इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

सोमवार, 31 अगस्त 2009

मंडे मुस्कान मंद मंद, चिट्ठी चर्चा छंद छंद


मुझे नहीं पता कि मैं..चर्चा में क्या करता हूं...कोई कहता है..तुकबंदी है..तो कोई कहता है छंदमयी है चर्चा..बस अपना तो एक ही फ़ंडा है...आपको पढ के जो भी मेरे मन में आता है....उसे दो पंक्तियों में समेट कर रख देता हूं...मुझे खुशी होती है..कि इसी बहाने इतने सारे ब्लोग्स को एक दम घुस कर पढ लेता हूं...वैसे पढ्ने के लिये मुझे बहाने की जरूरत नही है..मगर ये तो है ही.....और खुशी दोगुनी तब हो जाती है जब अविनाश भाई द्वारा दिये गये जादू के चिराग ...अजी लिंक बनाने का नुस्खा ...को पकड कर मैं आपको उन सब तक ले जाता हूं..आज एक और खास बात कहनी है आपसे...बहुत जल्दी ही मैं इस चर्चा में ......एक ही चर्चा में .. सौ पोस्ट को समेट कर सबसे लम्बी चर्चा आपके सामने रखने की कोशिश करुंगा...




आज ब्लोगजगत की सबसे प्यारी ये खबर ..
एलियन जी की सालगिरह , पर सबकी नज़र..


अरे आप खुद ही देखिये मैं क्या बता दूं..


सबने प्यार और फ़ूलों का गुलदस्ता भिजवाया...

अपना नुकसान करेगा , जो रहेगा इससे अकेला रह कर..


छुट्टी हो गयी है, किसकी कहां पर,


बेचैन हुआ ब्लोग्गर, पोस्ट लिखी फ़टाफ़ट...


फ़ार्मूला यदि रहे कारगर तो इनको जरूर बताना..


यहां रोटी के लाले, पट्ठा पिज़्ज़ा खा रहा है..


दसवीं सालगिरह पर ब्लोगस्पोट ने दिये क्या क्या उपहार,


तारीखों की कहानी की पोस्ट बडी ये मस्त..


क्या था सारा गोलमाल, आज समझ में आया..


आज मोरा मन कहता है, छूं लूं इनके पांव.


अरे आपने नहीं पढा, तो आप पढेंगे कब


ब्लोगजगत की अपनी पत्रिका है जनाब


बस ये नहीं पता चला कि , क्या मिली थी रामप्यारी.


फ़ुर्सत से पढने का, फ़ुर्सत से सोने का..


आज बहुते गंभीर होके कहते हैं फ़ुर्सतिया,





तो फ़िर आप घूमिये..इस दुनिया में..अजी आपकी ही है..

सर दर्द ने शाम से किया हुआ है परेशान,
आज इतने से ही काम चलाइये श्रीमान..

























































































13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब है यह चर्चा! पर इस का टिप्पणी बक्सा बहुत नीचे चला गया है। बीच में बहुत स्पेस है। तलाशना पड़ रहा है।

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  2. जी हां आपने सही कहा है....मैं देख रहा हूं कि ऐसा क्यों हुआ है..तब तक के लिये क्षमाप्रार्थी हूं...

    उत्तर देंहटाएं
  3. @ दिनेशराय द्विवेदी

    खैर .... मनायें अभी मिल तो रहा है
    जब अजय भाई छंद लिखेंगे सौ
    तो पढ़ने वाले भी जायेंगे सो
    वैसे लिखेंगे अगर एक दिन में ही
    तो सिर दर्द भी थक जाएगा।

    आते जाओ बढ़ते जाओ पढ़ते जाओ
    टिप्‍पणी का बक्‍सा अपना लाओ।

    सोते जाओ जगते जाओ
    जाग जाग कर आगे बढ़ते जाओ
    पता लगेगा बार बार एक ही पोस्‍ट
    पप्‍पू वाली पढेंगे, मुन्‍ना को तरसेंगे।

    जब टिप्‍पणी करना चाहेंगे तो
    कैलेंडर में अगला दिन लिखा पायेंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह जी झा जी बहुत शानदार चर्चा.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. छंद छंद चर्चा मंद मंद मुस्कान दे गई..वाह!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी चर्चा तो रहती है मस्त
    माने ने माने कई हो जाते हैं पस्त

    उत्तर देंहटाएं
  7. खाली जगह देख कर हम समझे कि सरदर्द मे ऐसा ही लिखा जाता है ।

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  8. खूबसूरत बुनी गयी चिट्ठी चर्चा । बेहतर ।

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  9. क्षमा की कोई गल्ल नहीं। चिठेरों और टिपेरों में यह गैप तो जमाने से रहा है! :)

    उत्तर देंहटाएं

पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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