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सोमवार, 24 अगस्त 2009

संगीत ब्लोग्स का, बात उनके सुर साज की , लीजिये जी पेश है चिट्ठी चर्चा आज की

जी हाँ सच ही तो कहा है ...मेरे लिए तो सारे ब्लोग्स संगीत की तरह हो गए हैं...जिसे भी खोलता हूँ ..नयी धुन...नए बोल...नया सुर..नए साज...और नया गीत-संगीत....बिलकुल अलग अलग स्वाद, अलग अलग मिजाज..अलग अलग राग वाला ...खैर ...ये मेरी समस्या है ...की मुझे इसमें कभी संगीत..कभी साहित्य..कभी समाज..और कभी पता नहीं क्या क्या दिखता ही रहता है...आप तो आज की चिट्ठी चर्चा का मजा लीजिये ..

आप देखिये , इनका क्यूँ और कैसे मन कर रहा है कूदने का,
ऐसी धारा प्रवाह लेखनी , वक्त है पढने का, और डूबने का

चलते फिरते कबाड़खाने में पहुँच गयी आज कनुप्रिया,
आप खुद ही देखिये , किसने किसको याद किया

ताऊ की मंडे मैगजीन का अपना इक स्थान,
इसीलिए इतने कम समय में ही बन गयी पहचान

लावण्यम पूछे अंतर्मन से कित्ते हमारे साल हुए,
गणपति बाप्पा को समर्पित पोस्ट पढ़ कर हम निहाल हुए

भारत में त्यूहारों का है लोक जीवन से सम्बन्ध,
इस विषय पर आज पढिये अनवरत में निबंध

इंटरनेट पर हिंदी, मिथक और यथार्थ,
कैसा किया विस्फोट, आपने हे पार्थ

कैसी है सच्चाई , कैसी है ये कहानी,
देह की भूख के आगे , सब कुछ बेमानी

कह रहे हैं डाक्टर बाबू सबका समझाए के ,
उड़ जाना नहीं, सबके होश उडाये के

फाटक चंद और झंडू लाल घूमने गए भोपाल,
सुन्दर चित्रों से सजी हुई पोस्ट बनी कमाल.

कौन जाने कौन क्या कह जाए कब,
महुआ कहे आज अपनी उदासियों का सबब

मेलं मेल की धक्कम पेल , ऐसी बढ़ी तकरार,
इसका भी इलाज लेके फिरसे आया ब्लॉग बुखार

आज जन्मदिन है पी डी के लड्डू गोपाल का,
सबको चल गया पता, लल्ला हो गया इक साल का

कहती हैं भावना , अब ठीक हो गयी बिटिया रानी,
बाँकी की पोस्ट आगे अभी और है आनी

वाया अविनाश भाई, पप्पू सबको बुला रहा ,
व्यंग्य लिखो , इनाम पाओ, सबको यही बता रहा

आज मिली सूचना , दुबले भी हैं दौड़ते,
जो नहीं हैं दुबले , वो उनपे पोस्ट हैं लिखते

हे भगवान् अब मत भेजना किसी भी जिन्ना को ,
देखिये कितना टेंशन हो गयी, बेरोजगार मुन्ना को

सिगरेट और संगीत से सज गया आज मयखाना ,
पीओ पढो या सुनो , जो मन आये कर आना

जन्मदिन है आज अदा का, वही अदा दिखाती रही,
कह रही है आज अदा, अदा खुद से ही बतियाती रही

फिर से एक बार वो हो चीज जो वो है,
क़माल की है ये , जो है सो है


चलिए रात बहुत हो चुकी है ..इसलिए आज की चर्चा पर विराम लगाते हैं..बहुत समय से सोच रहा हूँ की ..जो नया इस चर्चा के लिए सोच रखा था ..उसे प्रयोग में लाऊं...मगर शायद अभी वक्त मुझे उतना वक्त नहीं दे रहा है ...चलिए आगे सही..

8 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा! मस्त चर्चा. दुबलों को बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  2. पूरा ब्‍लॉग जगत घुमा दिया
    जो नहीं पढ़ पाए थे हम
    वो सब भी पढ़वा दिया।
    जय हो या
    अजय हो।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी तुकबंदी का नहीं कोई सानी
    ये बात तो झा जी हमने भी मानी

    उत्तर देंहटाएं
  4. फ़िर एक जोरदार छंदमयी चर्चा पढकर तबियत मस्त होगई.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. झा जी हम अपना जन्मदिन मना लिए
    सांझ होते-होते देखिये आप से बतिया लिए
    बहुत शानदार चिट्टा चर्चा है आपका...
    सव्सें ब्लॉग में घूम आये हैं....कहूँ टिपियाये हैं तो कहूँ नहीं टिपियायें हैं.....

    उत्तर देंहटाएं
  6. झा जी कहिन तो एसन कहिन के कहेते ही रह गयिन ,
    पर जो भी कहिन बहुत बढ़िया कहिन ,
    यह तो हम भी कहिन |

    बताओ करें तो करें क्या ...................??????
    को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार |
    सच में इस के विषय में हम सब को कुछ न कुछ तो करना ही चाहिए ...
    आप की क्या राय है ??

    उत्तर देंहटाएं

पढ़ लिए न..अब टीपीए....मुदा एगो बात का ध्यान रखियेगा..किसी के प्रति गुस्सा मत निकालिएगा..अरे हमरे लिए नहीं..हमपे हैं .....तो निकालिए न...और दूसरों के लिए.....मगर जानते हैं ..जो काम मीठे बोल और भाषा करते हैं ...कोई और भाषा नहीं कर पाती..आजमा के देखिये..

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