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रविवार, 8 सितंबर 2013

दंड पेलती हिंदी ............


देखिए गौर से लिखा है झ से झा :) :)


सितंबर का महीना बीमार और कमज़ोर होती हिंदी के लिए दंड पेलने का समय होता । एक तारीख से 14 सितंबर तक और कभी कभार तो पूरे महीने "हिंदी-हिंदी "खेलने के कई तरह के टूर्नामेंट और ट्वेंटी-ट्वेंटी (हिंदी बोले तो खेल प्रतियोगिता और बीस-बीसा ) आयोजित किए जाते हैं । इस खास मानसूनी मौसम में ,डेंगू मलेरिया  से ग्रस्त जनता के साथ ये समय "हिंदी" को ग्लूकोज़ की बोतलें चढाने का भी होता है । सरकार व प्रशासन तो हिंदी के साथ ठीक वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा कि वो आम लोगों के साथ करते हैं । आम आदमी की याद पांच बरस में एक बार आती है और हिंदी की याद बरस में एक दिन । 


हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने की घनघोर प्रतिज्ञा सरकार ने ले तो ली मगर जब कामकाज के नाम पर सिर्फ़ घपले घोटाले ही करने होते हैं तो फ़िर क्या फ़र्क पडता है वो हिंदी में करो या किसी अन्य भाषा में । हां इस  समय सरकार चाहे तो ये कह कह अपनी पीठ थपथपा सकती है कि कोयले आवंटन घोटाले से संबंधित सारी गुम हुई फ़ाइलें हिंदी में ही लिखी पढी गई थीं , अब कोई इसे गलत साबित करके दिखाए तो मानें । 

जहां तक हिंदी के साथ हुए इस तथाकथित अन्याय की बात है तो खुद अदालत के हाकिम ही कहते हैं कि कानून की दुनिया में हिंदी का क्या काम ? ठीक भी है , कानून हिंदी में होगा तो आम आदमी भी आसानी से समझ जाएगा ,जब आम आदमी कानून समझ ही जाएगा तो फ़िर तोडने से भी बच बचा जाएगा और अगर कानून नहीं टूटेगा , तोडा जाएगा तो अदालतें चलेंगी कैसे और हाकिम करेंगे क्या ??


हिंदी पर अगर कोई मेहरबान है तो वो है मोबाइल कंपनियां मगर हाय रे हिंदी की किस्मत वहां की हिंदी तो हिंदी की पूरी चिंदी कर डालने पर आमादा हैं ,जैसे ही मोबाइल खोलो ,"हाय , व्हाट्स अप्प्, और हिंदी गोल गप्प "

हालांकि हिंदी की लगातार पतली होती हालत पर ज्यादा दुबला होने की जरूरत कतई नहीं है क्योंकि हिंदी खुद दंड पेल कर कडी टक्कर दे रही है । सबूत चाहते हैं तो आप चेन्नई एक्सप्रेस को ही लीजीए न । अकेली हिंदी जब तक थी सौ करोड तक बिन्नेस का मामला पहुंचता था  , मगर जैसे ही हिंदी ने तमिल के साथ दो दो हाथ , कुश्ती दंगल और प्यार किया मामला दो सौ करोड के पार और उससे भी पारमपार पहुंचता दिख रहा है । सबसे अच्छी बात तो ये हुई है कि तमिल चार छ; फ़ीट लंबी तगडी होते हुए भी सिनेमा के अंत में हिंदी उसे पटक पटक कर जीत जाती है और फ़िर खुशी खुशी दोस्ती कर लेती है । 


शनिवार, 31 अगस्त 2013

मासूम नहीं रहे नाबालिग मुजरिम







अभी हाल ही में राजधानी के एक कॉलोनी में तीन स्कूली छात्रों ने मामूली सी बात पर अपने ही स्कूल के एक चौदह वर्षीय छात्र , जो नवीं कक्षा में पढता था को सरेआम पीट पीट कर मार डाला । इस घटना से तीन चार दिन पहले की एक घटना में उत्तरी दिल्ली स्थित किशोर सुधार गृह के नाबालिग आरोपी किशोरों ने इतना उत्पात मचाया कि आसपास के रिहायशी क्षेत्र के निवासियों में भय व्याप्त हो गया । इन दोनों बडी घटनाओं ने समाजविज्ञानियों की उस बहस को फ़िर खडा कर दिया जो दिल्ली के दामिनी बलात्कार कांड के समय एक नाबालिग आरोपी के कृत्य और वर्तमान कानून के अनुसार सख्त सज़ा से बच निकलने की संभावना के कारण उठ गई थी । हालांकि दिल्ली बलात्कार कांड के इस तथाकथित नाबालिग आरोपी के फ़ैसले पर फ़िलहाल रोक लगी हुई है क्योंकि सर्वोच्च अदालत "नाबालिग " की परिभाषा विशेषकर इन परिस्थितियों और अपराधों के परिप्रेक्ष्य में परिभाषित करने में लगी है । 

ज्ञात हो कि दिल्ली बलात्कार कांड के बाद गठित वर्मा समिति ने अपनी सिफ़ारिश में , बावजूद इसके कि देश भर के पुलिस अधिकारियों की हुई बैथक में निर्धारित आयु अठारह वर्ष को कम करने की सिफ़ारिश की गई थी, भी यही मत रखा कि सिर्फ़ किसी एक या दो घटनाओं और अपराध के कारण समाजविज्ञानियों एवं विधिज्ञों द्वारा निर्धारित आयु को कम कर देना तर्कसंगत नहीं होगा । इसके पीछे एक अहम वजह ये बताई गई कि निर्धारित उम्र सीमा देश के पूरे सामाजिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर निश्चित की गई थी और इसे बदलने या कम करने से उन मासूम अपराधियों , जिनके लिए वास्तव में इसे अठारह वर्ष रखा गया था, के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडेगा । 


दिल्ली बलात्कार कांड के एक आरोपी, जिसकी सज़ा पर फ़ैसला प्रतीक्षित है और इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय में प्रतीक्षित है एक अन्य याचिका जो नाबालिग की परिभाषा तय करने के लिए दायर और स्वीकृत की गई है । लेकिन अभी ये मुकदमा अपनी नियति तक पहुंचा भी नहीं है कि पुन: पूरे देश को शर्मसार करने वाले मुंबई सामूहिक बलात्कार कांड में शामिल आरोपियों में से एक आरोपी के भी किशोर अपराधी होने की खबर है । इन बडे अपराधों से इतर अन्य अपराधों में किशोरों के बढते दखल ने समाजविज्ञानियों को चिंता में डाल दिया है । 


राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकडों के अनुसार वर्ष २०१० से २०१२ तक कुल दर्ज़ अपराधों में युवाओं और किशोरों की संलिप्तता में ३९% तक की वृद्धि हुई है । झपटमारी , स्टंटबाजी , सट्टेबाजी , नशाखोरी , लूटमार जैसे अपराधों से लेकर हत्या , डकैती और बलात्कार जैसे संगीन अपराधों तक में किशोरों का बढता दखल किसी अनिष्टकारी भविष्य की ओर संकेत करता है । ब्यूरो ने अपनी पडताल से ये निष्कर्ष निकाला , अपराध के दलदल में फ़ंसे युवाओं में से सिर्फ़ २१ प्रतिशत युवा ही किसी मजबूरी या परिस्थिति से मजबूर होकार अपराध कर बैठे थे अन्य सभी , मौज मस्ती के लिए, झूठी शान शौकत दिखाने के लिए और रोमांच के लिए किए गए थे । इससे बदतर स्थिति और क्या हो सकती है कि वर्ष २०१३ के जून महीने तक सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में युवा अपराधियों की संख्या १९२८ तक जा पहुंची है । पिछले दो महीने में ही सिर्फ़ मुंबई की लोकल ट्रेनों और उसके आसपास खतरनाक स्टंटबाजी करते हुए१४ नाबालिग किशोरों ने अपनी जान से हाथ धो लिया । 

समाजविज्ञानियों ने अपराध जगत में किशोरों की बढती भागीदारी के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शहरी जीवन में शानो-शौकत का झूठा दिखावा , घोर उपभोक्तावादी रहन सहन नशे शराब की बढती लत , हिंसक व क्रूर होती प्रवृत्ति तथा सामाजिक मान्यताओं को दी जाने वाली चुनौतियां कुछ अहम कारण हैं इसके अलावा नादानी में घर से भागकर या किसी अन्य मजबूरी के कारण अपराध के दलदल में फ़ंसे युवक भी धीरे धीरे बडे अपराध करने में अभ्यस्त हो जाते हैं । अपराध विज्ञानी मानते हैं कि कम उम्र में किसी भी कारण से भटक कर अपराध व गुनाह का रास्ता पकडने वाले किशोरों के सुधार व उन्हें मुख्य धारा में लाए जाने की कोशिश व योजना में सरकार की उदासीनता भी एक बडी वजह है । समाचारों में आए दिनों सरकारी सुधार गृहों व आश्रय स्थलों में फ़ैली अव्यवस्था, किशोरों का दैहिक व मानसिक शोषण आदि उन्हें नई दिशा देना तो दूर उलटा पेशेवर मुजरिम बना देता है । 


सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिका जो ये निर्धारित करेगी कि नाबालिग द्वारा किए गए अपराध और उसे सुनाई जाने वाली सज़ा के मद्देनज़र "नाबालिग" की परिभाषा केल इए क्या सिर्फ़ कानून में निर्धारित उम्र को ही आधार माना जाए या फ़िर उसके "मानसिक स्तर" विशेषकार अपराध कारित करते समय उसकी गंभीरता व परिणाम को समझ सकने की उसकी क्षमता को भी ध्यान में रखा जाए । मौजूदा समय में कानूनी स्थिति यह है कि सात वर्ष से कम उम्र के शिशु द्वारा किए गए अपराध के लिए उसे कोई दंड नहीं दिया जा सकता । सात से बारह वर्ष की उम्र के किसी भी किशोर द्वारा किए अपराध के लिए उसे दंडित किए जाने से पहले उसके मानसिक स्तर विशेषकर अपराध की गंभीरता और उसके परिणाम की समझ को जानने की उसकी क्षमता का परीक्षण किया जाता है । अठारह वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए बने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट १९८६ के तहत साबित होने पर आरोपी को अधिकतम तीन वर्ष की सज़ा दी जा सकती है । 


अब सबसे बडा सवाल ये है कि दिल्ली बलात्कार कांड में जिस आरोपी के सबसे नृशंस और क्रूर कृत्य के कारण पीडिता युवती को लाख कोशिशों के बावजूद बचाया नहीं जा सका क्या उसे किसी भी तर्क , कानून , दलील से मासूम अपराधी माना जा सकता है ??? दूसरा अहम प्रश्न ये कि दिल्ली-मुंबई बलात्कार कांड में नाबालिग किशोरों को यदि सिर्फ़ उम्र थोडा कम होने के कारण नाममात्र की सज़ा दी जाती है तो क्या ये समाज के लिए एक अनुचित नज़ीर ,एक गलत परंपरा और दंड नहीं बनेगी ? सवाल सिर्फ़ कानून, अपराध और दंड का ही नहीं है बल्कि समाज, परिवेश व परवरिश का भी है क्योंकि आज का युवा ही कल देश का भविष्य बनेगा । 

बुधवार, 28 अगस्त 2013

लिखतन लिखतन जग मुआ , हाय पोस्ट पढे न कोय ........





एक टैम हुआ करता था जब पोस्ट के आने से पहले ही टीप मिल जाया करती थी । अरे हंसिए मत जी एक वाकया तो हमें भी याद है । ये उन दिनों की बात थी जब ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत नाम के दो धुरंधर एग्रीगेटर न सिर्फ़ धुंआंधार आती पोस्टों बल्कि टिप्पणियों को भी मुख्य पेज पर दिखाता था । तो ऐसे ही एक समय में एक पोस्ट आई जिसमें गलती से सिर्फ़ शीर्षक भर ही था भीतर कुछ नहीं लिखा था , इससे पहले कि पोस्ट एडिट होकर दोबारा आती इधर दे धडाधड टिप्पणियों ने अपना काम कर दिया था । वो बेहद रोचक दौर था और मुझे ये कहने में कोई गुरेज़ नहीं कि ब्लॉगवाणी पर दिखती उन दिलचस्प टिप्पणियों के कारण भी पाठक कई बार उन पोस्टों पर पहुंच जाते थे जिनपर शायद पहले नहीं पहुंचे होते थे । 


आज की तुलना में उन दिनों ब्लॉगों और ब्लॉगरों की संख्या कम थी लेकिन फ़िर भी कुछ ब्लॉगर जो न सिर्फ़ पोस्ट लिखने में बल्कि टिप्पणियों में भी बहुत नियमित हुआ करते थे जैसे कि आज भाई प्रवीण पांडेय जी अक्सर ब्लॉग पोस्टों पर टिप्पणीकर्ताओं की कतार में दिख ही जाते हैं वैसे ही । हम भी उस समय कुछ ऐसे ही कमर कस कर ब्लॉगिंग में लॉगिंग किए बैठे रहते थे कि या तो लिख रहे होते थे या  टीप रहे होते थे । और फ़िर होता भी क्यों नहीं , उस समय कौन सा ब्लॉगिंग की ये पैदा हुई सौतें , फ़ेसबुक , ट्विट्टर आदि इत्ती फ़ैशन में थीं ले देकर ऑरकुट और उसकी कम्युनिटीज़ थीं , मगर ब्लॉगिंग का तोड बनने का माद्दा कहां था उनमें । 

ऐसा नहीं था कि ब्लॉगिंग में मंदी का दौर नहीं आया,  आता जाता रहता था जी , लेकिन उसकी भरपाई के लिए हम सब ब्लॉगर खुदही कोई न कोई उठापटक वाला एंगल निकाल के दंगल शुरू कर लेते थे , फ़िर तो बात टिप्पणी और प्रतिटिप्पणी से शुरू होकर पोस्ट प्रतिपोस्ट , आरोप प्रत्यारोप तक पहुंच के माहौल को कुछ इस तरह से गर्म कर देती थी कि मज़ाल है जो कोई पोस्ट लिखने या टिप्पणी करने के अपने ब्लॉगरीय फ़र्ज़ से ज़रा भी चूक जाए । उन दिनों इसमें , होने वाली ब्लॉग बैठकियां , मिलन , आदि ने और बाद में पुरस्कार और पुरस्कार के तिरस्कार ने भी काफ़ी अहम भूमिका निभाई थी । हालांकि इन अचूक अस्त्रों पर तो हमें अब भी पूरा भरोसा है , यदा कदा बमबार्डिंग तो हो ही जाती है ।


इसमें कोई संदेह नहीं कि ब्लॉगिंग की इन सौतनों , खासकर फ़ेसबुक ने तो ब्लॉगरों के एक बडे समूह को जैसे हाइजैक ही करके रख लिया  , उनमें से तो एक हम खुद ही रहे । लेकिन ऐसा नहीं है कि ब्लॉगिंग की या ब्लॉगरों के आगमन की रफ़्तार थमी । कहते हैं न खाली हुए स्थान को भरने के लिए कोई न कोई आ ही जाता है । आज देखा जाए तो ब्लॉगरों की एक नई पीढी पूरी शिद्दत से महफ़िल जमाए हुए है । न सिर्फ़ खूब लिखा पढा जा रहा है बल्कि अब तो देखता हूं कि लिंक्स को सहेज़ कर एक साथ प्रस्तुत करने वाले प्रयास भी काफ़ी किए जा रहे हैं |


""एक बात जो सबसे ज्यादा खटक रही है वो ये कि सुबह से शाम तक जाने कितनी ही पोस्टें लिखी जा रही हैं , वो भी बेहतरीन और नायाब पोस्टें , एक से बढकर एक , अलग अलग विषयों और क्षेत्रों पर , मगर कई दिनों बाद भी उन पोस्टों पर पहुंचने के बाद भी वे अनछुई अनपढी सी लग रही हैं , हम पढ कम रहे हैं या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं । कारण जो भी हो , मगर ब्लॉग लेखकों के ये कहने के बावजूद कि इससे कोई फ़र्क नहीं पडता कि कोई पढे न पढे टीपे न टीपे , मुझे लगता है फ़र्क पडता तो है । मैं अपनी पुराने अंदाज़ और रफ़्तार में आने जा रहा हूं , देर सवेर आपको अपनी पोस्टों में प्रतिक्रिया देता , कुछ कहता , लिखता , दिख ही जाउंगा , जो साथी नियमित हैं वे तो मिलेंगे ही , मुझे उम्मीद है कि आप सब कहीं न कहीं टिप्पणी प्रतिटिप्पणी में भी मिलेंगे ...................मिलेंगे न "

मंगलवार, 25 जून 2013

आपदा , अमानवीयता और ब्रांडेड राहत




शुरू में जब समाचार माध्यमों में उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आफ़त के बारे में अकल्पनीय रूप से दुखद खबरें देखने सुनने को मिली तो अहसास हो गया कि देवभोमि फ़िर एक बार एक बहुत बडी आपदा की चपेट में आकर हज़ारों लोगों के असमय काल-कवलित हो जाने का कारण बनी । इसके बाद प्रशासन की काहिली और गैर जिम्मेदाराना सोच तथा रवैय्या जो बचे हुए लोगों को जल्दी नहीं बचाए जा सकने के कारण उजागर हो गया ये अगली आपदा साबित हुई । किंतु इसके बाद समाचार माध्यमों में जिस तरह से कुछ लोगों द्वारा लूट-मार , हिंसा , साधुओं तक द्वारा चोरी लूट और सबसे घृणित घायल /मृत महिलाओ/युवतियों का बलात्कार किए जाने की खबरें देखने पढने सुने को मिलीं उससे प्राकृतिक आपदा से ज्यादा दुखद अमानवीय आपदा लगी । इस कुकृत्य के बारे में कल्पना से भी घिन्न और उबकाई आती है । 

भारतीय समाज जितना पहले से आपदाओं को झेलता रहा है लगभग उतना पहले से ही आपदा से निपटने के लिए समाज की स्वाभाविक एकजुटता भी दिखती रही है । सुखद बात ये है कि जहां कुछ इंसान अमानवीयता की सारी हदों को भी पार करके हैवान सरीखे हो गए हैं वहां अब भी अधिकांश समाज सुख-दुख को परस्पर साझा करने की रवायत निभा रहा है हां , उत्तराखंड में जारे राहत सहायता अभियानों में बाज़ारवाद का प्रभाव भी देखने को मिल रहा है जहां ब्रांड और बैनर चमकाने की होड भी मची हुई है ।

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

आई(आइए) पी(पैसा)एल (लूटें)..IPL की बमचक



गूगल सर्च इंजन से साभार


तो आईपीएल का नयका संस्करण फ़िर से पूरे उफ़ान पर है और पब्लिक का जोश तूफ़ान पर है लेकिन तूफ़ान से भी ज्यादा आज कुछ तूफ़ानी करते हैं टाइप का जुनून तो सट्टा बाबा लोगों पर छाया हुआ है । ट्वेंटी ट्वेंटी में बॉलिंग और बैटिंग का रफ़्तार चाहे धीमा और तेज़ होता रहे लेकिन असलका बेटिंग अरे माने कि जुआ झपौडी जी , एकदम धुंआधार चल रहा है । आज ही आईपीएल के बहुत बडका कवरेज के साथ ही एक ठो नन्हा सा खबर भी देखे कि फ़रीदाबाद में चार ठो लईका लोग आईपीएल के मैच पर सट्टा लगाते हुए धरे गए । आयं ! धरे गए , लेकिन क्यों जी , आखिर ऊ लोग को भी तो आज कुछ तूफ़ानी करने का हक है कि नहीं ?


कायदे से देखा जाए तो सरकार और उनका तमाम नियम कानून का बस एक्के ठो मकसद रह गया है कि आम पब्लिक का जित्ता भी पैसा , खासकर खून पसीने की कमाई वाला पैसा , तो जैसे तैसे ऐसे वैसे करके गोरमिंट के खाते में ही जमा होना चाहिए फ़िर चाहे आप उसे टैक्स समझ के हफ़्ता वसूली टाइप से भरते रहें या फ़िर कि बचत समझ किसी बडे ही लिल्लन टॉप अकाउंट में जमा करवा के हो , जिसे आप जीते जी निकालने में यदि मर मरा गए तो आपके तमाम वारिसान उसे हासिल करने में खुद मर मराने की हालत में पहुंच जावेंगे और चलिए मान भी लिया कि आप हकदार साबित भी हो लिए तो क्या पता उस समय तक सहारा देने वाले खुद बेसहारा होकर कोर्ट कचहरी से जब्ती कुर्की करवा रहे हों । तो अईसी गंभीर स्थिति में आपको अपना पूरा कंसटरेसन सिर्फ़ गौतम गंभीर एंड पाल्टी पर ही लगा देना चाहिए ।


देखिए जी इत्ता इंस्टैंट फ़ायदा नुकसान तो ससुरा किसी भी इंन्वेस्टमेंट पिलान में नहीं पा सकते आप । और पिलान भी क्या गजब गजब के हैं । टॉस से लेकर फ़ुलटॉस तक और आउट से लेकर डाउट तक सबमें ही पेसे बनाने का जोरदार चांस मौजूद है । इस नए नए स्थापित हो रहे बिन्नेस के डिग्री धारकों को पंटर और उनके आगे की प्रमोशन पा चुके मनेजरों को बुकी के नाम से जाना जाता है आजकल । बॉस ! इसमें स्कोप और होप दुन्नो इतना वाइड एंड वाइल्ड है कि आपको हर सेकंड ही तूफ़ानी करने या तूफ़ानी हो जाने का इल्म होता रहेगा । टॉस की हार जीत पर , इत्ते गेंदों में इत्ते रन पर , फ़लाने ढिमकाने ओवर में विकेट पर , चौकों छक्कों की संख्या पर , खिलाडी के निजि विकेट या रनों पर , टीम की हार जीत पर ......ओह ओह ओह अब कित्ता बतावें और कित्ता गिनावें ।


अजी ये तो बस समझिए कि ट्रेलर है कहिए तो इसे आप प्रोबेशन समझ के खेल जाइए और एक बार झेल जाइए , जईसे ही आपको इसका चस्का लगा फ़िर तो , निगम पार्षद के चुनाव से लेकर गर्मियों के पावर कट तक और करीना के होने वाले बच्चे से लेकर किसी मंत्रीजी के लुच्चे तक की संभावना पर दांव लगा के आप संभावना सेठ बन सकते हैं । बस जिगरा बडा करिए और कूद जाइए , इत्ती बडी महासेल का ऑफ़र इन दिनों एकदम खुल्लम खुल्ला ,खुला हुआ है , बस लूटना है या लुटना है , या टूटना है , या चांदी कूटना है , फ़ैसला आपके ऊपर है ।

शनिवार, 4 अगस्त 2012

आम आदमी को बडा करिए .....






सियासत कमज़ोर है और डरपोक भी , सीना तान के अडा करिए ,
क्यों डिग जाता है विश्वास जरा से झटके से , विश्वास को खडा करिए ,
हर बार कोई क्यों लडे आपके लिए , आपकी लडाई है खुद लडा करिए,
लोकतंत्र में सबसे बडा है आम आदमी , तो आम आदमी को बडा करिए,

इतना बडा कि वो सब कुछ लील जाए , और सियासत की हर कुर्सी छील जाए


"अब जो होना है हो जाने दो , एक आध को भी खो जाने दो ,
जो जगे हैं उन्हें झिंझोडे रखो , जो उंघ रहें हैं उन्हें सो जाने दो,
नहीं होगा , नहीं होगा कब तक होगा ,अबकि तो ये हो जाने दो,
होती है कयामत तो हो जाए , अब क्रांति बीज़ को बो जाने दो ,"

9 अगस्त को ही क्यों 10 , 11 ,12 और तमाम तारीखों में नई नई क्रांतियों को जन्म लेने दो , जनलोकपाल ही क्यों , कालेधन का मुद्दा ही क्यों , भ्रष्टाचार , न्यायिक कदाचार , जमाखोरी , टैक्स चोरी ..सबको मुद्दा बनाओ और इतनी लडाइयां शुरू करो कि सियासत की रुह कांप उठे । निराशा से बाहर निकलो पागलों कि ये महज़ कुछ कुर्सियां हैं ,तोड डालो इनके पाए और धरती पर ले आओ इन्हें । उठो आगे बढो ,एक दूसरे का साथ दो और बढते चलो



ये क्यूं नहीं देखते आप कि इस उथल पुथल ने ,
आम आदमी को इक आम आदमी के साथ जोड दिया,
ये जो उठे हैं आज हाथ मुट्ठी बन के एक साथ , देखिएगा
कल बनके मुक्का इन्हीं मुट्ठियों ने , जो न सियासत का मुंह तोड दिया ।

और यकीन जानिए कि ऐसा होगा और जरूर होगा



जो ये हमारा ही कसूर है ,कि आज सियासत होके बैठी है मगरूर ,
तो तोडेगी अवाम ही इक दिन , और टूटेगा कुर्सी का ये गरूर ,
बेशक नए चेहरे होंगे और नई लडाई भी हो सकती है ,
बेशक हम रहें न रहें , लेकिन ये तय है ये सत्ता नहीं रहेगी जरूर ..

और उस दिन का इंतज़ार रहेगा

खडे रहो बुत बने हुए इसी तरह अगर तुम अपने साथ खुद चल नहीं सकते ,
खुद नहीं बदलना चाहते , कहते फ़िर रहे, वो ,व्यवस्था को बदल नहीं सकते
जो घुटने टेक दिए तुमने आज यहीं तो फ़िर लड तुम , कल नहीं सकते ,
जो सोना हो तो तप के कुंदन बनो , चंद चिंगारियों से यूं जल नहीं सकते
,



सवाल उठाया/पूछा जा रहा है कि क्या अन्ना टीम को राजनीति में आना चाहिए ..जवाब सिर्फ़ एक ..क्यों नहीं ..मेरे ख्याल से तो हर ईमानदार , काबिल और क्षमतावान को राजनीति में आना चाहिए ....नहीं आ रहे हैं तभी तो ये हाल है ..लेकिन सवाल का उत्तर हां या ना में देने से इतर मैं सोच रहा हूं कि ..जनलोकपाल विधेयक ...ये मुद्दा और इस मुद्दे की लडाई आज कहां है ..अब बाबा रामदेव का .विदेशों से काला धन वापस लाने का मुद्दा लडा जाना प्रस्तावित है ..उसे भी हो जाने दिया जाए , इस सरकार को सांस लेने की फ़ुर्सत नहीं दी जानी चाहिए । व्यवस्था परिवर्तन ....ये बहुत बडा सवाल है ..हल करने में बरसों लगेंगे और लगें भी तो हल किया ही जाना चाहिए ..अभी तो सिर्फ़ एक बात घूम रही है दिमाग में ,

आज के सबक को आप कुछ यूं पढिए ,
अपनी अपनी लडाई अब खुद लडिए ,.....

कैसे ये तय करना होगा ..प्रश्न बहुत सारे हैं ..विस्तार से लिखने का प्रयास करता हूं जल्दी ही.........

रविवार, 3 जून 2012

वो साढे सात साल की उम्र के " भाई साहब "







"भाई साहब मुझे भी "

मंदिर की कतार में खडे उस शख्स ने, जो यूं तो एकटक मंदिर के प्रवेश द्वार के पीछे भगवान की मूरत और वहां साथ ही दीवार पर लगी पर अपना ध्यान लगाए हुए थे , अचानक ही मुड कर उस आवाज़ की ओर देखा । हमेशा की तरह ,मंगलवार और शनिवार को एक निश्चित समय पर कुछ गरीब लोगों नुमा जीवों (उन्हें वो जिस तरह से हाथ पसार कर दूसरे के सामने खाने के लिए कुछ , प्रसाद के रूप में मिल जाने के लिए कुछ , और अन्य सभी तरह के कुछ की खातिर हाथ फ़ैलाए बैठे देखता उससे उसे अंदाज़ा हो गया था कि ये मानव शरीर प्राप्त वो जीव हैं जिन्हें अब भी दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती बिना किसी की दया के , इसलिए वे गरीब नुमा लोग जीव ही हैं )का एक झुंड मंदिर के बाहर बैठ जाता । 


मंदिर में आने वाले भक्त , मंदिर के अंदर जाते , प्रभु के दर्शन करते और फ़िर जब बाहर निकलते तो कभी प्रसाद , कभी फ़ल , कभी कुछ और जिसको जितना देना होता उस झुंड में बांट कर चले जाते । कुछ लोग अपनी मनौती के पूरे होने के बाद तो कुछ अपनी या अपने किसी प्रिय हेतु , घर से कुछ खाद्य पदार्थ , कभी पूरी सब्जी , कभी केले , कभी बिस्कुट , कभी कुछ और , बना कर लाते और उन झुंडों के जीवों को बांट कर चले जाते । ये क्रम कब से और कहां से चलता हुआ यहां तक पहुंचा ये शोध का विषय हो सकता है , अलबत्ता सरकार या प्रशासन के लिए ये कोई मुद्दा , मौका , समस्या , जैसा कुछ भी नहीं है सो इस पर उनसे कैसी भी अपेक्षा रखना बेमानी है । खैर तो उस दिन भी वो भक्त , मंदिर के बाहर अपनी बारी के आने का इंतज़ार कर रहा था

"भाई साहब मुझे भी ", उसने चौंक कर उधर देखा , क्योंकि ये आवाज़ एक बच्चे की थी , अमूमन तौर पर बच्चों के मुंह से अंकल मुझे भी या बाबू जी मुझे भी जैसा ही कुछ सुनने को मिलता है , सो चौंक उठना लाजिमी था । उसने देखा कि पांच उससे भी कम बरस का एक छोटा सा बच्चा जो उस जीवों के झुंड का एक हिस्सा था , ये आवाज़ उसकी थी । हैरान कर देने वाली बात ये थी कि वो जिसे भाई साहब कह रहा था , वो भाई साहब , एक साढे सात आठ साल का बच्चा था जो अपने माता पिता के साथ मंदिर आया हुआ था , दोनों हाथों में छोले पूरी के दोने लिए हुए एक एक करके उस झुंड के सभी लोगों में बांट रहा था ॥

बच्चा जो पांच साल का था उसके मुंह से ये स्वाभाविक तौर पर निकला था शायद , वजह ये थी शायद कि उसे लगा कि कहीं वो बच्चा , अपने किसी बचपने में कहीं उसे छोड न जाए । मंदिर की कतार में प्रभु के दर्शन पाने के लिए खडे उस व्यक्ति की दिमाग में यही बात गूंज रही थी और वो ईश्वर से पूछ रहा था कि बताओ प्रभु ,

"आखिर ये तुम्हारी दुनिया में एक पांच साल का बच्चा , कुछ खाने के लिए पाने की आस में एक साढे सात साल के बच्चे को भाई साहब  कहने को क्यों मजबूर है ????"

गुरुवार, 31 मई 2012

आज कुछ तूफ़ानी करते हैं ..........











जब पिटरोल प्राईस बढाने का डिसीजन लिए थे बैड ,
उससे पहिले मंतरी जी लोग यही साईत देख रहे थे ऐड,
(आज कुछ तूफ़ानी करते हैं ....आज कुछ तूफ़ानी करते हैं )




सुबह अखबार में एक ठो जाने कैसी तो खबर छपी थी सैड ,
तेज़ रफ़्तार बाईक ने मारी टक्कर ,दो घायल एक डैड ,
(ऊ भी साईत घर से देख के निकले थे इहे ऐड , आज कुछ तूफ़ानी करते हैं ...आज कुछ तूफ़ानी करते हैं)




रिज्लट का सुन के , पूछे पापा , हाऊ मच नंबर यू गॉट माई लैड ,
बचवा खुश , हुलस के बोलिस , टोटल नाइटीएट परसेंट डैड ,
(परीक्षा देवे जाए से पहिले ऊहो साईत देख के निकला था ई ऐड , ...आज कुछ तूफ़ानी करते हैं , आज कुछ तूफ़ानी करते हैं ....)




जीता केकेआर त पगलेटवा शाहरूख , झूम के हो गया एकदम मैड ,
पूछा राज़ जीत का , त गंभीरवा धीरे से कान में बोला , ई था हमरा लकी पैड ,
(बकिया टीम को हम मैच से पहले दिखा दिए थे ई ऐड .......आज कुछ तूफ़ानी करते हैं ...आज कुछ तूफ़ानी करते हैं)




रिज्लट का सुन के , पूछे पापा , हाऊ मच नंबर यू गॉट माई लैड ,
बचवा खुश , हुलस के बोलिस , टोटल नाइटीएट परसेंट डैड ,
(परीक्षा देवे जाए से पहिले ऊहो साईत देख के निकला था ई ऐड , ...आज कुछ तूफ़ानी करते हैं , आज कुछ तूफ़ानी करते हैं ..)

गुरुवार, 24 मई 2012

आओ ब्लॉगिंग की हम वाट लगाएं ...........












आओ ब्लॉगिंग की हम वाट लगाएं ,
सुलग रही चिंगारी पर घी डाल कर आग लगाएं ,

जब संपादक मैग्जीनों अखबारों के खूब गरियाते ,
तो फ़िर ब्लॉगर ही खुद ब्लॉगिंग को काहे नहीं गरियाएं ,

दाम लगे न फ़िटकरी , रंग भी चोखा आए ,
अपमान करे ये किसकी हिम्मत , सम्मान भी काहे करवाएं ,

बवाल हो ,बेमिसाल हो, फ़ौरन ही सब दौडे  आएं ,
अपना ब्लॉग है फ़िर काहे नहीं मौज की अपनी खाट बिछाएं ,

रसातल में ले चलें लो इसको, चलो इतनी फ़िर भद्द पिटाएं ,
छोड शब्द विचार तर्क , आओ मित्रों, अब लट्ठ उठाएं ,

कोई नया सोचे न कभी भी , उसके मन को इतना कल्पाएं ,
धधक धधक के जले रे ब्लॉगिंग , ब्लॉगर से पेट्रोल बन जाएं ,

माहौल मिज़ाज़ है गर्म यहां अभी , चल रही है देखो गर्म हवाएं ,
लाल बुझक्कड के सब नाना , फ़िर काहे किसी को समझाएं ,

छोडिए अब ये गदहा पचीसी , क्यों न ऐसा नियम बनाएं ,
लेखन पर ही हो बात हमेशा , ब्लॉगर का क्यों नाम ही लाएं ??

या फ़िर ब्लॉगिंग तो , नासपीटी , कब की होली ,
चलिए अपन भी अब , भाड में जाएं , भाड में जाएं ॥ 

शनिवार, 19 मई 2012

समाचार नहीं - सम अचार हैं ये ..अहा खट्टा मीठा






संसद में पेश होगा मनरेगा का लेखा-झोखा ,
अबे छोडो , डायरेक्ट बताओ , जनता को दिया है कितना धोखा
(बस रकमवा बता के छोड दीजिए जी , बकिया चलित्तर तो आपका जानबे करती है जनता)


राज्यसभा में 21 को पेश हो सकता है विधेयक लोकपाल ,
अरे छोडिए ई बेकार है मुद्दा , आप तो करिए कार्टूनवा आ आईपीएल पे बवाल ,
(ई कईसन हुआ रे हाल , हाकिम खुदे हैं चंडाल)


मंजूर हुई जमानत , तिहाड जेल से रिहा हो गए राज़ा ,
खूब कटा है केक , फ़ूटे पटाखे घर पे , और बजा बैंड बाजा
(हां हां आखिरकार शूरवीर ..कारगिल फ़तह करके न आए हैं , सरबे शर्म होती त डूब मरते)


माया के भ्रष्टाचार जांच को , अखिलेश जल्दी ही गठित करेंगे इक आयोग ,
अबे भक्क , ई साला जांच और आयोग का , पूरे देश को लगा हुआ है रोग ,
(एक बात बताओ बे , अबे लूट का पैसा तो असूले नय पाते हो किसी से ...कद्दू का जांच आ सुथनी का आयोग)


पिछला कै दिन तक जोर जोर से सब ढोल था पीटा ,संसद का उमर हो गया साठ ,
आ एतना दिन से रोज़ है बैठता , गिन के साला ,काम नहीं किया कुल आठ
(आ ई लोग को दरमाहा फ़ुल्ल चाहिए ...फ़ुल्लम फ़ुल्ल)


सौर उर्जा से संचालित होंगे , शहर के सारे बिजली घर ,
इसी भरपूर रोशनी में , मैच होगा , चीयर गर्ल्स मटकाएंगी कमर ,
(अबे ससुरों , जिन गावों में बसा अंधेरा , रुख करो न कभी उधर ...हट्ट बे बकवासे समाचार है ई सब)


अवैध वसूली को लेकर , इलाहाबाद में, जमकर हुआ बवाल ,
आयं , अभी तो इत्ता कांफ़िडेंटली बाबू अखिलेश आदेश दिए कमाल
(ई साला पोलटिकल आदेश के उलटा ही हो जाता है , आउर दीजीए पंद्रह दिन का टैम हो अखिलेस बाबू)


एमबीबीएस डॉक्टरों को देनी होगी गांवों में एक वर्ष की सेवा ,
एक साल में मरीज़ खतम सब , फ़िर शहरन में खूब उडावें मेवा ,
(केतना फ़रक किए शहर गांव में , सरकार , हे देवा रे देवा)


बोले राम गोपाल वर्मा , जो मुझे पसंद है वही पिक्चर बनाता हूं ,
पब्लिक का घंटा समझेगी , कई बार तो खुद भी समझ नहीं मैं पाता हूं
(डरना जरूरी है कि डरना मना है ..आज तकले साला संस्पेसवे बना है)


आईपीएल के खिलाग कीर्ति आजाद करेंगे आमरण अनशन ,
का बात करते हैं सर जी , आप भी लगावें सट्टा और जीतें भरपूर धन
(चलता रहेगा ई खेलवा टनाटन , कोई लगावे मन , आ कोई दिखावे तन)


15 दिन में सुधारो कानून व्यवस्था ,अईसन अफ़सरों को मिला है आदेश ,
एक पखवाडे में ठीक हो जाए सब , चाहते हैं नयका सीएम अखिलेश
(जे बात ...ऊपी में है दम , लेकिन टाईम दिए हैं कम ..का सर सोलवहां दिन से मरजेंसी लागू करने बाले हैं क्या हो)


उडी बाबा , बोली हैं ममता दीदी , शाहरूख पर लगे बैन पर फ़िर से हो विचार
फ़िर से माने , हां हां एकदम्मे जी , इनको परमानेंट ही बाहर करो न यार ,
(ई पी पा के फ़िर से करें डिरामा , फ़िलाप पिक्चर दे कर हिट करे हंगामा)


ब्लॉगजगत में गर्मागर्मी ,आजकल ,मची है पुरस्कारों की मारामारी जी ,
हर कोई कहता यही है सबसे ,अईसे नहीं चलेगा , पहिले सुनो राय हमारी जी
(तभी तो मैं कहता हू ," ब्लॉगिंग में उठा बवाल , ब्लॉगिंग को मिला उछाल ".....)


राहुल बाबा बोलिस हैं :कांग्रेस को हरा रहे हैं खुद पार्टी के नेता ,
तो का करें बेचारे , अब हर कोइयो थोडे न बन जाएगा गांधी फ़ैमिली का बेटा
(ए बेट्टा राहुल ....तनिक सरनेमवा हटाओ , आ तब ई जरा बोल के दिखाओ ..रगड देगा तुमहीको तुम्हरा पज़ा पालटी रे )..


फ़िज़ूलखर्ची पर सरकार हुई सख्त , उठाने जा रही है सख्त कदम ,
अच्छा , कौन सी सरकार बे , जिसके मंतरी कर रहे घोटाले धमाधम
(साले चुटकुल्ला सुना रहे हो भोरे भोरे)


105 अरब डॉलर की हुई कंपनी , आईपीओ से फ़ेसबुक हो गया मालामाल ,
आयं , चलो रे पेंसन चालू करो अब , नय तो हमारा भी हिस्सा दो निकाल
(रे जुकरबर्गवा ..ई साला पूरा दिन खटते रहें हम लोग , आ शेयर माल पीटो तुम ...बहुत नाइंसाफ़ी है गब्बर)


झारखंड में 14 विधायकों व मंत्रियों के ठिकानों पर पडा है सीबीआई का छापा ,
ल्यो अबे थक गए सुन सुन कर , ई बताओ आज तक तुमने कितनों को नापा
(न पैसा पाते हो वसूल , न कानून का शूल , सब जाते धीरे धीरे भूल ...बंद करो बे ई डिरामा छापा छापा का)


महिला से दुर्व्यवहार के आरोप में रॉयल टीम का एक खिलाडी हुआ गिरफ़्तार ,
काहे का रॉयल बे टुच्चों , साले जेंटलमेन खेल का बेडा गर्क कर दिए यार
(तनिक और करो बंटाधार ...ताकि ससुरा परमांनेन्टली बंद हुई जावे)


मंगलवार, 15 मई 2012

मेरा तो यही अंदाज़े बयां है .......















कार्टून पर प्रतिबंध लगाओ , फ़ेसबुक और गूगल को कर दो चाहे बैन ,
मैं उठा के कोयले का टुकडा, लिखूंगा सडकों पे ,छीनूंगा तुम्हारा चैन
(लगाओ न लगाम मेरी सोच पे , बोलो है , हिम्मत)


लखनऊ में निर्मल बाबा के खिलाफ़ मुकदमा हो गया दर्ज़ ,
लेकिन बाबा टीभी पर अब भी कर रहे किरपा , सुन रहे हैं सबका मर्ज़
(दसबंदी का करो इंतज़ाम ले ले करके कर्ज़ ...ई देस में बाबा एंड ढाबा ,दुन्नो फ़ुल इस्पीड में चलते हैं)


ये मत भूलना सियासत , हम ही लोकतंत्र हैं ,हम इस देश की अवाम हैं ,
हमसे ही वज़ूद है तुम्हारा , हम ही आगाज़ हैं और हम ही तुम्हारा अंज़ाम हैं
(जो हम मिट्टी तो तुम मिट्टी , जो हम पानी तो तुम पानी ....).


अनु आगा ने शपथ ले ली , सचिन और रेखा का अब हो रहा इंतज़ार ,
टी एन शेषण , किरन बेदी , जैसों को बुलाने की कभी हिम्मत दिखाओ यार
(बोलो है हिम्मत , अबे ओ मजबूत जोड के लोकतंत्र वालों)


सेना में अनुशासनहीनता पर हुआ रक्षा मंत्रालय सख्त ,
संसद की अनुशानहीनता के लिए मगर आपको कितन चाहिए वक्त
(जीर्ण शीर्ण सी काया तेरी ..और श्वेत तुम्हारा रक्त)


बोले हैं चाचा गडकरी ,अगिले चुनाव में राजग फ़िर सत्ता में आएगा ,
भिम बार से मांज मांज के फ़िर से , इंडिया शाईन कराएगा ..
(निरमान से लेकर साइनिंग तक ,भाई लोग इंडिया को चमका के ही मानेंगे)


साठ साल की हो गई संसद , लोकतंत्र का जरूर मनाओ जश्न ,
कितने साल और चाहिए होने को परिपक्व , उठ रहा मन में प्रश्न


राजधानी एक्सप्रेस में घटिया खाना , खाके सांसद समेत कई हुए बीमार ,
अच्छा बेट्टा तभी खबर है आई , टरेन में तो अईसने खाना रोज़े मिलता है यार ॥
(दीदी ..आपनी देखते होबि कि ना ..ई कि गंडोगोल होईचे रे बाबा)


साठ साल की हुई रे संसद , पीएम विशेष सत्र में बोले हैं ,
चलो शुक्र है आखिरकार , रिटायरमेंट की उम्र में मुंह तो अपना खोले हैं


राष्ट्रहित सर्वोपरि है , बोलीं अध्यक्षा , सीरीमती मीरा कुमार ,
पब्लिक तो समझबे करती है , तनिक नेताजी को भी तो समझाओ कोई यार



बोले हैं पिरधान जी , लोकतंत्र हुआ और भी मजबूत ,
ल्यो और सुनो ,अबे ई लोकतंतर है कि है लोकतंतर का भूत
(लोकतंतर तो कब्बे का भईया जी शुशाईईईईईड कर लिया हो पिरधान जी)


बोले चचा अडवाणी कल , पार्टियां करें एक दूसरे की विचारधारा का सम्मान ,
घनघोर घोटाला करके साइन करें इंडिया , आ घपला से करें भारत निरमान
(गनवा आता है न जी कि गा के सुनाएं , हो रहा भारत निरमान)



गिलानी ने कहा , हाफ़िज़ के खिलाफ़ सबूत नहीं हमरे पास ,
भेज दो इंडिया ,बिरयानी खिलाएंगे ,उहां तो साला खाता होगा घास
(अबे कसाब बना नवाब , आप देखे नहीं जनाब ???)



राष्ट्रपति ओबामा पर क्लिंटन हैं नाराज़ , दिया पद छोडने का सुझाव ,
अबे अईसा का करे दिहिस ओबमवा हिलेरी को , अचानक काहे इत्ता ताव
(कौनो भित्तर का है घाव , कुछो समझे नहीं रे भाव ..)


बोले बाबू जेटली ,सुधार की जरूरत है , भारतीय राजनीति की तस्वीर में ,
कद्दू सुधरेगी तस्वीर पोलटिक्स की , जब अईसन नेता हैं, देश के तकदीर में
(अबे फ़ेंको उठा के सबको गंगा जी के तीर में)


एयरसेल में अधिक विदेशी निवेश है , आया जांच के घेरे में ,
ल्यो एक बढी और मुसीबत , फ़िर से फ़ंस गए लुंगी बाबू फ़ेरे में
(लुंगी बाबू ...बोले तो ..???)


भाजपा से भली है कांग्रेस , अभी अभी फ़रमाए हैं , येदुरप्पा ,
हा हा हा मेडम्म का गुणगान किए हैं , मान के अपना पप्पा
(पोलटिस जो न कराए , बप्पा रे बप्पा)



साख को लेकर चिंतित संसद , गरिमा बनाए रखने का पास हुआ प्रस्ताव ,
अबे शाख की चिंता जाने दो , जड काट के ,दे चुके ,पहिले ही गहरा घाव ,
(काम धाम कुछ करते नहीं , बस खाओ फ़ैला के पांव)



झूठी निष्ठा , झूठी चिंता , झूठी है संवेदना , तुम्हारा जब सफ़ेद हुआ है खून ,
भूख ,अपराध , भ्रष्टाचार कुछ भी नहीं दिखता , तुम्हारा मुद्दा है बस इक कार्टून



साठ साल का हुआ लोकतंत्र कल से तुम पीटे जा रहे हो ढोल ,
काले धन , जन लोकपाल , भ्रष्टाचार पर मुंह से एक भी फ़ूटे नहीं रे बोल
(अबे कोई एक तो बोलता - भक्क साला , दु पईसा का औकात नहीं है)


बोले हैं बाबू लुंगी , मार डालो , पर ईमान पर , मत उठाओ सवाल ,
अच्छा बेटा लुंगी , हम क्वेश्चन भी न करें , तुम उडाते जाओ माल ,
(काहे हो गए पीले लाल , नोट पीट रहा है तुम्हरा लाल)



टेलिविजन चैनल एक घंटे में 12 मिनट से ज्यादा विज्ञापन नहीं दिखाएंगे ,
आयं ! ई का , लेकिन एक घंटे में दिखाने लायक , कार्यक्रम कहां से लाएंगे ,
(देखिए हो मर्दे , विज्ञापन दिखाइए कि कार्यक्रम , दुन्नो कूडा ही है आजकल)



पोंटी चड्ढा की मुश्किलें बढीं , पकडी गई 175 करोड की अघोषित आय ,
हाथी के संग थी दोस्ती , तो इतना तो खाना बनता ही था , हाय हाय ,
(ई बहिन जी के रिलेटिव भाई जी हैं ..)


अबे तुमसे कार्टून तक तो संभाले नहीं जाते , क्या खाक तुम हो बडे हुए ,
साठ साल साठ साल गा रहे हो कल , हो बैसाखी पर अब तक खडे हुए ..
(लूलों लगडों की सरकार , दुहाई तोरी बुद्धि रे)


जिन बच्चों का हवाला देकर ,माननीय भकभका के ,किताबों से कार्टून रहे हैं हटा,
तुम क्या समझे इसका मतलब , और वो क्या समझे , उनसे ही पूछ के देखो ज़रा
(मुझे यकीन है कि वो तुमसे ज्यादा समझदार हैं , न मानो , तो पूछ लो)


पूछी सीरीमती जी , कैसा हल्ला मचा है आजकल , खबरों में क्यूं है इतना है लोड ,
हमने समझाया, साठ साल का हुआ लोकतंत्र , संसद का चल रहा है महाएपिसोड ,
(ऊ फ़ौरन अंडरइश्टैंड कर गईं , महाएपिसोड एकदम्मे लपक के बूझ गईं)

शनिवार, 12 मई 2012

जश्ट ...झा जी इश्टाईल

















जरूरी ये नहीं कि आपने उठाई है आवाज़ , लेकिन उसे उठाया है क्या आज ,
शुरू तो होगी लडाई जरूर , आप नहीं करेंगे तो अगली नस्ल करेगी आगाज़




अल जवाहिरी के अपने यहां होने से पाकिस्तान ने किया इनकार ,
हा हा हा अईसे नय मानेगा , अबे एक अमेरिकी हेलिकाप्टर भेजो यार


राजमा-चावल पिरधान जी , पिरधानी मिली हैं पिज़्ज़ा ,
भभोड के खाए देस को , दुन्नो ले रहे मज्जा , जरूर मिलेगी सज़्ज़ा




सुने हैं कि , इस देश में बढता जा रहा है उर्ज़ा का संकट ,
बढबे करेगा जब इत्ता हेलोजन जलेगा , आ बेचोगे आईपीएल का टिकट


(अबे इश्टेडियमवा सबमें का सौर उर्ज़ा फ़िट किए महाराज)


राष्ट्रपति पद की दावेदारी पर कांग्रेस हो गई है मौन ,
जब सबके नाम पर है इत्ती दुविधा तो महामहिम फ़िर बनेगा कौन


(बाबा को ही अपाइंट किया जाए ..बा देस पर फ़ुल्ल किरपा बना देंगे)




इंडिया में भर रहे चोर लुटेरे दिन रात , फ़िर भी भरती नहीं उनकी तिज़ोरी रे ,
भारत में रोज़ मर रहे हैं भूखे , सरकार सडा रही है अन्न , रखने को नहीं बोरी रे




सब्जियों की कीमत पर नहीं गल रही है सरकार की दाल
अबे ये सरकार की इनायत है , सब्जी सब्जी नहीं लगती , दाल लगे न दाल


ल्यों और सुनो : कैंसर के ईलाज में मददगार होगी हल्दी ,
तुम खबरवे छापो , हल्दिया का पेटेंट करा लेगा अमरीका तुमसे जल्दी


(सुस्तियास्टिक गोरमेंट ....सुस्त एंड स्लीपी सरकार)




मिसेज़ हिलेरी : सईद मामले में अमेरिका पाक पर दबाव बनाएगा ,
अभे भक्क साला , भगाओ इसको , बदले में अमेरिकवा डील कोई खराब बनाएगा


(अबे फ़िर बेचने आई होगी मेडम्म ,कोई नया मशीन)




बोल दिए हैं फ़िर से बबा रामदेव , हाय दिल्ली पहुंच गए हैं डाकू ,
हाय हाय बाबा कपालभारती : जब तब चलावें सरकार करेजा चाकू


(सरकरवा कलेजा चाक चाक हुई जाए रहे)




हिलेरी आर्डर दिहिस है , भारत , ईरान से दूरी बनाए रखे ,
ई है असलियत , अबे इत्ते दिन , महाशक्ति बनने का तुम बस सपना दिखाए रखे


(माने अब ई अमेरिका से पूंछें कि स्कूटर में केतना तेल भराना है बे )




सिकूरटी मुनिस्टर माने रक्षा मंत्री : सेना हर चुनौती का मुकाबला करने को तैयार,
जे बात , तैयारी में , घटिया टिरक तो हईए है , बस खरीद लो घटिया से हथियार


राष्ट्रपति चुनाव पर पलट रहे हैं खूब सारे दांव ,
कट्टल हैं जी , कभी पांव पे कुल्हाडी , कभी कुल्हाडी पे पांव


(हाय लुट गया सारा गांव)


आज चांद होगा पृथ्वी के सबसे पास ,
दाल रोटी पे आफ़त है , खाने को मिलेगी घास


(चांदवा एतना महंगाई अफ़ोर्ड नय कर सकेगा पक्का)




विश्व खेल जगत में भारत के खिलाडियों का हो गया बोलबाला ,
किंतु पईसा बस किरकेट में , बांकी सब झिंगालाला झिंगालाला


(ऊ लाला ऊलाला ..)


गठबंधन सरकार चलाना एक कला है : बोले हैं शरद पवार ,
आ घोटाले कर कर के चलाना विज्ञान , जियोह्ह मेरे सरकार


(केतना बेलेंस गोरमिंट मिला है आपको देखिए)




सिंघवी की जगह नाईक बने संसदीय समिति के अध्यक्ष ,
चलो ठीक है , ओईसे पुरनका वाले भी थे कई काम में दक्ष


(उनका तो चलचित्र तक फ़िल्माया गया था जी)




अबे ई जो माननीय, मिनट मिनट पे , अपने मान अपमान का रोना गा रहे हैं ,
इन्हें समझाओ यार , सेवक हैं ,बस , पांच साल का प्रोबेशनरी ड्यूटी बजा रहे हैं


(अबे परमानेंट भी नहीं हो यार , तब एतना हल्ला मचाते हो)




पिरधान जी की बैठक में असहमति , एनसीटीसी को किया सबने खारिज़ ,
दुर अपने तो बौक हैं , मुरुतिया जैसे , सरकार को खुदे मार गया है फ़ालिज़


(बौक माने गूंगा , बोले तो MUTE , बूझे न)




दादा मुखर्जी बोले हैं , गठबंधन सरकारें बाधक है सुधारों ,
तो का हुआ , अबे बटोर लो , घोटाले तो हो रहे न हज़ारों में


(अरे हज़ारों मतलब , हज़ार लाख करोड जी)




उत्तर पिरदेस में परमोसन में आरक्षण का सिस्टम हुआ खतम ,
अबे देखना , पाल्लामेंट में गर्मी होगा , उबल जाएंगे बलम


(संसोधन होगा फ़ौरन ही , आ फ़िर वही सिस्टम ..हो बोलो तारारा)




यूपीएससी के परिणाम में में लडकियों ने फ़िर से बजाया डंका ,
इसके बावजूद भी हम रोज़ जलाते रावण , मगर देस हो गया लंका


(कमाल तो तब हो जब , ये सब दुर्गा रूप निकलें , शत्रु संहार को तत्पर)






ई देस का अजबे ट्रेजडी , एक तरफ़ तो दावा कि पहुंचेंगे अपना राकेट लेके MOON
आ दूसरी तरफ़ है मचा बवेला , साठ साल में भी समझ ना आए इन्हें कार्टून




बोफ़ोर्स के बाद पहली बार मिलने जा रही है सेना को नई तोप ,
चलो भई , सेना को हो न हो फ़ायदा , घोटाले का मिला नया स्कोप

गुरुवार, 3 मई 2012

झा जी रिपोर्टिंग बैक सर जी





पिछले दिनों अनियमित रहने के बाद अब फ़िर से गाडी को पटरी पर लाने की फ़ुल्लम फ़ुल्ल तैयारी चल रही है । इन दिनों जो कुछ पढते देखते रहे , और उस पढ देख कर जो भी ये मन बेसाख्ता सा कुछ कह गया .,..लीजीए आपके सामने है
.





संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण होगा हंगामेदार ,
अबे बाहर भी कोई कम हंगामा , नहीं करते हो यार
.

अक्षय तृतीया पर आज 15 टन सोना बिकने की है उम्मीद ,
दस परसेंट को लेने दो बे , नब्बे प्रतिशत, तो सब्जी रहे खरीद ..
.

ल्यो डूब गया एक और टाइटेनिक और उसका भेलन्टाईन ,
हाय अबकि तो सुने हैं , आसिक को करना पडा रिजाईन
.

ल्यो भईया हुई जाओ तैय्यार , साइड इफ़्फ़ेक्ट ऑफ़ ...टू जी घोटाला ,
कॉल रेट , बढेगा इत्ता कि बस , गाते रहोगे पुतरा ...ऊ लाला , ऊ लाला
.

चार साल के बच्चे ने खिलौना न लाने पर पिता को गोली दी मार ,
ओह यानि कि महाप्रलय न भी आए तो , दुनिया अब खतम ही समझें यार
.

लोकपाल पर कम हुए मदभेद : ई अब कह रही है सरकार ,
आयं , अबे अईसा का देख लिया , फ़ट्ट बदल लिए बिचार
.

केंद्र सरकार में फ़ेरबदल के संकेत , पद छोडने को चार मंत्री भी तैयार ,
आयं, अबे ई का , अबे अब तो फ़ुल्ल शर्म कर लो , अब तो गिर जाए सरकार
.

वित्त राज्यमंत्री बोले , नियंत्रण मुक्त होंगी कीमतें , यानि डीज़ल में लगेगी आग ,
उठाओ रे लाठी प्रजाजनों , थकूच डालो , बहुत फ़न बढा रहा है महंगाई का नाग
.

इंडिया में पोलटिस्स की रे कैसी बजी है बैंड ,
खुदे सरकार अपने एम पी सब को कर रही सस्पैंड
.

ल्यो जी ताजा ताजा सुन रहे हैं अभी ई घनघोर समाचार ,
सालों पहले एक ठो महाअभिनेता , नेता होते ही , हुए एक नेता के शिकार
.

अबे बंद करो ई चैनल सौ ठो , फ़ोड के फ़ेंकों इस रिमोट को यार ,
दिन रात करें हैं ओवर टाईम , मगर दिखा नहीं सकते "चित्रहार "
.

जो गद्दियों पर बिठाना जानते हैं ठाकुर , उन्हें सियासत फ़ूंक देना भी आता है ,
हम हैं जो समझाया ,मिटा देते है सब , मिटाने से पहले भला कौन समझाता है
.

पोलटिस खराब ,पोलटिसियन भी खराब , का अब मत मचाइए हल्ला ,
लो चली सियासत चाल रे ऐसी , संसद में बैठे आइला , ले कर अपना बल्ला
.

सरकार के हैं सारे घोटाले और घोटाले की सरकार है ,
भूख से होती हर मौत की , सरकार ही जिम्मेदार है
.

सुस्त है रफ़्तार यूं , जाने इस देश में तभी क्या क्या न हो रहा है ,
रोज़ होते घपले घोटालों के धमाकें में , कैसे मज़े से सो रहा है ..
.

अन्ना हज़ारे ने रखी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ यूएन संधि लागू करने की मांग ,
हो गया लागू , जब एक ठो बिल अपना पास करने में सरकार की कांप रही रे टांग
.

बोफ़ोर्स घोटाले में अमिताभ को फ़ंसाने का दबाव था ,
अबे ई तो सबको पता था कि , तुम्हरा इंटेसन पहिले भी खराब था
.

सियासी पिच पर अब मास्टर बिलास्टर अपना बल्ला भाजेंगे ,
आ इसी को अपना महान काम बता के हाकिम नाचेंगे
.

अईसन अचूक टाईम पे बोफ़ोर्स से दगा , अमिताभ जी का बयान ,
आइला को एमपी बनाया , समझ नय रहा है कोई ,खुश हो कि हैरान
.

ऊ पी के बाद महाराष्ट्र में भी करेंगे दौरा , अईसा किए है राहुल बबा डिसाईड ,
हा हा हा हा तैयार रहो बे महाराष्ट्र कांग्रेस , बोलो भईया जी शुशाईईईईईईईड



हा हा हा माननीय सबका इन दिनों हाय घनघोर चल रहा अपमान,
बार बार लुटने का दे रहे दोहाई , अबे का अब घंटा बचा सम्मान


रामदेव बाबा पर बिफ़र गई , सारी सियासी जमात ,
अबे गनीमत है जो बोल रहे हैं , जनता तो लगाएगी लात ..


बताइए हो ई खबर है , ममता दीदी ने गाना गाया ,ममता दीदी ने खाना खाया
नौटंकी , दाती बाबा ,कपिलवा चुटकुला, न्यूज़ है, हाय कैसा ये जमाना आया



बजट के बाद कई मंत्रियों पे गिरेगी गाज , बदली नज़र आएगी दिल्ली सरकार
अबे ई का खबर है बे , दुन्नो लुटेरा है , काहे का बजट और काहे की सरकार..



यूपी में एक और घोटला, एफआईआर हुई दर्ज.
हाय हाय डाक्टर बदल गया , मगर बदला नहीं रे मर्ज़


अबे सुनो , ई महामहिम के नाम पे , इतना जादे करो नहीं बिचार ,
फ़ुल्ल देस पे हो जाएगी किरपा , ई बाबा को ही बना दो यार ..




तो दोस्तों , आपसे पहले ही कह चुके हैं कि ब्लॉगिंग को अभी घनघोर ब्लॉगिंग की जरूरत है , सो हे मित्रों , लिक्खाडों , और पढाकुओं , सब तैयार हो जाएं , अपनी उंगली की मालिश करा लें , उसे पेचकस से कस लें और फ़ौरन ही रिपोर्ट करें 

गुरुवार, 8 मार्च 2012

चिन्हिए तो ...हम भी हैं क्या






ई प्रागैतिहासिक काल में जब हम होली मनाया करते थे ..तबका एक ठो छवि चित्र संग्रहालय में से छांट के जब तब हम अईसे अवसर पर इहां साट देते हैं ..चिन्हिए तो ..हम भी हैं क्या

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