
कल जब इस पोस्ट पर भाई खुशदीप ने टिप्पणी की कि , क्या मैंने कभी रेडियो प्रसारण सेवा में हाथ आजमाने की नहीं सोची तो मुझे बताना पडा कि एक दशक पहले जब मेरा अंतरिम चयन पटना औल इंडिया रेडियो के लिए समाचार वाचक /अनुवादक के पद पर हुआ था , मगर अंतिम चयन नहीं हो पाया । इसी तरह बैठे बैठे अचानक एक धमाकेदार ख्याल आया जिसपर यूं तो मैंने बात आगे बढा दी है , मगर सोचा कि आप सबकी राय भी लेता चलूं ।
तो आईडिया ये है कि , ब्लोग पोस्टों की , ब्लोग पर हो रही दिलचस्प बहसों की , ब्लोग पर लिखी जा रही कविताओं ,गज़लों,शेरों, कहानियों और सभी कुछ को रेडियो कार्यक्रमों के साथ जोडा जाए तो । हालांकि इस विषय पर कुछ न कुछ तो रेडियो पर होता ही रहता है । जैसा कि एक वर्ष पहले रेडियो जर्मनी हिंदी सेवा ने ब्लोग्गिंग पर एक प्रस्तुति भी की थी । और इतना ही नहीं एफ़ एम रेडियो के उदघोषक भी अपने कार्यक्रमों में अपने ब्लोगस की चर्चा करते रहते हैं । इसके लिए फ़िलहाल तो मैंने सभी हिंदी प्रसारण सेवाओं को पत्र लिख कर आग्रह किया है कि यदि ऐसा संभव हो सकता है कि ऐसे किसी कार्यक्रम की शुरूआत ,की जा सकती है तो मैं खुद ही इसे तैयार करके भिजवा सकता हूं । अन्यथा ये बडी आसानी से खुद उनके प्रसारक कर सकते हैं ।
इसके साथ ही ये योजना भी है कि सभी एम एम रेडियो चैनलों से भी आग्रह किया जाएगा कि वे जब भी किसी सामयिक विषय पर कोई कार्यक्रम कर रहे होते हैं तो इन ब्लोग पोस्टों में कही गई बातों को बहसों को और टिप्पणियों का भी उपयोग कर सकते हैं ।
तो तैयार हैं आप सब रेडियो ब्लोग्गिंग के लिए ........................................