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शनिवार, 22 अगस्त 2009

जय हो गणपति बप्पा की, देखिये किसकी चर्चा की

साल का ये आधा भाग ..कम से कम भारत में तो बहुत ही खुशियों भरा रहता है ...या कहें की त्योहारों का / उत्सवों का ...रोशनी का , मिठाइयों का ..अजी क्या क्या कहें ..और किस किस का मौसम होता है ....और मौसम खुशगवार होने की तैयारी कर रहा होता है ..तो बस शुरू कीजिये आप भी ..तैयारी ..गणपति पूजा की, दुर्गा पूजा की..दिवाली की ..सबकी........शुभकामना ....

चलिए फिलहाल तो चर्चा का मजा लीजिये ....

सिगरेट के साहित्य (विल्स कार्ड ) ,के बाद, अब बीडी ब्रेक का मजा लीजिये ,
अजी मारिये गोली आपत्ति को , आप तो यूँ ही लिखा कीजिये

कहती है स्वप्निल , इस बार , उसके घर भी आयेंगे गणेशा ,
हमारी शुभकामना , सुख समृद्धि भी आये साथ हमेशा ..

सुना है आजकल प्रोपर्टी की रेट हो रहे हैं हौट,
फिर भी अविनाश भाई कहते , कहाँ पे लूं मैं प्लौट

राज भाई का आनन फानन में भारत आना हुआ ,
हुए अस्वस्थ , तो फिक्रमंद ये ज़माना हुआ


सफ़ेद घर में आज ऐसी हरी भरी एक पोस्ट है गयी लगाई,
पढ़ के , देख के , जाने किस किस को घर की याद आयी

लंठ महाचर्चा में , अब आ गए हैं बित्तन बाबा ,
गिरिजेश जी की अद्भुत शैली, अद्भुत आभा

ये कहते हैं , कमीने न नेचुरल हैं न ही इमानदार ,
कमाल है , कमीने भी ऐसे क्या होते हैं यार

परसाई जी को याद करके , शरद भाई ने कमाल का संस्मरण है पढ़वाया ,
जिस जिस ने चखा इसको , कभी मछली का, कभी फिश करी का स्वाद आया

पढ़ा , देखा , सुना कि, बिहार से खाने की इक थाली है आयी,
इस पोस्ट ने माँ की फिर से याद है दिलाई

कमीने देखने जाना था , फिर भी अलोक जी ने चर्चा कर दी चिट्ठों की,
आप खुद ही देखिये , चर्चा हुई है कित्तों की

ताऊ जी की पहेली का उत्तर देने का अब समय हुआ ख़तम ,
जय गणपति बप्पा की , इस बार समझ गए हम


ऐड्स दूर करने के लिए मंत्रों का हो गया आविष्कार,
वाह वाह कलयुग में अद्भुत ये चमत्कार

नेता निकलते सड़क पर , सड़कें होती बंद ,
राजतंत्र में आज यही मुद्दा हुआ कलमबंद

संगीता जी ने मंजू दीदी के बहाने , ये किसका दर्द उठाया ,
आप खुद ही देखिये , कौन कौन पढ़ -टीप के आया

विश्व स्वस्थ्य संगठन के खिलाफ यहाँ हुआ विरोध ,
होम्प्योपैथी के खिलाफ क्यूँ करे कोई प्रतिरोध

बारिश से बेहाल हुए , निकल गया सारा दम ,
इरफान भाई की तुलिका में फंस गया दिल्ली नगर निगम

आसान नहीं होती , राख में मुस्कान की तलाश ,
गौर से पढियेगा, पंक्तियाँ है बहुत ख़ास

इंसान के भीतर इक कुत्ता छुपा होता है ,
जानिए वो कैसे कैसे बड़ा होता है

वो पूछ रहे हैं , कहाँ चली गयी देश की दाल ,
हम क्या कहें जी , खाए हो गए कितने साल

मिसर जी गए घूमने , पहुँच गए बाजार,
कैमरा भी साथ था , धाँसू पोस्ट हुई तैयार


इस पोस्ट का , शीर्षक है , जयचंद , जिन्ना और जसवंत ,
इसी के साथ अब इस चर्चा कर , करते हैं हम अंत



तो मित्रों/बंधू ..आज की चर्चा हुई ख़तम,
कल रविवार की चर्चा के साथ फिर से हाज़िर होंगे हम

9 टिप्‍पणियां:

  1. चर्चा बडी धांसू है जी. कल तक हम भी करते हैं इंतजार.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  2. मस्त चर्चा!!

    गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाऐं.

    उत्तर देंहटाएं
  3. त्यौहारों की आई बहार
    हर तरफ बरसेगा प्यार
    गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ

    उत्तर देंहटाएं
  4. हमरी बड़ाई करने के लिए धन्यवाद जी। हम शर्मा रहे हैं। :)

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर-
    बहुत आभार.
    श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनाएं-
    आपका शुभ हो, मंगल हो, कल्याण हो |

    उत्तर देंहटाएं

पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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