आप पढिए और देखिए रंगो की छांव में ॥


सौम्या की ये पोस्ट भी मुझे लगी कुछ खास,

देखी कैसे हैं छोटी आंखें और ,बडा आकाश ॥



यहां देखिए का कह रहे हैं अमर बाबू डागदर ,
इनके इस ब्लोग की हुई हमें आज ही खबर ॥



कहने को कुछ शब्द हैं मगर शानदार है बात,
इससे सुंदर पोस्ट फ़िर और क्या मिलती आज की रात ॥



डा. साहब ने आज अपनी एक पोल है खोली,
जानिए कि उन्होंने बचपन में क्यों नहीं खेली होली




कमीने में बोला शाहिद ने फ़ , अब जाके हुआ असर,
आज अजित भाई भी फ़ का ही करा रहे हैं सफ़र ॥



जाईए मिसर जी की पोस्ट को लीजीए आप लपक,
देखिए उनको किसने कैसे बना दिया बुडबक ॥




इहां शास्त्री जी सजा रहे हैं , अपना चर्चा मंच ,
जाईये देखिए पढिए , पोस्टें , एक से एक टंच ॥



श्यामल जी ने इस पोस्ट में दोहे हैं होलियाए,
जिन्हें जिन्हें पढना हो , वो ये लिंक पकड के जाए ॥




हिंदी ब्लोगजगत में अबके कुछ ऐसे मने ये होली ,
सभी ब्लोग्गर मिल कर बोलें , प्रेम प्यार की बोली



तो इसी सुंदर इल्तजा और दुआ के साथ हम आप सबको होली की मुबारकबाद देते हैं और इश्वर से कामना करते हैं कि चाहे लाख मतभेद हों , बहस हो , विमर्श हो , और क्रिया प्रतिक्रिया हो ...मगर हिंदी ब्लोग्गिंग जिंदाबाद होती रहनी चाहिए ...वो होती ही रहेगी ॥॥..........है न ?????????

शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

आज फ़िर फ़ुर्सत में हम कुछ ब्लोग्स पढ गए, और साथ साथ उनके लिंक्स हत्थे चढ गए ( कुछ ब्लोग लिंक्स )

जी हां भाई अब तो यही कहना पडता है कि इन ब्लोग्स को हमने घुस घुस कर पढ लिया , काहे से कि चर्चा तो हमारी होती नहीं है न ये .....अरे चर्चा हम करते भी नहीं हैं भाई , तो बस आप भी इन पोस्टों की पूंछ ( अरे हम पूंछ तो पकड के ले ही आए हैं न जी ) पकड के जाईये और सब घूम घाम के आईये न जी


राज भाई पहुंचे वापस घूम के अपना देश,



सबके प्यार में देखो बिक गया गबरू जवान,



लैसी मारी जाती है लंगी , और कैसी जाती टांग है अडाई ,



इस पोस्ट पर कैसी बकवास मची है ,



डूबे जी ने कर दी है पिक्चर एक रीलीज़ ,



क्यों कई लोग अपनी टीप बक्से में लगा रहे हैं ताला ॥


ब्लोग जगत में देखिए महाशिवरात्रि का पर्चा ,



आज नहीं गज़ल शेर , पर कलम में वही रवानी,



वकील साहब ने आज फ़िर लिखा है कमाल ,



एक जरूरी पोस्ट आप अवश्य पढें श्रीमान ,



पोस्ट पढते पढते डूब गया तन मन ॥



गगन जी कुछ अलग सी बात बताने चले हैं ,



सुंदर सुंदर पंक्तियां , छाई फ़ाग की बदरिया ॥


भैय्या ई अंगुली जाने किसका करे विरोध , किसका करे सपोर्ट ॥



जिन्हें मनाना हो इस बार , वो जाके सीख ले ॥



सबको अपने नाम का इतिहास कहां पता होता है ,



देखिए कौन कौन पढ आया कौन आया टिपियाय ॥



पहुंचिए ,पढिए, टीपीए कोई नहीं व्यवधान



बस पढना और आनंद लेना , टीपना मना है भाई ॥



अपनी भी ब्लोग पोस्ट आज छपी है भाई,



डा साहिबा को पढ के यहां पर टिपियाईये न ॥



हिंदी को बर्बादी के रास्ते पर मत ले जाईये,




चंदन जी कर रहे हैं कुछ बातें इधर उधर की ,



वेलेन्टाईन डे पर पढिए कुछ लव के फ़ेवर में ,



अरे बाप् रे कैसी ये चेतावनी दे रहा है ब्लोग बुखार



जिनको जिनको पता हो जवाब , जरूर दे के आना ॥


तो आज के लिए इतना ही जी राम राम



सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

आप देखिए और पहचानिए कौन शामिल हुए दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक में


दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक में शामिल हुए सभी मित्र ब्लोग्गर्स को जितनी खुशी हुई और उसके बाद आई रिपोर्टों पर हिंदी ब्लोगजगत के तमाम साथियों ने जिस तरह से बधाई और शुभकामनाएं दीं उसने मुझे विवश कर दिया है कि जो पोस्ट मैं शाम को लिखने वाला था वो अभी ही डाल रहा हूं मगर नहीं यदि आप ये सोच रहे हैं कि ब्लोग्गर्स मीट की रिपोर्टिंग मैं शुरू करने जा रहा हूं तो उसके लिए आपको शाम तक का इंतजार तो करना ही पडेगा ये पोस्ट तो सिर्फ़ इसलिए डाल रहा हूं क्यों कि कल आप सबने उलाहना दी थी कि मैंने फ़ोटो तो लगा दी मगर नाम नहीं बताया , एक मित्र ब्लोग्गर ने शिकायत की कि उनका नाम ही किसी रिपोर्ट में नहीं आया , तो भाई आप सब थोडा सा समय दीजीए मुझे। दरअसल ब्लोग्गर्स बैठक की रिपोर्ट ,मेरी रिपोर्ट के बाद आपको किसी बात की कोई शिकायत नहीं रहेगा विश्वास रखिए मैंने अपने मस्तिष्क कंप्यूटर में सब कुछ सेव किया हुआ है और सब धीरे धीरे बाहर आएगा अभी तो फ़िलहाल सिर्फ़ ये बता रहा हूं कि इस बैठक में किन किन मित्रों ने शिरकत की , बिल्कुल संक्षेप में

श्री मोईन शम्सी जी
श्री विनीत उत्पल जी
श्री राज भाटिया जी
श्री सरवत जमाल जी,
डा.टी.एस .दराल जी ,
श्री राजीव तनेजा जी,
श्रीमती संजू तनेजा जी,
श्री मसीजीवी जी
श्रीमती कविता वाचक्नवी जी,
श्री अविनाश वाचस्पति जी,
श्री सतीश सक्सेना जी,
श्री अमित गुप्ता ( जिन्हें आप अंतर सोहिल के नाम से जानते हैं )
श्री पद्म सिंह जी ,
श्री खुशदीप सहगल जी,
श्री विनीत कुमार जी ,
श्री तारकेशवर गिरि जी,
सुश्री प्रतिभा कुशवाहा जी,
पं. डी .के शर्मा "वत्स " जी ,
श्री प्रवीण पथिक जी ,
श्री मिथिलेश दूबे जी,
श्री यशवंत मेहता जी
श्री निशांत त्रिपाठी जी,
श्री विनोद कुमार पांडेय जी,
श्री नीरज जाट जी ,
श्री मयंक सक्सेना जी ,
श्री एम .वर्मा जी,
श्री कनिष्क कशयप जी
और अंत में मैं खुद अजय कुमार झा ,

और दैनिक जागरण से हमारी बैठक को कवर करने आए मित्र दास जी


सबसे नीचे बाएं से दाएं
प्रतिभा कुशवाहा, संजू तनेजा, प्रवीण पथिक, अजय कुमार झा, विनीत कुमार, अविनाश वाचस्पति, अंतर सोहिल,
तारकेशवर गिरि

उससे ऊपर

डा.टी एस दराल, सतीश सक्सेना, राज भाटिया,विनोद पांडेय, सरवत जमाल, मिथिलेश दूबे, पं. डी के शर्मा वत्स ,

और सबसे आखिरी पंक्ति में ,

पद्म सिंह, राजीव तनेजा, खुशदीप सहगल और नीशू तिवारी

अब ये मत कहिएगा कि वो पीछे या वो आगे क्यों खडे हैं, भाई मैंने ये फ़ोटो नहीं खींची है , ये दैनिक जागरण के पत्रकार बंधु ने खींची है



इसमें बाएं से दाएं हैं , राजीव तनेजा, संजू तनेजा, कविता वाचक्नवी और मोईन शम्सी


उठते हुए मोईन शम्सी ,और कुछ सोचते हुए मसीजीवी

इस चित्र में नीली पीठ वाले विनीत कुमार और फ़ोन सुनते आधे तारकेशवर गिरि, मैं खुद यानि अजय कुमार झा , साथ खडे खुशदीप भाई से शायद ये कहते हुए ...अमा भाई मियां जब आप इत्ते लंबे हो ही तो फ़िर टंकी पर चढने से अच्छा तो है कि आपही के कंधे पर चढ जाया जाए ,प्रतिभा कुशवाहा,राजीव तनेजा, नीशू तिवारी,विनोद पांडेय,प्रवीण पथिक ...इधर वाले ...सब अगली किसी फ़ोटो में , इनके अलावा भाई नीरज जाट , यशवंत मेहता, मयंक सक्सेना, एम वर्मा जी, और कनिष्क जी की फ़ोटुएं भी हैं ..उन्हें भी दिखाएंगे जी । अब बस आप तब तक फ़ोटो और ब्लोग्गर्स को मिला मिला कर पहचान करिए तब तक हम रिपोर्ट की तैयारी शुरू करते हैं । और क्या अभी रिपोर्ट शुरू कहां की है जी

एक बात चलते चलते बता दें , भाई खुशदीप सहगल ने संदेशा दिया है कि उनकी लिखी हुई पोस्ट नेट कनेक्शन की बेवफ़ाई की भेंट चढी हुई है फ़िलहाल और दूसरी ये कि अब तक मिली खबर के अनुसार
दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, नई दुनिया, अमर उजाला और अन्य कुछ समाचार पत्रों में इस ब्लोग्गर्स बैठक का सचित्र जिक्र किया गया है , वो भी दिखाएंगे आपको ।

हां रिपोर्ट आपको मेरे दूसरे ब्लोग कुछ भी कभी भी पर पढने को मिलती रहेगी ॥



शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

ये पोस्ट चर्चा नहीं सिर्फ़ मेरे द्वारा पढी गई कुछ पोस्टों का लिंक है आप भी पढ सकते हैं

मुझे लगता है कि चिट्ठाचर्चा के नाम से इतनी उठापटक चल रही है , अब तो सीधे सीधे इसे यही कह दूं कि ये रही उन पोस्टों की लिंक जो आज मैं पढते पढते लगा पाया । अब इसका मतलब ये कतई न लगाया जाए कि इसके अलावा कुछ नहीं पढा क्योंकि मैं कितना और कितने ब्लोग्स पढता हूं , कहां कहां जाकर पढ लेता हूं , इसका अंदाज़ा तो अब मुझे भी नहीं रहा ,खैर छोडिये , आप तो ये देखिए



कल मिलेंगे ब्लोग्गर्स बंधु, बस बीते आज की रात ॥


इसे आज नहीं पढा तो क्या पढा दोस्त ॥



टिप्पणी प्रभु, टिप्पणी दाता, टिप्पणी की महिमा अपरंपार,



पद्म, श्री, और बाकी का भी बजा दिया है बैंड ॥



आप भी देखिए किस किस की पोस्ट ली है ॥



संतानों के लिए तो उनके माता पिता ही नायक हैं,




जब भी लिखता है कोई विवादित टिप्पणी मिली है ॥



इश्वर करे ऐसी ही चर्चा हो रोज रोज ,



ताऊ जी साप्ताहि पहेली अनोखा अंदाज़ है ,



आज की पोस्टों में ये पोस्ट छोड रही अपना छाप,



जरूर एलियन जी ने ही दिया होगा उसे निमंत्रण



हम सजाते आंगन , वो देते हैं लीप



राज भाई खूब मिलमिला और बतिया रहे हैं ,



रानी विशाल ने रची कविता , बेटी का जन्म,



लंठ आलसी पर फ़ाग का ये रंग चढा,


अराधना के ब्लोग में पढिए पिल्ला कथा का अंत,



हमने तो देखा और मुंह से निकला वाह प्रशांत भाई ॥



शंकर जी ने टेंशन प्वाईंट में दिया सको लठिया ,




शास्त्री जी जब भी कहते हैं , कहते हैं खरी खरी ॥



सागरनामा हूं, मगर मैं खारा नहीं हूं ,



कह रही हैं मनोरमा, फ़ेसबुक पर फ़तवा हुआ है जारी ,



चलिए बहुत पढ लिए अब हो जाए हो कुछ पेट पूजा की बात,






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